(दिव्यराष्ट्र)
आजकल फिटनेस और मसल्स बनाने की दौड़ में प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता है। जिम जाने वाले लोग, एथलीट्स और यहां तक कि सामान्य लोग भी अपने डाइट में प्रोटीन पाउडर शामिल करते हैं। प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व माना जाता है, क्योंकि यह मांसपेशियों के निर्माण, टिश्यू की मरम्मत और ऊर्जा संतुलन में अहम भूमिका निभाता है।
लेकिन जब प्रोटीन का सेवन जरूरत से ज्यादा होने लगता है, तब इसका असर शरीर के कुछ अंगों पर पड़ना शुरू हो जाता है। खासतौर पर किडनी पर इसका प्रभाव देखने को मिलता है। इसलिए यह समझना जरूरी हो जाता है कि प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल किस तरह संतुलित तरीके से किया जाता है ताकि किडनी स्वस्थ बनी रहे।
किडनी और प्रोटीन का क्या संबंध होता है
किडनी शरीर का वह महत्वपूर्ण अंग माना जाता है जो खून को फिल्टर करता है और शरीर से अतिरिक्त अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है। जब व्यक्ति प्रोटीन का सेवन करता है, तब शरीर में प्रोटीन का मेटाबॉलिज्म होता है और उससे बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों को किडनी फिल्टर करती है।
यदि प्रोटीन का सेवन बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है, तो किडनी को इन अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक अत्यधिक प्रोटीन लेने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव बनता है। स्वस्थ व्यक्ति में यह दबाव अक्सर संभल जाता है, लेकिन जिन लोगों को पहले से किडनी की समस्या होती है, उनके लिए यह स्थिति जोखिम पैदा कर सकती है।
क्या प्रोटीन पाउडर हमेशा नुकसान पहुंचाता है
यह धारणा पूरी तरह सही नहीं मानी जाती कि प्रोटीन पाउडर हमेशा किडनी को नुकसान पहुंचाता है। अगर किसी व्यक्ति की किडनी स्वस्थ होती है और वह संतुलित मात्रा में प्रोटीन लेता है, तो आमतौर पर इससे नुकसान नहीं होता।
समस्या तब पैदा होती है जब व्यक्ति बिना जरूरत के या बिना विशेषज्ञ की सलाह के प्रोटीन सप्लीमेंट लेना शुरू कर देता है। कई लोग अपनी डाइट में पहले से पर्याप्त प्रोटीन लेने के बावजूद अतिरिक्त पाउडर का सेवन करते रहते हैं। इस स्थिति में शरीर को जितनी प्रोटीन की आवश्यकता होती है, उससे अधिक मात्रा पहुंचने लगती है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है
कुछ लोगों को प्रोटीन पाउडर लेते समय विशेष सावधानी बरतनी जरूरी होती है। जिन लोगों को पहले से किडनी रोग, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की समस्या होती है, उनमें किडनी पर दबाव जल्दी बढ़ता है।
इसके अलावा उम्रदराज लोगों और ऐसे व्यक्तियों में भी जोखिम बढ़ सकता है जो लंबे समय तक बहुत ज्यादा प्रोटीन का सेवन करते रहते हैं। ऐसे मामलों में किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है।
सुरक्षित मात्रा और संतुलित सेवन क्यों जरूरी होता है
सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए शरीर के प्रति किलोग्राम वजन के अनुसार लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन पर्याप्त माना जाता है। जो लोग नियमित रूप से वर्कआउट करते हैं या एथलेटिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं, उनके लिए यह मात्रा थोड़ी अधिक हो सकती है।
यदि किसी व्यक्ति को प्रोटीन पाउडर लेना जरूरी लगता है, तो उसकी मात्रा शरीर की जरूरत और दैनिक आहार को ध्यान में रखकर तय की जाती है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि इससे किडनी को अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने में मदद मिलती है।
प्राकृतिक स्रोतों को प्राथमिकता देना क्यों बेहतर होता है
विशेषज्ञों द्वारा यह सलाह दी जाती है कि जहां तक संभव हो, प्रोटीन के प्राकृतिक स्रोतों को प्राथमिकता दी जाती है। दालें, दूध, पनीर, अंडे, दही, सोयाबीन और मेवे जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को संतुलित प्रोटीन प्रदान करते हैं।
प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला प्रोटीन शरीर में धीरे-धीरे पचता है और इससे अन्य पोषक तत्व भी मिलते हैं। इससे किडनी पर अचानक अतिरिक्त भार नहीं पड़ता।
संतुलन ही किडनी की सुरक्षा की कुंजी बनता है
प्रोटीन पाउडर को पूरी तरह गलत नहीं माना जाता, लेकिन इसका उपयोग समझदारी और संतुलन के साथ किया जाना जरूरी होता है। शरीर की जरूरत, जीवनशैली और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही इसका सेवन किया जाता है।
जब व्यक्ति संतुलित डाइट, पर्याप्त पानी और नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाता है, तब किडनी लंबे समय तक स्वस्थ बनी रहती है। फिटनेस की दिशा में कदम बढ़ाते समय यह याद रखना जरूरी होता है कि शरीर के हर अंग का संतुलन बनाए रखना ही असली स्वास्थ्य की पहचान बनता है।



