
“कमजोर नही हैं नारी”
कवियत्री-सुमन दाधीच
सुमेरपुर (राजस्थान)
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त्रेता,द्वापर युग में देखो,
जन्मी ऐसी-ऐसी नारियाँ।
कौशल्या और देवकी,
प्रभु को जन्म दिया जिन्होंने।
गोदी में खिलाया,पालन का सुख पाया।
कमजोर नही हैं नारी।
काव्य सृजन में सदियों पूर्व,
महादेवी वर्मा,अमृता प्रितम,सुभद्रा कुमारी चौहान ने साहित्य जगत में नाम अपना चमकाया।
कमजोर नही हैं नारी।
समय शूरवीरता दिखलाने का आया,
जब-जब भारत भूमि पर पाया अग्र पंक्ति में नारी को।
रानी दुर्गावती व लक्ष्मीबाई ने,
लोहे के चने,दुश्मनों को चबवाए।
फिर दे दी आहूति निज प्राणों की,
कमजोर नहीं हैं नारी।
राजनीति की बात जब आती,
हरदम उनकी याद है आती।
इंदिरा,सरोजिनी,
सुषमा ने राजनीति कर लंबे अरसे तक,नाम जगत में कमाया।
कमजोर नही हैं नारी।
खेल जगत में जब हम झाँके नाम एक से एक हैं पाते।
पीटी उषा,सायना, मैरी कॉम स्वर्ण, रजत,कांस्य पदक पाकर उज्ज्वल देश का नाम किया।
कमजोर नही नारी।
कौन सा क्षेत्र है जग में ऐसा,
जहाँ नारी ने पहुँच बनाई।
चाहे हो पायलट, चाहे सेना अधिकारी,
ट्रेन ड्राइवर,नासा या नेवी,कहाँ तक गिनाऊं।
हर जगह ऊँचा परचम उनका।
धन्य-धन्य भारत की नारी,
कमजोर नहीं हैं नारी।
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