पेटेंट समाप्ति के बाद भारत में निर्मित पहला एकीकृत सेमाग्लूटाइड
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र: एमएसएन लेबोरेटरीज ने आज केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से मंजूरी मिलने के बाद भारतीय बाजार में अपने सेमाग्लूटाइड ब्रांड ‘सेमाबेस्ट’ के लॉन्च की घोषणा की। यह उपलब्धि टाइप 2 डायबिटीज सहित दीर्घकालिक मेटाबोलिक बीमारियों के लिए उन्नत उपचारों की पहुंच बढ़ाने की कंपनी की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। सेमाबेस्ट की कीमत नवप्रवर्तक (इननोवेटर) दवा की तुलना में लगभग 50% कम रखी गई है, जिससे यह अधिक किफायती बनती है और मरीजों की पहुंच बढ़ती है। यह थेरेपी सबक्यूटेनियस (त्वचा के नीचे) देने के लिए प्री-फिल्ड पेन के रूप में उपलब्ध है।
20 मार्च 2026 के बाद से बाजार में कई नए खिलाड़ियों की एंट्री देखने को मिली है। इस बदलते परिदृश्य में सेमाबेस्ट अपनी मजबूत बैकवर्ड इंटीग्रेशन के साथ अलग पहचान बनाता है, जिसमें इन-हाउस यूएसडीएमएफ-ग्रेड एपीआई और फॉर्मुलेशन शामिल हैं। इसका पेन डिवाइस भी भारत में ही निर्मित है और वैश्विक नियामक मानकों का पालन करता है। सेमाबेस्ट जटिल पेप्टाइड थेरेपी को भारतीय मरीजों के लिए अधिक सुलभ, किफायती और बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एमएसएन लेबोरेटरीज की हेड – मेडिकल अफेयर्स, डॉ. कामिनी देसाई ने कहा, “इस उत्पाद ने रेफरेंस (इननोवेटर) दवा के साथ बायोइक्विवेलेंस प्रदर्शित किया है, जिसे प्रत्यक्ष तुलना में किए गए फेज-III क्लिनिकल स्टडीज़ के माध्यम से और प्रमाणित किया गया है। परिणामों में एचबीए 1सी स्तर में समान कमी देखने को मिली, साथ ही फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज ( एफ पीजी ), पोस्टप्रांडियल ग्लूकोज ( पीपीजी) और वजन घटाने जैसे प्रमुख मानकों पर भी तुलनीय परिणाम सामने आए। सेमाबेस्ट का सुरक्षा प्रोफाइल भी समान रहा, जो इसे एक प्रभावी उपचार विकल्प के रूप में विश्वसनीय बनाता है।”
भारत में लगभग 9 करोड़ लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं, जिनमें से बड़ी संख्या का निदान नहीं हो पाता या उनका उपचार पर्याप्त नहीं होता। यह बीमारी अक्सर हृदय संबंधी समस्याओं, किडनी फेल्योर और दृष्टि हानि जैसी गंभीर जटिलताओं से जुड़ी होती है, जिससे मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा बोझ पड़ता है।
एमएसएन लेबोरेटरीज के संस्थापक एवं सीएमडी, डॉ. एमएसएन रेड्डी ने कहा, “सेमाबेस्ट का लॉन्च अगली पीढ़ी की मेटाबोलिक थेरेपी को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की हमारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। डायबिटीज का बढ़ता बोझ हमें उच्च गुणवत्ता और नवाचार आधारित समाधान प्रदान करने के लिए प्रेरित करता है, जो मरीजों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकें।”
एमएसएन लेबोरेटरीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, भरत रेड्डी ने कहा, “एमएसएन के पास जटिल पेप्टाइड विकास में एक दशक से अधिक का अनुभव है, जिसकी शुरुआत 2016 में आइकाटिबैंट के लिए पहले यूएसडीएमएफ दाखिल करने से हुई थी। तब से कंपनी ने मजबूत नियामक और वैज्ञानिक आधार तैयार किया है, जिसमें पेप्टाइड्स के लिए 12 यूएसडीएमएफ और पेप्टाइड फॉर्मुलेशन्स के लिए 6 यूएस एंडा शामिल हैं। इसके अलावा, 560+ यूएसडीएमएफ और 400+ बायोइक्विवेलेंट फॉर्मुलेशन्स का व्यापक वैश्विक पोर्टफोलियो भी है। अपनी एकीकृत आरएंडडी इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े पैमाने की मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के साथ, एमएसएन पूरे भारत में सेमाबेस्ट की निरंतर आपूर्ति, गुणवत्ता और उपलब्धता सुनिश्चित करने की मजबूत स्थिति में है।”
एमएसएन के बारे में
एमएसएन फार्मास्यूटिकल्स ग्रुप एक रिसर्च-ड्रिवन, पूर्णतः एकीकृत फार्मास्यूटिकल कंपनी है, जिसकी स्थापना 2003 में हुई थी। इसका उद्देश्य दुनिया भर में उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं को सुलभ और किफायती बनाना है। समूह भारत और अमेरिका में 25 मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं का संचालन करता है, जिन्हें एपीआई और फिनिश्ड डोज़ेज डेवलपमेंट को कवर करने वाले एकीकृत आर एंड डी इकोसिस्टम का समर्थन प्राप्त है। 1,000 से अधिक वैश्विक पेटेंट फाइलिंग्स, 200+ एंडस सबमिशन और यूएस डीएमएफ फाइलिंग्स में अग्रणी स्थिति के साथ, एमएसएन ने मजबूत वैश्विक उपस्थिति स्थापित की है। 550+ एपीएलएस और 400+ फिनिश्ड डोज़ेज फॉर्म्स के पोर्टफोलियो के साथ, जो 35+ थेरेप्यूटिक क्षेत्रों को कवर करते हैं, एमएसएन 100 से अधिक देशों में 5 करोड़ से ज्यादा मरीजों की सेवा कर रहा है।