दिव्य राष्ट्र के लिए अम्बरीश प्रजापति
देश की राजनीति में लगातार गिरते राजनीतिक विमर्श, महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार और सार्वजनिक मंचों पर प्रयोग की जाने वाली भाषा को लेकर बहस तेज हो गई है। हाल के दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा की गई टिप्पणियों ने राजनीतिक मर्यादा और लोकतांत्रिक शिष्टाचार पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर की गई टिप्पणियों और राजनीतिक व्यंग्य की आलोचना हुई। लेख में इसे न केवल कूटनीतिक शिष्टाचार के विरुद्ध बताया गया है, बल्कि महिलाओं के प्रति संकीर्ण सोच का उदाहरण भी माना गया है।
लेख में यह भी उल्लेख किया गया है कि महिला सम्मान का प्रश्न किसी एक दल तक सीमित नहीं है। इसमें कहा गया है कि विभिन्न अवसरों पर कांग्रेस, भाजपा तथा अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा महिला राजनेताओं के संबंध में विवादित टिप्पणियां की जाती रही हैं। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी का भी संदर्भ दिया गया है।
लेख के अनुसार लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राजनीतिक विरोध यदि व्यक्तिगत या लैंगिक टिप्पणियों में बदल जाए तो यह स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए उचित नहीं माना जा सकता।
महिला सम्मान के संदर्भ में लेख में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानवदर्शन’ का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उनके विचारों में महिला और पुरुष समाज रूपी रथ के दो समान पहिए हैं तथा महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर मिलना आवश्यक है।
लेख में राजनीतिक दलों से अपेक्षा जताई गई है कि वे अपने मंचों से मर्यादित भाषा के प्रयोग को बढ़ावा दें तथा महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियों पर सख्ती से रोक लगाएं। साथ ही कहा गया है कि लोकतांत्रिक राजनीति का केंद्र नीतियां, कार्यक्रम और जनहित के मुद्दे होने चाहिए, न कि व्यक्तिगत उपहास और अमर्यादित बयानबाजी।