(दिव्य राष्ट्र के लिए डॉ. सीमा दाधीच)
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥
जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था। उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)
भारतीय संस्कृति का सबसे पावन पर्व रक्षाबंधन है। इस दिन बहने अपने भाई के कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं अर्थात रक्षा बंधन यानी रक्षा करने वाला बंधन है यह पर्व श्रावण माह के पूर्णिमा को आता है यह हिंदू जैन धर्म का प्रमुख त्यौहार है यह मुख्य रूप से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में त्यौहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं होते बल्कि वे समाज और परिवार को जोड़ने का माध्यम भी होते हैं इसी पर्व में रक्षाबंधन विशेष स्थान रखता है। भाई बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित यह पर्व हर वर्ष परिवारों में प्रेम उत्साह और अपनापन का वातावरण लेकर आते हैं राखी का धागा भले ही छोटा होता है लेकिन इसमें भावनाओं की गहराई बहुत होती है आज का जीवन पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यस्त हो गया है नौकरी व्यवसाय प्रतियोगिता पढ़ाई और भाग दौड़ लोगों को अपने परिवार से दूर कर रखा है आज परिस्थितियों बदल गई है वीडियो कॉल, संदेश और ऑनलाइन उपहार ने दूरियों को कम करने का नया माध्यम दिया है लेकिन आमने-सामने साथ बैठकर खुशियां बांटने का यह त्यौहार अलग है आज के समय में इस रिश्ते का अर्थ व्यापक हो गया है जिम्मेदारी केवल बहन की रक्षा करना नहीं बल्कि उसके सम्मान,स्वतंत्रता, शिक्षा,सपनों और अधिकारों का समर्थन करना भी है वही बहन भी भाई के जीवन में भावनात्मक सहारा और विश्वास की मजबूत कड़ी होती है इसीलिए राखी को रक्षा के पारंपरिक अर्थ तक सीमित करना उचित नहीं होगा यह पर्व आपसी सम्मान,विश्वास और भावनात्मक सहयोग का पर्व बन चुका है।
राजस्थान में रामराखी और चूड़ाराखी या लूंबा बाँधने का रिवाज़ है। रामराखी सामान्य राखी से भिन्न होती है। इसमें लाल डोरे पर एक पीले छींटों वाला फुँदना लगा होता है। यह केवल भगवान को ही बाँधी जाती है। चूड़ा राखी भाभियों की चूड़ियों में बाँधी जाती है। महाराष्ट्र राज्य में यह त्योहार नारियल पूर्णिमा या श्रावणी के नाम से विख्यात है। इस दिन लोग नदी या समुद्र के तट पर जाकर अपने जनेऊ बदलते हैं और समुद्र की पूजा करते हैं। इस अवसर पर समुद्र के स्वामी वरुण देवता को प्रसन्न करने के लिये नारियल अर्पित करने की परम्परा भी है। यही कारण है कि इस एक दिन के लिये मुंबई के समुद्र तट नारियल के फलों से भर जाते हैं।
कलाई पर बंधी राखी समय के साथ फिक्की पड़ सकती है लेकिन उसके पीछे छिपा प्रेम कभी फीका नहीं पड़ता। धागा टूट सकता है, दूरी बढ़ सकती हैं,समय बदल सकता है लेकिन सच्चे भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास और अपनत्व की डोर हमेशा मजबूत बनी रहती हैं। यही रक्षा बंधन का संदेश है और यही इस पर्व की सबसे बड़ी खूबसूरती है। रक्षाबंधन पर एक नागरिक को यह प्रण लेना चाहिए कि वह नारी जाति का सम्मान और प्रत्येक स्त्री में अपने बहन और बेटी का रूप देखें जिससे अपराधों के संख्या घटे और उनके प्रति दुर्व्यवहार की भावना मन में उत्पन्न नहीं हो, यह त्यौहार एक दिन का नहीं बल्कि पूरी जिंदगी का है जिसका उदाहरण महाभारत में कृष्ण से सीखने को मिलता है, महाभारत द्रौपदी ने कृष्ण को धागा बांधा और उसकी रक्षा का दायित्व कृष्ण ने अपने कंधे पर लिया धागा बांधना ही पर्याप्त नहीं है प्रत्येक नारी को सम्मान देकर ही रक्षाबंधन को खूबसुरत बना सकते है।