
राजस्थान की पृष्ठभूमि पर आधारित रोमांचक फिल्म लालच, सत्ता और पारिवारिक विरासत की शक्त कहानी
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ कलाम एकेडमी और समर जैन प्रस्तुत धूड़ (सैंडस्टॉर्म), सोल ऑफ डेजर्ट प्रोडक्शन द्वारा स्टूडियो ऐनक के सहयोग से निर्मित फिल्म 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। टीज़र को मिली शानदार प्रतिक्रिया के बाद निर्माताओं ने जयपुर में आयोजित एक भव्य समारोह में फिल्म का आधिकारिक ट्रेलर जारी किया। इस अवसर पर फिल्म के कलाकारों और पूरी टीम की उपस्थिति रही।
ट्रेलर दर्शकों को ‘धूड़ (सैंडस्टॉर्म)’ की रहस्यमयी और रोचक दुनिया से परिचित कराता है। फिल्म में दिग्गज अभिनेता यशपाल शर्मा के साथ अलका अमीन, भवानी सिंह चौहान, विवेक पारीक प्रवीण चौधरी, वानिकी त्यागी और अन्य कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। ट्रेलर के पहले दृश्य से लेकर अंतिम क्षण तक कहानी दर्शकों को बांधे रखती है। प्रभावशाली नाटकीय दृश्य, भावनाएं, दमदार संवाद, मन को छू लेने वाला संगीत और राजस्थान के मनमोहक दृश्य फिल्म की दुनिया को और प्रभावशाली बनाते हैं।
1990 के दशक के शुरुआती दौर के राजस्थान की पृष्ठभूमि में स्थापित ‘धूड़ (सैंडस्टॉर्म)’ लालच, अधिकार, मजबूरी और पारिवारिक विरासत को बचाए रखने की जद्दोजहद की कहानी है। एक गहरे पारंपरिक समाज के बीच आगे बढ़ती यह कहानी उन परिस्थितियों को सामने लाती है, जहां रिश्ते और महत्वाकांक्षा एक-दूसरे से टकराते हैं। ट्रेलर एक ऐसी कहानी की झलक देता है, जिसकी जड़ें राजस्थान की मिट्टी में गहराई से जुड़ी हैं, लेकिन जिसकी भावनाएं सार्वभौमिक हैं।
आनंद सिंह चौहान द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म राजस्थान के सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। ‘धूड़ (सैंडस्टॉर्म)’ पहली राजस्थानी फिल्म है, जो देशभर में सिनेमाघरों तक पहुंचने की यात्रा पर निकल रही है। राजस्थान की संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक परिवेश को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करते हुए फिल्म का उद्देश्य राजस्थानी सिनेमा को क्षेत्रीय सीमाओं से आगे ले जाना और इसकी समृद्ध कहानी कहने की परंपरा को देशभर के दर्शकों तक पहुंचाना है।
फिल्म और उसकी यात्रा के बारे में बात करते हुए निर्देशक आनंद सिंह चौहान ने कहा, “धूड़ (सैंडस्टॉर्म) मेरे दिल के बेहद करीब है, क्योंकि यह कहानी राजस्थान की मिट्टी से निकली है, लेकिन इसके केंद्र में मौजूद भावनाएं सार्वभौमिक हैं। हमने पूरी कोशिश की है कि फिल्म का संसार उस समय, स्थान और संस्कृति के प्रति पूरी तरह प्रामाणिक महसूस हो, साथ ही इसका नाटक, संघर्ष और भावनाएं हर दर्शक से जुड़ सकें। टीज़र को मिली प्रतिक्रिया हमारे लिए बेहद उत्साहजनक रही और ट्रेलर के माध्यम से हम दर्शकों को इस दुनिया की और गहरी झलक देना चाहते थे। राजस्थानी कहानी को देशभर के सिनेमाघरों के दर्शकों तक ले जाना हमारे लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होने के साथ-साथ बेहद रोमांचक अवसर भी है।”
फिल्म का संगीत और गीत-संगीत मेहुल सुरती ने तैयार किया है, जो ‘हेल्लारो’ में अपने प्रशंसित काम के लिए जाने जाते हैं।
‘धूड़ (सैंडस्टॉर्म)’ का हिस्सा बनने के अनुभव के बारे में अभिनेता यशपाल शर्मा ने कहा, “जिस चीज ने मुझे सबसे पहले धूड़ से जोड़ा, वह आनंद द्वारा रची गई दुनिया और जिस ईमानदारी से किरदारों को लिखा गया है, वह थी। यह कहानी राजस्थान की मिट्टी से जुड़ी है, लेकिन इसकी भावनाएं ऐसी हैं जिन्हें हर दर्शक समझ सकता है—परिवार, महत्वाकांक्षा, अधिकार, भय, रिश्ते और उस चीज की रक्षा करने की मजबूरी, जिसे इंसान अपना मानता है। मेरे किरदार में कई परतें हैं और उसकी जटिलता को निभाना मेरे लिए बेहद संतोषजनक अनुभव रहा। मुझे सच में विश्वास है कि दर्शकों को इस फिल्म में कुछ नया और अलग देखने को मिलेगा।”
फिल्म का निर्माण समर जैन, नरेंद्र कृष्णिया, मुकेश पारीक, डी. एस. चौहान और अभिषेक चोपड़ा ने किया है। मिराज सिनेमाज के सहयोग से हो रही इसकी सिनेमाघरीय यात्रा का उद्देश्य राजस्थानी कहानी कहने की कला को व्यापक मंच प्रदान करना है, साथ ही इसकी मौलिकता और प्रामाणिकता को बरकरार रखना है।
मिराज सिनेमाज के उपाध्यक्ष, प्रोग्रामिंग एवं वितरण, रिचर्ड चेट्टियार ने कहा, “धूड़ राजस्थान की मिट्टी से जन्मी एक ऐसी कहानी है, जो हमारे लिए बेहद खास है। ऐसी फिल्म के साथ खड़ा होना हमारे लिए गर्व की बात है, जो राजस्थान की संस्कृति और उसकी कहानी कहने की परंपरा को देशभर के दर्शकों तक लेकर जा रही है। मिराज सिनेमाज को इस फिल्म का समर्थन करने पर गर्व है।”
‘धूड़ (सैंडस्टॉर्म)’ केवल एक क्षेत्रीय कहानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और विरासत को एक प्रभावशाली कथा, सशक्त अभिनय और बड़े पर्दे के लिए तैयार की गई सिनेमाई प्रस्तुति के साथ जोड़ती है।
‘धूड़ (सैंडस्टॉर्म)’ 23 अक्टूबर को राजस्थान के सिनेमाघरों में तथा देश के चुनिंदा सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म विशेष रूप से देशभर में बसे राजस्थानी मूल के दर्शकों तक पहुंचने के साथ-साथ हर उस दर्शक को आमंत्रित करती है, जो राजस्थान की विरासत, संस्कृति और मिट्टी से जुड़ी एक सशक्त कहानी को बड़े पर्दे पर अनुभव करना चाहता है।




