महात्मा गांधी 30 जनवरी के शहीद दिवस पर विशेष

जयपुर। महात्मा गांधी ने अपना जीवन सत्य, अहिंसा के आधार पर जीया। यह सत्य और अहिंसा महात्मा बुद्ध और महावीर स्वामी के मुख्य सिद्धांत थे। इन सिद्धांतों को ही महात्मा गांधी ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण हथियार बना लिए। इन्हीं की बदौलत ब्रिटिश शासन के खिलाफ चंपारण, असहयोग और नमक सत्याग्रह जैसे आंदोलन चलाए। सादगी, खादी प्रेम और साबरमती आश्रम से उनका गहरा संबंध बना रहा। जिस ब्रितानी हुकूमत का सूरज कभी अस्त नहीं होता था, उस हुकूमत को भारत छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। महात्मा गांधी का मूल नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, ‘महात्मा’ (महान आत्मा) की उपाधि उन्हें मिली थी। माना जाता है कि 1909 में उनके मित्र प्राणजीवन मेहता ने उन्हें सबसे पहले इस नाम से संबोधित किया था। उन्हें ‘बापू’ और ‘राष्ट्रपिता’ भी कहा जाता है। गांधी का जीवन उनके विचारों और कार्यों के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। उनकी मृत्यु 30 जनवरी, 1948 को दिल्ली में हुई। इसलिए 30 जनवरी को ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए पूरे विश्व को एक नया वैचारिक अस्त्र प्रदान किया । उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए अहिंसक संघर्ष की एक मिसाल पेश की। वे एक धनी परिवार से ताल्लुक रखते हुए भी सादगीपूर्ण जीवन जीने का निर्णय लिया और केवल एक लंगोटी व शॉल पहनकर अपना पूरा जीवन निकाल दिया । वे आत्म-शुद्धि के लिए लंबे उपवास करते थे। साबरमती आश्रम से उनका अटूट रिश्ता था, जो उनके स्वतंत्रता संघर्ष का एक मुख्य केंद्र बन गया । गांधी ने ‘हिंद स्वराज्य’ जैसी कई पुस्तकों और लेखों के माध्यम से अपने विचारों का प्रचार किया। वे सादगी, ईमानदारी और भाईचारे के समर्थक थे। उन्होंने स्वदेशी आंदोलन के अंतर्गत विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया और भारत में खादी को बढ़ावा दिया। वे अपने हाथ से चरखा भी कातते थे। उसके पीछे यह ध्येय था कि कोई भी कार्य बड़ा और छोटा नहीं होता है। कार्य तो कार्य ही होता है। साथ ही भारत क़े करोडों लोगों को खादी के माध्यम से रोजगार उपलब्ध हुआ। उनका मानना था कि जिस देश में मनुष्य श्रम अधिक है तो उसका उपयोग ज्यादा करना चाहिए और जिस देश में मनुष्य श्रम कम है तो वहां मशीनी श्रम का उपयोग अधिक लेना चाहिए जिससे बेरोजगारी की समस्या का निदान हो सके। वे अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा नहीं करने तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें बुरे विचार, घृणा और कठोर शब्दों का त्याग भी शामिल मानते थे, यह एक शक्तिशाली, सक्रिय बल है जो सत्य, प्रेम और आत्मशुद्धि से जुड़ा हुआ है, अहिंसा कायरता का पर्याय नहीं बल्कि वीरों का हथियार है। इसका लक्ष्य सामाजिक और आध्यात्मिक परिवर्तन लाना है, जिससे विजेता और पराजित दोनों का ही उत्थान हो सके। गांधी के लिए सत्य और अहिंसा एक-दूसरे के पूरक थे, सत्य के बिना अहिंसा और अहिंसा के बिना सत्य अधूरा हैं। अहिंसा निष्क्रियता नहीं, बल्कि एक अत्यंत सक्रिय शक्ति है, जो प्रेम और सेवा पर आधारित है और समाज में सकारात्मक बदलाव प्रदान करती है। इसके माध्यम से सिर्फ शारीरिक चोट पहुंचाना ही नहीं, बल्कि मन को शुद्ध रखना, बुरे विचार त्यागना और दूसरों से प्रेम करना भी शामिल किया गया है। गांधी ने अहिंसा को कमजोरों का हथियार नहीं, बल्कि बहादुरों का शस्त्र बताया, जो दुर्बलता नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति का प्रतीक है।
वे हमेशा अहिंसक कार्यप्रणाली सत्याग्रह (सत्य के लिए आग्रह) का आधार मानते थे, जो अन्याय का विरोध शांतिपूर्ण तरीके से करता है। अहिंसा व्यक्ति और राष्ट्र, दोनों के लिए सार्वभौमिक होनी चाहिए, एक व्यक्ति अपने एक काम में अहिंसक और दूसरे में हिंसक नहीं हो सकता। अहिंसक प्रतिरोध से अस्थायी विजय नहीं मिलती है, बल्कि स्थायी समाधान मिलता है, जो सभी के लिए फलदायक होता है। महात्मा गांधी के लिए धर्म का अर्थ किसी विशेष संप्रदाय या कर्मकांड से नहीं था, उनका सम्बंध सत्य, अहिंसा और नैतिकता के पालन करने से था। वे धर्म को जीवन से अविभाज्य मानते थे, जिसमें ईश्वर ही सत्य है और सत्य ही ईश्वर है । वे सभी धर्मों की आत्मा एक ही मानते है और मानवता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। वे मानते थे कि धर्म ‘सत्य’ की खोज और ‘अहिंसा’ के अभ्यास पर आधारित है। बिना नैतिकता और धर्म के राजनीति एक जाल है। वे सभी धर्मों के प्रति सम्मान रखते थे और मानते थे कि सभी धर्म एक ही ईश्वर तक ले जाने वाले अलग-अलग मार्ग हैं। उनका मानना था कि धर्म का अर्थ नैतिक आचरण, आत्मा की शुद्धि और ईश्वर में विश्वास करना था। उनके सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों का उद्देश्य व्यक्ति को आत्म-शुद्धि और समाज को न्याय, समानता तथा शांति की ओर ले जाना है।
बहरहाल, हम यही कह सकते हैं कि महात्मा गांधी की अहिंसा व्यक्तिगत शुद्धि से प्रारंभ होकर सामाजिक क्रांति तक जाती है, जो प्रेम, सत्य और साहस के माध्यम से दुनिया को बदलने का मार्गदर्शन करती है। क्योंकि आज विश्व में परमाणु हथियारों के बल पर एक देश दूसरे देश पर हमला कर रहा है। आज विश्व में अशांति बनी हुई है। विश्व में आतंकवादी घटनाएं बढ़ रही है। आज हम तीसरे विश्व युद्ध के मुहाणे पर खडे हैं । युद्ध को रोकने का एक ही उपाय है महात्मा गांधी की अहिंसा । इसी का पालन कर के आज विश्व में शांति स्थापित कर सकते हैं।



