67 लाख रुपये से अधिक की हथकरघा बिक्री दर्ज
मुंबई, दिव्यराष्ट्र:/ नाबार्ड ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के अवसर पर 5 से 7 अगस्त 2026 तक मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित मुख्यालय में तीन दिवसीय प्रदर्शनी एवं बिक्री मेले का आयोजन किया। इस आयोजन में 67 लाख रुपये से अधिक की हथकरघा उत्पादों की बिक्री दर्ज की गई, जो भारतीय हस्तकरघा उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
प्रदर्शनी में देश के 14 राज्यों की 15 विशिष्ट बुनाई परंपराओं को प्रदर्शित किया गया, जिनमें 9 जीआई टैग प्राप्त उत्पाद शामिल थे। आगंतुकों को महाराष्ट्र की पैठणी, तेलंगाना की पोचमपल्ली इकत, राजस्थान की कोटा डोरिया, ओडिशा की संबलपुरी, बिहार की भागलपुरी सिल्क, पश्चिम बंगाल की कांथा स्टिच, गुजरात की कच्छ शॉल सहित कई पारंपरिक उत्पादों को देखने और खरीदने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागी शिल्पकारों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा श्रेष्ठ तीन स्टॉलों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर डॉ. शाजी कृष्णन वी., अध्यक्ष, नाबार्ड, ने कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण उद्यमिता और भारतीय संस्कृति का संगम हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण और शहरी भारत के बीच संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ बुनकरों को बाजार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस अवसर पर डॉ. अजय कुमार सूद, उप प्रबंध निदेशक, नाबार्ड, ने भाग लेने वाले शिल्पकारों और संस्थाओं को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन ग्रामीण समुदायों की प्रतिभा, कौशल और परिश्रम को पहचान दिलाने का माध्यम हैं।
6 अगस्त को आयोजित खरीदार-विक्रेता बैठक में बुनकरों और शहरी खरीदारों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया गया। इससे बाजार की मांग, उपभोक्ता पसंद और व्यावसायिक संभावनाओं पर चर्चा हुई तथा दीर्घकालिक व्यावसायिक संबंधों की संभावनाएं बनीं।
शिल्पकारों की डिजिटल विपणन क्षमता बढ़ाने के लिए 7 अगस्त को ओएनडीसी और मायस्टोर पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इसमें डिजिटल ऑनबोर्डिंग, ई-कॉमर्स, ब्रांडिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग, कैटलॉग निर्माण और ऑनलाइन बिक्री जैसे विषयों पर जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. रजनीकांत, जीआई विशेषज्ञ एवं संस्थापक, ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन, ने भी बुनकरों से संवाद किया और जीआई पंजीकरण के महत्व तथा उसके लाभों पर विस्तार से जानकारी दी।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रति वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिवस भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत और उन लाखों बुनकरों को सम्मानित करने के लिए समर्पित है, जो इस पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं।
नाबार्ड द्वारा अब तक 43 हथकरघा उत्पादों को जीआई पंजीकरण दिलाने में सहयोग प्रदान किया गया है तथा देशभर में हथकरघा क्षेत्र में 41 ग्रामीण उद्यम उत्पादक संगठनों का गठन कराया गया है। संस्था लगातार विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मेलों के माध्यम से बुनकरों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है।