
(डॉ. गौरव गोयल, सीनियर कंसल्टेंट – इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजी एवं न्यूरोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर)
जयपुर, दिव्यराष्ट्र/ अक्सर लोग मानते हैं कि ब्रेन स्ट्रोक आने पर व्यक्ति अचानक गिर जाता है या बेहोश हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्ट्रोक नींद के दौरान भी आ सकता है? डॉ. गौरव गोयल, सीनियर कंसल्टेंट – इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजी एवं न्यूरोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के अनुसार, कई बार व्यक्ति रात में बिल्कुल सामान्य स्थिति में सोता है, लेकिन सुबह उठने पर उसका एक हाथ या पैर कमजोर होता है, चेहरा एक तरफ झुका हुआ दिखाई देता है या बोलने में परेशानी होने लगती है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को ‘वेक-अप स्ट्रोक’ कहा जाता है।
*क्या होता है वेक-अप स्ट्रोक?**-
वेक-अप स्ट्रोक वह स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को नींद से जागने के बाद स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देते हैं। चूंकि व्यक्ति सो रहा होता है, इसलिए यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि स्ट्रोक वास्तव में किस समय शुरू हुआ था।
स्ट्रोक मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला इस्केमिक स्ट्रोक, जिसमें मस्तिष्क तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिका में रुकावट आ जाती है। दूसरा हेमरेजिक स्ट्रोक, जिसमें मस्तिष्क की रक्त वाहिका फटने से रक्तस्राव होता है।
*सुबह उठने पर किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?**
यदि सुबह जागने के बाद अचानक चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा दिखाई दे, एक हाथ या पैर में कमजोरी महसूस हो, बोलने या दूसरे की बात समझने में परेशानी हो, आंखों से दिखाई देने में बदलाव आए या चलने में संतुलन बिगड़ने लगे, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कई बार व्यक्ति सोचता है कि शायद गलत तरीके से सोने के कारण हाथ सुन्न हो गया है या नींद पूरी न होने से चक्कर आ रहे हैं। लेकिन अचानक दिखाई देने वाले ऐसे लक्षण स्ट्रोक की चेतावनी हो सकते हैं।
*क्या समय निकल जाने के बाद भी इलाज संभव है?**
स्ट्रोक के इलाज में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, वेक-अप स्ट्रोक में लक्षण शुरू होने का सटीक समय मालूम नहीं होता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इलाज संभव नहीं है।
आधुनिक एमआरआई और सीटी आधारित इमेजिंग तकनीकों की मदद से डॉक्टर कुछ मरीजों में यह आकलन कर सकते हैं कि मस्तिष्क का कितना हिस्सा प्रभावित हुआ है और क्या अभी भी कुछ हिस्से को बचाया जा सकता है। जांच के आधार पर चुनिंदा मरीजों को क्लॉट घोलने वाली दवा या मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी जैसे उपचार का लाभ मिल सकता है।
*ऐसी स्थिति में क्या करें?**
सुबह उठते ही स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं। व्यक्ति आखिरी बार कब सामान्य स्थिति में था, जैसे रात में सोने से पहले का समय, यह जानकारी डॉक्टर को जरूर दें। मरीज को खुद से एस्पिरिन, कोई अन्य दवा या खाने-पीने की चीज न दें, क्योंकि स्ट्रोक का प्रकार जांच के बाद ही स्पष्ट होता है।
डॉ. गोयल के अनुसार, स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर उनके अपने आप ठीक होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। समय पर अस्पताल पहुंचना मस्तिष्क को होने वाले नुकसान और स्थायी विकलांगता के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



