(दिव्यराष्ट्र के लिए संकलनकर्ता डॉ.सीमा दाधीच)
कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी पहचान केवल उनके पद, प्रतिष्ठा या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनके आजीवन समर्पण से होती है। डॉ. सी. एल. दाधीच ऐसे ही प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपने उच्च व्यावसायिक जीवन और सामाजिक दायित्वों के बीच अद्भुत संतुलन स्थापित कर यह सिद्ध किया कि सफलता का वास्तविक अर्थ समाज को लौटाने में निहित है।
राजस्थान के जोधपुर जिले के हरियाढाणा गाँव की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने कठिन संघर्ष, अनुशासन और शिक्षा के बल पर भारतीय वित्तीय एवं ग्रामीण विकास क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े संस्थानों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय तक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। वे ग्रामीण अर्थशास्त्र के निदेशक (डायरेक्टर ऑफ रूरल इकोनोमिकस, आरबीआई ) रहे तथा कृषि बैंकिंग एवं ग्रामीण वित्त के क्षेत्र में देश के अग्रणी विशेषज्ञों में उनकी गणना होती है। वे विश्व बैंक के सलाहकार, भारतीय कृषि अर्थशास्त्र सोसायटी के मानद सचिव तथा अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं। उनके शोध, पुस्तकें और नीतिगत सुझाव आज भी कृषि एवं ग्रामीण वित्त के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संदर्भ माने जाते हैं।
डॉ. दाधीच की सबसे बड़ी पहचान उनके समाजसेवी हृदय में बसती है।
उन्होंने सदैव यह माना कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य से अपने पूज्य माता-पिता की स्मृति में “श्रीमती भंवरी देवी मेधावी छात्र सम्मान” की स्थापना कर ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का अनुकरणीय कार्य प्रारम्भ किया। इस पहल ने हरियाढाणा विद्यालय में उत्कृष्ट परिणामों की नई परम्परा स्थापित की और अनेक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। अपनी माताजी की स्मृति में स्थापित दाधीच मोक्षधाम में वृक्षारोपण कर उन्होंने सेवा को प्रकृति से जोड़ा। आज यह स्थान केवल स्मृति स्थल नहीं, बल्कि हरित चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक प्रतीक बन चुका है।
डॉ. दाधीच ने केवल संस्थाएँ नहीं बनाई, बल्कि सेवा की ऐसी पारिवारिक परम्परा विकसित की, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का आधार बन गई। समाजहित के कार्यों में निरंतरता बनी रहे, इस उद्देश्य से उन्होंने अपने दोनों भाइयों—श्री आर. के. दाधीच एवं श्री किशोर दाधीच—तथा उनके परिवारों के साथ-साथ अपने दोनों पुत्रों—श्री मनोज दाधीच एवं श्री संजय दाधीच—को भी समाज सेवा, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण के कार्यों में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उनके इस दूरदर्शी प्रयास ने सेवा को केवल व्यक्तिगत दायित्व न रखकर पारिवारिक संस्कार का स्वरूप प्रदान किया है।
डॉ. दाधीच ने अपने ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन से अनेक शोधार्थियों को पीएच.डी. पूर्ण करने में सहयोग दिया तथा युवाओं को शिक्षा, अनुसंधान और सार्वजनिक सेवा के लिए निरंतर प्रेरित किया। अनेक विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं, जिनके पीछे उनके मार्गदर्शन की अमिट छाप है।
समाज के संगठन और एकता के लिए भी उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। दाधीच समाज की विभिन्न संस्थाओं में उन्होंने सक्रिय नेतृत्व प्रदान किया तथा समाज को सेवा, सहयोग और संस्कार की भावना से जोड़ने का सतत प्रयास किया। उनके नेतृत्व में आयोजित अनेक सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समाज को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की।
उनकी कार्यशैली का सबसे प्रेरक पक्ष यह है कि उन्होंने कभी पद को प्रतिष्ठा का साधन नहीं बनाया, बल्कि सेवा को अपना धर्म माना। विनम्रता, सरलता, अनुशासन और संवेदनशीलता उनके व्यक्तित्व की पहचान हैं।
डॉ. सी. एल. दाधीच का जीवन हमें यह संदेश देता है कि व्यावसायिक सफलता तभी सार्थक होती है जब वह समाज, शिक्षा, पर्यावरण और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित हो। उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का दीपस्तंभ है।
महर्षि दधीचि सेवा समिति, सांडवा (चूरू, राजस्थान, भारत) द्वारा प्रकाशित प्रेरणादायी श्रृंखला “अनुपम • अगम्य • अप्रत्याशित” में डॉ. सी. एल. दाधीच का जीवनवृत्त इस सत्य का सशक्त प्रमाण है कि सेवा, संस्कार, विद्वता, पारिवारिक प्रेरणा और विनम्रता का संगम ही व्यक्ति को वास्तव में महान बनाता है।