(दिव्य राष्ट्र के लिए नीरू शर्मा)
रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रेम, विश्वास, सम्मान और आत्मीयता का प्रतीक भी है। इस पवित्र पर्व पर जब किसी ऐसे व्यक्ति की कलाई पर राखी बाँधी जाए, जो भगवान श्रीकृष्ण की सेवा और भक्ति में अपना जीवन समर्पित कर रहा हो, तो उस क्षण की अनुभूति और भी विशेष हो जाती है।
आज मैंने भी रक्षाबंधन कुछ अलग और बेहद भावपूर्ण तरीके से मनाया। हम सभी जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को राखी बाँधने की सुंदर परंपरा है। कृष्ण जी के प्रति प्रेम और श्रद्धा रखने वाला हर भक्त उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानता है। इसी भावना के साथ आज मैंने कृष्ण जी के सेवक, यानी पंडित जी को राखी बाँधकर रक्षाबंधन मनाया।
मेरे लिए यह केवल राखी बाँधने की रस्म नहीं थी, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा और उनके सेवक के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक सुंदर अवसर था। जब राखी पंडित जी की कलाई पर बाँधी, तो मन में यही भाव आया कि यह धागा केवल उनकी कलाई पर नहीं, बल्कि मेरी आस्था और कृष्ण भक्ति से भी जुड़ रहा है।
कृष्ण भक्ति में प्रेम का बहुत बड़ा महत्व है। श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से हमें सिखाया कि रिश्ते केवल नाम और रिश्तेदारी से नहीं बनते, बल्कि सच्चे भाव से बनते हैं। जहाँ प्रेम और सम्मान होता है, वहाँ हर रिश्ता पवित्र बन जाता है। इसी भावना ने आज के रक्षाबंधन को मेरे लिए और भी खास बना दिया।
पंडित जी कृष्ण जी की सेवा में रहते हैं। उनके माध्यम से मंदिर में आने वाले भक्तों को पूजा-पाठ, भक्ति और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। ऐसे सेवक का सम्मान करना मेरे लिए स्वयं कृष्ण जी के चरणों में श्रद्धा अर्पित करने जैसा है।
राखी का यह छोटा-सा धागा हमें एक बड़ी बात सिखाता है—ईश्वर के दरबार में कोई रिश्ता छोटा या बड़ा नहीं होता। सच्ची भावना ही सबसे बड़ा रिश्ता होती है। जब मन में श्रद्धा हो, तो एक साधारण-सा क्षण भी जीवन की खूबसूरत स्मृति बन जाता है।
आज राखी बाँधते समय मन में कृष्ण जी के प्रति कृतज्ञता भी थी। जीवन में सुख-दुःख, उतार-चढ़ाव और अनेक परिस्थितियाँ आती रहती हैं, लेकिन जब मन में भगवान का भरोसा होता है तो भीतर एक अलग ही शक्ति महसूस होती है। कृष्ण जी से यही प्रार्थना है कि वे सभी के जीवन में प्रेम, शांति, सुख और सद्भाव बनाए रखें।
रक्षाबंधन का त्योहार हमें यह भी याद दिलाता है कि हमें केवल अपने रिश्तों की नहीं, बल्कि अपने आसपास के हर व्यक्ति की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। प्रेम बाँटने से कम नहीं होता, बल्कि और बढ़ता है। एक छोटी-सी राखी भी किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकती है और मन में अपनापन जगा सकती है।
आज मैंने कृष्ण जी के सेवक पंडित जी को राखी बाँधकर जिस तरह रक्षाबंधन मनाया, वह मेरे लिए एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव रहा। ऐसा लगा जैसे इस पवित्र धागे के माध्यम से कृष्ण जी के चरणों में अपनी भक्ति और प्रेम अर्पित कर रही हूँ।
मेरी यही कामना है कि श्रीकृष्ण सभी के जीवन को प्रेम और विश्वास से भर दें। हर घर में खुशियाँ हों, हर रिश्ते में मिठास हो और हर दिल में कृष्ण नाम की भक्ति हो।
रक्षाबंधन का यह धागा सिर्फ कलाई पर नहीं बँधा, बल्कि आज श्रद्धा, प्रेम और कृष्ण भक्ति के साथ दिल से दिल का एक खूबसूरत रिश्ता जुड़ गया।