महिला किसानों को किया सम्मानित
नाबार्ड, महाराष्ट्र:/ ने वर्ष 2025-26 में व्यवसाय सहायता एवं पुनर्वित्त के अंतर्गत ₹39,380 करोड़ का अभूतपूर्व प्रदर्शन दर्ज किया
पुणे, दिव्यराष्ट्र* नाबार्ड ने 16 जुलाई 2026 को पुणे इंटरनेशनल सेंटर में अपना 45वाँ स्थापना दिवस मनाया तथा इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष-2026 के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में समावेशी, संधारणीय एवं जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की. महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय विठोबा भरणे ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। इस अवसर पर राज्य भर की महिला किसानों, महिला-नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) तथा ग्रामीण उद्यमियों को ग्रामीण परिवर्तन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम में कृषि बैंकिंग महाविद्यालय (सीएबी), पुणे के मुख्य महाप्रबंधक एवं प्रधानाचार्य श्री जयकिश, महाराष्ट्र राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के महाप्रबंधक एवं संयोजक विवेक नचाने, बैफ (बेफ) के अध्यक्ष डॉ. भरत काकड़े तथा महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएसटीसीबी) के प्रशासक विद्याधर अनास्कर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम की मेजबानी नाबार्ड, महाराष्ट्र क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. ए. वी. भवानी शंकर ने की. “ एम्पोरिंग रुरल महाराष्ट्र नाबार्ड 2025-26” नामक पुस्तिका का विमोचन किया गया तथा चंद्रपुर जिले में महिलाओं द्वारा संचालित नाबार्ड समर्थित घरेलू मुर्गीपालन आजीविका परियोजना पर आधारित एक वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया.
मुख्य अतिथि ने राज्य सरकार के किसान-कल्याण उन्मुख प्रयासों पर प्रकाश डाला
भरणे ने महाराष्ट्र के किसानों तथा सहकारी क्षेत्र के साथ नाबार्ड की 45 वर्षों की साझेदारी की प्रशंसा करते हुए महिलाओं को “कृषि क्षेत्र की रीढ़” बताया। श्री भरणे ने राज्य बजट में किसानों को प्राथमिकता देते हुए की गई विभिन्न पहलों का उल्लेख किया। इनमें पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमाफी योजना के अंतर्गत ₹2 लाख तक के फसल ऋण की माफी तथा नियमित ऋण चुकौती करने वाले किसानों के लिए ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि, 7.5 एचपी तक के पंपों के लिए किसानों को निःशुल्क विद्युत आपूर्ति, प्राकृतिक कृषि मिशन के अंतर्गत 5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य, एक करोड़ से अधिक किसानों के लिए एग्रीस्टैक डिजिटल पहचान-पत्र, महाविस्तार-एआई एवं वसुधा के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित परामर्श सेवाएं तथा पशुधन उद्योजक एवं मत्स्य संपदा योजनाओं के अंतर्गत आजीविका के अवसरों का विस्तार शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण में वर्ष 2023-24 के ₹6.40 लाख करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025-26 में ₹9.20 लाख करोड़ तथा कृषि ऋण में ₹1.54 लाख करोड़ से बढ़कर ₹1.93 लाख करोड़ की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बैंकों से विशेष रूप से लघु एवं सीमांत किसानों के बीच किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के कवरेज का और अधिक विस्तार करने का आह्वान किया. महिला सशक्तीकरण के संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना तथा उमेद का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन पहलों के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी 50 लाख से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ के रूप में ₹50,000 करोड़ से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने नाबार्ड को उमेद, महिला आर्थिक विकास महामंडल (माविम) तथा महिला किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) के साथ अपने सहयोग को और सुदृढ़ करने के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने इन पहलों को वर्ष 2030 तक एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तथा वर्ष 2047 तक पाँच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था के निर्माण संबंधी राज्य की ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ परिकल्पना से जोड़ते हुए कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति गांवों, कृषि तथा सहकारी क्षेत्र की सुदृढ़ नींव पर आधारित होगी, जिससे समावेशी एवं क्षेत्रीय संतुलनयुक्त विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा.
नाबार्ड, महाराष्ट्र के लिए रिकॉर्ड उपलब्धियों का वर्ष*
नाबार्ड, महाराष्ट्र क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. ए. वी. भवानी शंकर ने वर्ष 2025-26 को नाबार्ड, महाराष्ट्र के लिए एक मील का पत्थर सिद्ध होने वाला वर्ष बताया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में व्यवसाय सहायता एवं पुनर्वित्त का स्तर ₹39,380 करोड़ से अधिक रहा, राज्य सरकार को प्रत्यक्ष अवसंरचना सहायता के अंतर्गत लगभग ₹5,600 करोड़ की सहायता प्रदान की गई तथा विकासात्मक एवं अनुदान-आधारित पहलों के अंतर्गत ₹37.72 करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई. उन्होंने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के डिजिटलीकरण, बहुउद्देशीय पैक्स के संवर्धन तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), जलवायु-अनुकूल कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों के लिए नाबार्ड द्वारा निरंतर प्रदान किए जा रहे सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुनः रेखांकित किया कि महिला किसानों का सशक्तीकरण तथा ग्रामीण संस्थाओं को सुदृढ़ बनाना महाराष्ट्र में नाबार्ड की ‘विकसित भारत @2047’ रणनीति के प्रमुख आधार हैं.
स्मृति भगत, महाप्रबंधक, नाबार्ड ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया तथा अविनाश पी. सेवलकर, महाप्रबंधक, नाबार्ड ने धन्यवाद ज्ञापन किया.