
अब फॉर्मूले पर ध्यान देने की बारी, होम केयर उत्पादों से साफ-सफाई हुई स्मार्ट
मुंबई, दिव्यराष्ट्र: भारतीय उपभोक्ताओं के खरीदारी के तरीके में, पिछले दशक के दौरान, बदलाव आया है। चाहे डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ हो या त्वचा की देखभाल (स्किन केयर), बच्चों की देखभाल (बेबी केयर) या व्यक्तिगत देखभाल (पर्सनल केयर) से जुड़े उत्पाद हों, खरीदारी के फैसले में सामग्री (इंग्रीडिएंट) के लेबल महत्वपूर्ण हो गए हैं। उपभोक्ता अब फॉर्मूलेशन की तुलना कर रहे हैं और मार्केटिंग के दावों के अलावा अन्य चीज़ों पर ध्यान दे रहे हैं। नीलसन आईक्यू के अनुसार, सामग्री और उत्पाद की जानकारी में पारदर्शिता की अब उपभोक्ता का भरोसा बढ़ाने में प्रमुख भूमिका हो गई है। फिर भी, एक श्रेणी ऐसी है जो काफी हद तक इस बदलाव से अछूती रही है और वह है, होम केयर (घर की देखभाल)। हमारे घरों में लगभग हर दिन, डिटर्जेंट, डिशवॉशिंग लिक्विड, फ्लोर क्लीनर और सरफेस क्लीनर का उपयोग होता है। लेकिन सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले घरेलू उत्पादों में शामिल होने के बावजूद, उन्हें अभी भी उनके फॉर्मूलेशन से जुड़े विज्ञान के बजाय, आम तौर पर, खुशबू, दाग हटाने की क्षमता और कीमत के आधार पर आंका जाता है।
होम केयर का भविष्य ज़्यादा झाग, तेज़ खुशबू या ज़ोरदार विज्ञापनों से तय नहीं होगा। यह बेहतर केमिस्ट्री, सोच-समझकर चुनी गई सामग्री, ज़्यादा पारदर्शिता और ऐसे जागरूक ग्राहकों से तय होगा जो अपने घर में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों से हर तरह की बेहतरी की उम्मीद करते हैं। अब सही मायने में सवाल यह नहीं है कि “यदि दूसरे देश अपने डिटर्जेंट के फॉर्मूले बदल रहे हैं, तो हम क्यों नहीं?” बल्कि, सवाल यह है: क्या भारत भी फॉर्मूला बदलने से जुड़े सवाल पूछने के लिए तैयार है?
गौरतलब है कि यह भारत में सबसे तेज़ी से वृद्धि दर्ज करने वाली एफएमसीजी श्रेणी में से एक है। आईएमएआरसी समूह के अनुसार, भारतीय घरेलू क्लीनर बाज़ार के 2034 तक लगभग 14% सीएजीआर से वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है। इसकी वजह है, साफ-सफाई के प्रति बढ़ती जागरूकता, शहरीकरण और प्रीमियम होम केयर उत्पादों की बढ़ती मांग। उम्मीद है कि इस श्रेणी के विस्तार के बीच, लोग अब सिर्फ सफाई से आगे बढ़कर पारदर्शिता और बेहतर फॉर्मूलेशन पर ध्यान देंगे। विश्व के कई हिस्सों में यह बदलाव पहले से ही हो रहा है, जहां उपभोक्ताओं की बदलती उम्मीदों से न केवल नियम प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि होम केयर उत्पाद को डिजाइन करने और उनकी विनिर्माण का तरीका भी बदल रहा है।
पूरे यूरोप में, डिटर्जेंट में नवोन्मेष को नियम और उपभोक्ताओं की मांग के आधार पर हो रहा है। यूरोपीय संघ के क्षेत्र में डिटर्जेंट में इस्तेमाल होने वाले सर्फेक्टेंट के लिए बायोडिग्रेडेबल होना जरूरी है, साथ ही सामग्री के बारे में बेहतर जानकारी, उत्पाद लेबलिंग को आधुनिक बनाने और अधिक वहनीय फॉर्मूलेशन को बढ़ावा देने के लिए डिटर्जेंट नियमों में बदलाव किया जा रहा है। इन सबसे बड़े बदलाव सामने आ रहे हैं जहां नवोन्मेष को न केवल सफाई के प्रदर्शन से, बल्कि फॉर्मूलेशन और पारदर्शिता से भी मापा जाता है।
भारत के लिए यह आगे बढ़कर नेतृत्व करने का मौका है। फॉर्मूलेशन विज्ञान को अधिक सुलभ बनाकर और सामग्री के बारे में स्पष्ट जानकारी देकर, उद्योग पारदर्शिता, नवोन्मेष और ग्राहकों की समझदारी भरी पसंद के ज़रिए भरोसा बना सकती है। यह नवोन्मेष सिर्फ सफाई वाले फॉर्मूलेशन तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। होम केयर के विशाल क्षेत्र से जुड़े विनिर्माता नारियल से बनी सामग्री और जैव-आधारित नवोन्मेष अपना रहे हैं; रोज़मर्रा की ज़रूरत से जुड़ी कागज़ की चीज़ों के लिए तेज़ी से बढ़ने वाले बांस और ज़िम्मेदारी से हासिल की गई लुग्दी का इस्तेमाल कर रहे हैं; कचरे जमा करने वाले बैग के लिए पौधों से बने पॉलिमर और दोबारा इस्तेमाल होने वाले विकल्प अपना रहे हैं, जिनसे घर में एक बार इस्तेमाल होने वाले कचरे को कम करने में मदद मिलती है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण है कि प्रदर्शन, सामग्री नवोन्मेष और पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी जैसे विचार किस तरह एक साथ आगे बढ़ते हुए होम केयर के भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।






