(दिव्यराष्ट्र के लिए डॉ.सीमा दाधीच)
कृष्ण जन्माष्टमी सनातन धर्म के सबसे प्रमुख और हर्षौल्लास से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है यह त्यौहार भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है यह प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देश ही नहीं विदेश में भी यह पर्व पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। आज की जेन जी जेनरेशन तेज़ी से बदलती दुनिया की पीढ़ी है। तकनीक, सोशल मीडिया, प्रतिस्पर्धा और निरंतर बदलती परिस्थितियों के बीच यह पीढ़ी अपने जीवन में सफलता के साथ-साथ मानसिक शांति, उद्देश्य और सही दिशा की भी तलाश करती है। ऐसे समय में भगवान कृष्ण के विचार जेन जी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत बन सकते हैं, कृष्ण का जन्म कारागार में हुआ जन्म से मृत्यु का साया मंडरा रहा था लेकिन कृष्ण 64 कलाओं में पारंगत थे उन्होंने अधर्म का समूल नाश कर धर्म की स्थापना की। कृष्ण का व्यक्तित्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि वे कर्म,नेतृत्व, मित्रता,प्रेम,साहस और जीवन-दर्शन के प्रतीक भी हैं। श्रीमद्भगवद्गीता में कृष्ण ने अर्जुन को जिस प्रकार कठिन परिस्थिति में कर्तव्य और आत्मविश्वास का मार्ग दिखाया, वह आज के युवाओं के लिए भी प्रासंगिक है।
जेन जी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है भविष्य की चिंता और असफलता का डर। कृष्ण ने मनुष्य को अपने कर्म पर ध्यान देना और परिणाम की चिंता में अपने वर्तमान को नहीं खोना चाहिए। यह विचार युवाओं को परीक्षा, करियर, प्रतियोगिता और व्यक्तिगत जीवन की चुनौतियों का सामना धैर्य के साथ करने की प्रेरणा देता है। कृष्ण का जीवन यह भी सिखाता है की परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालना कमजोरी नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता है।उन्होंने बाल्यकाल में गोकुल की सरल जीवनशैली से लेकर महाभारत के जटिल राजनीतिक और सामाजिक परिवेश तक अनेक भूमिकाएँ निभाईं। उनका व्यक्तित्व बताता है कि बदलते समय के साथ अपनी सोच और कार्यशैली में सकारात्मक परिवर्तन करना आवश्यक है।
आज सोशल मीडिया के दौर में तुलना और दिखावे का दबाव युवाओं को प्रभावित करता है। कृष्ण का व्यक्तित्व से युवा सीखे व्यक्ति को बाहरी प्रशंसा के बजाय आत्मबोध और अपने कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इससे युवा अपनी वास्तविक क्षमता को पहचान सकते हैं और दूसरों से तुलना करने के बजाय स्वयं को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
कृष्ण नेतृत्व और निर्णय लेने की कला के भी अद्भुत उदाहरण हैं। उन्होंने स्वयं युद्ध में शस्त्र न उठाने का निर्णय लिया, लेकिन अर्जुन के सारथी बनकर उसे सही दिशा दी। इससे यह सीख मिलती है कि सच्चा नेतृत्व हमेशा सामने आकर आदेश देने में नहीं, बल्कि सही समय पर सही मार्गदर्शन देने में भी होता है।
कृष्ण का जीवन हमें यह संदेश भी देता है कि जीवन में कर्तव्य और संवेदनशीलता दोनों का संतुलन आवश्यक है। वे मित्र के रूप में सुदामा के साथ खड़े दिखाई देते हैं,तो वहीं अन्याय के विरुद्ध दृढ़ता से संघर्ष करते हैं। यह संतुलन आज के युवाओं को अपने व्यक्तिगत संबंधों और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की प्रेरणा दे सकता है। कृष्ण ने नारी का हमेशा सम्मान किया और कौरवों के दुष्कृत्य पर द्रोपदी के चिर को बढ़ाया। जेन जी के लिए कृष्ण केवल अतीत के एक धार्मिक या ऐतिहासिक पात्र नहीं हैं,बल्कि उनके विचार आज की आधुनिक जीवन-शैली में भी मार्गदर्शक हो सकते हैं और ग्रेटेस्ट जेनेरेशन ने भी कृष्ण को जगतगुरु बताया है कृष्ण को देश में ही नहीं विदेश में पूजा जाता है। कर्म पर विश्वास, कठिन परिस्थितियों में धैर्य,सही निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और जीवन में संतुलन,ये सभी गुण आज के युवाओं को सफल और सार्थक जीवन की ओर ले जा सकते हैं। कृष्ण का ज्ञान आज के युवाओं के लिए केवल सफलता पाने से नहीं, बल्कि सही दृष्टिकोण के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है।