(दिव्यराष्ट्र के लिए सुरेंद्र चतुर्वेदी, जयपुर)
आश्चर्य है कि जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद अस्तित्व में आए कॉकरोच जनता पार्टी के अराजक युवा दिल्ली में उत्पात मचाये हुए हैं। इनके नेता सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल कराकर इस राजनीतिक ड्रामे का विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के साथ आनंद ले रहे हैं। और रोचक बात यह है कि भारत के विपक्षी दल जनता के मुद्दों से इतना दूर हो गए हैं कि कॉकरोच जनता पार्टी के अराजक और ग़ैर ज़िम्मेदार युवाओं के उत्पात में अपने लिए संजीवनी ढूँढ रहे हैं।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल सहित लगभग हाशिए पर धकेले जा चुके शरद पवार और उद्धव ठाकरे भी इनके समर्थन में उतर गए अपितु छात्र हितों का रक्षक होने की होड़ भी शुरू कर दी। इंडी गठबंधन के तार तार हो जाने के बाद यह पहला मौका है जब विपक्षी दल किसी प्रदर्शन के लिए साथ आए हैं।
हालांकि इन राजनेताओं का छात्रों के हितों से कोई लेना देना नहीं है। वो सिर्फ उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले चुनावों में लाभ लेने के लालच और मोदी विरोध के कारण साथ आए हैं। इन सबके अलावा नव बोद्धों का समूह, अर्बन नक्सल, मुस्लिम उलेमाओं की जमात, हाशिए पर पहुँच गए किसान आंदोलनजीवी और कम्युनिस्ट संगठन कॉकरोचों के सुर में ताल मिलाते दिख रहे हैं। नीट परीक्षा में हुए पेपर लीक की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर डालने की ज़िद ओढ़े ये प्रदर्शनकारी अब प्रधानमंत्री मोदी को मार डालने की धमकी देने की हद तक पहुँच गए हैं।
इन सबसे यह तो साबित हो ही रहा है कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सकारात्मक परिवर्तन ना होकर मोदी सरकार को गिराना है। इसके लिए ये नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने से भी नहीं चूकेंगे। इसके दो प्रमाण देखने को मिले जब बीस मार्च को प्रदर्शनकारियों ने संसद में घुसने की चेष्टा की और 21 मार्च को विपक्ष के नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के पास धरने पर बैठ गए। इनकी मंशा सिर्फ इतनी थी कि सुरक्षा बल किसी प्रकार से अपना धैर्य खो दें तो इन नेताओं और प्रदर्शनकारियों को देश में अराजकता फैलाने का अवसर मिल जाये।
इन सबसे दूर जो 22 लाख 79 हज़ार असली नीट अभ्यर्थी हैं उनमें से उत्तीर्ण 11 लाख 21 हजार अभ्यर्थी देश में उपलब्ध एक लाख 37 हज़ार मेडिकल सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया में लगे हैं। उन्हें किसी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन की जरूरत नहीं है। वो अपनी योग्यता के बल देश अपना स्थान बनाने का संघर्ष कर रहे हैं।*