
नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, मुंबई ने प्रोप्रैनोलोल दवा के माध्यम से इंफैंटाइल हीमैंगियोमा के इलाज के लिए बाल नेत्र विशेषज्ञ और बाल हृदय रोग विशेषज्ञ की एक संयुक्त टीम का इस्तेमाल किया
मुंबई, दिव्यराष्ट्र:/ मुंबई के नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने एक शिशु की पलक पर मौजूद हीमैंगियोमा का सफलतापूर्वक इलाज किया। इसके लिए प्रोप्रैनोलोल दवा का इस्तेमाल किया गया, जो इलाज की जरूरत वाले इंफैंटाइल हीमैंगियोमा के लिए एक स्थापित सिस्टेमिक उपचार है। इस मामले में डॉ. हिमिका गुप्ता, कंसल्टेंट – पीडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजी और डॉ. सुप्रतिम सेन, सीनियर कंसल्टेंट एवं क्लीनिकल लीड – पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी ने मिलकर बच्चे का इलाज किया।
इंफैंटाइल हीमैंगियोमा शिशुओं में पाई जाने वाली गैर-कैंसरकारी रक्त वाहिकाओं की गांठ होती है। जीवन के शुरुआती महीनों में ये तेजी से बढ़ सकती हैं। शुरुआत में माता-पिता को यह पलक पर लाल निशान या ‘स्ट्रॉबेरी जैसी सूजन’ के रूप में दिखाई दे सकती है। हालांकि, आंख के आसपास या पलक पर होने वाला हीमैंगियोमा केवल दिखावट से जुड़ी समस्या नहीं है। इसकी वजह से बच्चे की देखने की क्षमता और दृष्टि के सामान्य विकास पर भी असर पड़ सकता है।
चूंकि इस मामले में प्रोप्रैनोलोल का इस्तेमाल किया गया था, इसलिए पीडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजी और पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी दोनों विभागों ने मिलकर बच्चे की निगरानी की। प्रोप्रैनोलोल का असर हृदय गति और ब्लड प्रेशर पर पड़ सकता है, इसलिए इलाज के दौरान संभावित हृदय संबंधी साइड इफेक्ट्स पर भी नजर रखना जरूरी था।
इंफैंटाइल हीमैंगियोमा शिशुओं में पाए जाने वाले सबसे आम गैर-कैंसरकारी रक्त वाहिका ट्यूमर में से एक है। ये शरीर के अलग-अलग हिस्सों, जैसे चेहरे, सिर की त्वचा यानी स्कैल्प और पलकों पर हो सकते हैं। छोटे और सामान्य हीमैंगियोमा में कई बार किसी सक्रिय इलाज की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन पलक पर होने वाले हीमैंगियोमा पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है, क्योंकि इसके बढ़ने से बच्चे की दृष्टि प्रभावित हो सकती है।
पलक का हीमैंगियोमा टोसिस, यानी पलक के झुकने या गिरने का कारण बन सकता है। इससे आंख पूरी तरह खुल नहीं पाती। यदि दृष्टि के विकास के महत्वपूर्ण समय में आंख का कुछ हिस्सा ढका रहे, तो इससे बच्चे की नजर के विकास में बाधा आ सकती है और आगे चलकर लंबे समय तक दृष्टि संबंधी समस्या हो सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में समय पर पहचान और सही इलाज बेहद जरूरी है।
इस मामले में डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी के बजाय प्रोप्रैनोलोल थेरेपी को चुना। इलाज की जरूरत वाले इंफैंटाइल हीमैंगियोमा के लिए प्रोप्रैनोलोल एक महत्वपूर्ण और पहली पसंद का सिस्टेमिक उपचार बन चुका है। यह हीमैंगियोमा के आकार, रंग और उसमें मौजूद रक्त वाहिकाओं की सक्रियता को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही, हीमैंगियोमा के स्थान और उसके बढ़ने से होने वाली जटिलताओं को कम करने में भी मदद करता है।
डॉ. सुप्रतिम सेन, सीनियर कंसल्टेंट एवं क्लीनिकल लीड – पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, ने बताया कि प्रोप्रैनोलोल से इलाज के दौरान सावधानीपूर्वक निगरानी जरूरी होती है, क्योंकि यह दवा हृदय गति और ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकती है।
डॉ. सेन ने कहा, “प्रोप्रैनोलोल ऐसी दवा है जिसका इस्तेमाल हम पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी में अक्सर करते हैं। यह समस्याग्रस्त हीमैंगियोमा के साथ-साथ हृदय की कई स्थितियों के इलाज में भी एक महत्वपूर्ण प्राथमिक उपचार है। हीमैंगियोमा के मामले में यह गांठ के भीतर मौजूद रक्त वाहिकाओं पर असर करती है और उसके आकार व रंग को कम करने में मदद करती है। हालांकि, जब भी किसी शिशु में प्रोप्रैनोलोल शुरू किया जाता है, तो उचित निगरानी बेहद जरूरी होती है, क्योंकि यह दवा हृदय गति और ब्लड प्रेशर को कम कर सकती है। इस मामले में बच्चे ने इलाज पर बहुत अच्छी प्रतिक्रिया दी। हम बच्चे की प्रतिक्रिया और क्लीनिकल जांच के आधार पर लगभग छह से 12 महीने तक यह थेरेपी जारी रखने की योजना बना रहे हैं।”
