दिव्यराष्ट्र, जयपुर: डिजिटल पेमेंट्स बैंक जियो पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (JPBL) ने राजस्थान में नेशनल हाईवे 48 (NH 48) पर मौजूद मनोहरपुरा टोल प्लाजा पर एक नई शुरुआत की घोषणा की है। बैंक ने यहां FASTag और नंबर प्लेट की ऑटोमैटिक पहचान पर आधारित ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ (MLFF) प्रोजेक्ट के तहत टोलिंग सिस्टम शुरू किया है। इस नई व्यवस्था से वाहनों को टोल प्लाजा पर रुके बिना आसानी से गुजरने की सुविधा मिलेगी। जियो पेमेंट्स बैंक लिमिटेड की बात करें तो यह जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (JFSL) की सहायक कंपनी है।
जियो पेमेंट्स बैंक लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर एंड सीईओ विनोद ईश्वरन ने कहा कि, “मनोहरपुरा टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग सर्विस की शुरुआत जियो पेमेंट्स बैंक के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे भारत के डिजिटल मोबिलिटी पेमेंट सिस्टम में कंपनी की भूमिका और मजबूत होगी। जैसे-जैसे देश के हाईवे तेजी से डिजिटल हो रहे हैं, हमारा लक्ष्य ऐसी तकनीक आधारित टोलिंग सिस्टम उपलब्ध कराना है, जिससे लोगों की यात्रा आसान हो और भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिले।
यह पहल अक्टूबर 2025 में इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) द्वारा जियो पेमेंट्स बैंक को दिए गए कॉन्ट्रैक्ट के बाद शुरू हुई है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत बैंक को भारत की पायलट मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल परियोजना के तहत गुरुग्राम और जयपुर के बीच स्थित शाहजहांपुर और मनोहरपुरा टोल प्लाजा पर टोल प्रोसेसिंग का जिम्मा सौंपा गया था।
मनोहरपुरा टोल प्लाजा पर इस सर्विस की शुरुआत जियो पेमेंट्स बैंक के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह दिखाता है कि बैंक स्मार्ट और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी वित्तीय सेवाओं को तेजी से लागू कर रहा है।
दिल्ली-जयपुर के व्यस्त मार्ग पर NH-48 के महत्वपूर्ण हिस्से में स्थित मनोहरपुरा टोल प्लाजा अब पूरी तरह चालू हो चुका है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि यह हर साल करीब 88 लाख वाहनों का टोल बिना किसी रुकावट के आसानी से संभाल सके।
इस प्रमुख मार्ग पर जियो पेमेंट्स बैंक शाहजहांपुर से मनोहरपुरा तक करीब 100 किलोमीटर और मनोहरपुरा से दौलतपुर तक 34 किलोमीटर लंबे जुड़े हुए कॉरिडोर पर टोल संचालन का प्रबंधन कर रहा है।
मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम भारत के नेशनल हाईवे पर बिना बैरियर और बिना रुके सफर की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। इसमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन जैसी आधुनिक टेक्निक का इस्तेमाल किया जाता है। इनकी मदद से वाहन की पहचान, उसकी कैटेगरी तय करने और टोल शुल्क वसूलने का काम वाहन की सामान्य रफ्तार में ही हो जाता है। इससे टोल प्लाजा पर रुकने या गति कम करने की जरूरत नहीं पड़ती।