हीमैंगियोमा की जगह को देखते हुए पीडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजी की भूमिका इस मामले में खास तौर पर महत्वपूर्ण थी। शरीर के कुछ अन्य हिस्सों में होने वाले हीमैंगियोमा मुख्य रूप से दिखावट से जुड़ी चिंता हो सकते हैं, लेकिन पलक पर मौजूद हीमैंगियोमा बच्चे की आंख की कार्यक्षमता और दृष्टि के विकास को प्रभावित कर सकता है।
डॉ. हिमिका गुप्ता, कंसल्टेंट – पीडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजी, ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पलक के हीमैंगियोमा के इलाज का तरीका काफी बदला है।
डॉ. गुप्ता ने कहा, “पलक का हीमैंगियोमा केवल दिखावट से जुड़ा निशान नहीं है। यह टोसिस यानी पलक के झुकने या गिरने का कारण बन सकता है, जिससे छोटे बच्चे की देखने की क्षमता और कुल मिलाकर दृष्टि के विकास पर असर पड़ सकता है। पहले कुछ चुनिंदा मामलों में पलक के हीमैंगियोमा के लिए सर्जरी पर विचार किया जाता था। हालांकि, शिशुओं में सर्जरी अपनी तरह की कई चुनौतियां लेकर आती है, खासकर उनकी कम उम्र, ट्यूमर की जगह और उसमें मौजूद रक्त वाहिकाओं की अधिकता के कारण।”
पिछले एक दशक में हीमैंगियोमा के इलाज में प्रभावी और बिना चीर-फाड़ वाले चिकित्सा विकल्पों को अधिक महत्व मिला है। उचित हृदय संबंधी जांच और निगरानी के साथ प्रोप्रैनोलोल एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प बन गया है। डॉ. गुप्ता ने आगे कहा, “जब सही समय पर और सही तरीके से इलाज शुरू किया जाता है, तो इसके परिणाम काफी अच्छे हो सकते हैं।”
सर्जरी से दवा के जरिए इलाज की ओर यह बदलाव शिशुओं के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है। जब कोई प्रभावी विकल्प उपलब्ध हो, तो ऐसी स्थिति में चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया से बचना बच्चे के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, इलाज का फैसला डॉक्टर कई बातों को ध्यान में रखकर करते हैं, जिसमें हीमैंगियोमा की जगह, उसका आकार और उससे होने वाली संभावित कार्यात्मक जटिलताएं शामिल हैं।
पलक के हीमैंगियोमा में सबसे बड़ी चिंता बच्चे की दृष्टि के विकास को सुरक्षित रखना होती है। तेजी से बढ़ने वाला हीमैंगियोमा आंख की पुतली को ढक सकता है या पलक की स्थिति को बदल सकता है। इससे विकासशील मस्तिष्क तक पहुंचने वाली दृश्य जानकारी प्रभावित हो सकती है। इसलिए समय पर विशेषज्ञ से जांच कराना बेहद जरूरी है, खासकर जब माता-पिता को आंख के आसपास कोई ऐसा निशान दिखाई दे जो तेजी से बढ़ रहा हो या उभरता जा रहा हो।
मल्टी-डिसिप्लिनरी इलाज का महत्व
यह मामला बच्चों के इलाज में मल्टीडिसिप्लिनरी यानी कई विशेषज्ञों के मिलकर काम करने के महत्व को दिखाता है। खासकर ऐसी स्थिति में, जब किसी एक अंग से जुड़ी बीमारी के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा का असर हृदय और रक्तचाप पर भी पड़ सकता हो। इस मामले में पीडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजी और पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी की टीम ने मिलकर काम किया, ताकि एक ओर पलक पर मौजूद हीमैंगियोमा से बच्चे की दृष्टि पर पड़ने वाले असर पर ध्यान दिया जा सके और दूसरी ओर प्रोप्रैनोलोल थेरेपी के दौरान बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यह मामला समय पर बीमारी की पहचान, सही मरीज का चयन, अलग-अलग विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल और सावधानीपूर्वक निगरानी के साथ इंफैंटाइल हीमैंगियोमा के बिना चीर-फाड़ वाले इलाज की उपयोगिता को भी सामने लाता है।
माता-पिता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि शिशु की त्वचा पर दिखाई देने वाला हर लाल निशान या सूजन केवल सुंदरता से जुड़ी मामूली समस्या नहीं होती, जो अपने आप ठीक हो जाएगी। इंफैंटाइल हीमैंगियोमा गैर-कैंसरकारी होते हैं, लेकिन उनका इलाज जरूरी है या नहीं, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि वे शरीर के किस हिस्से में हैं। खासकर आंखों के आसपास दिखाई देने वाले ऐसे निशानों की जांच जल्द से जल्द बाल विशेषज्ञ से करानी चाहिए।


