अम्बाला:/ स्वतंत्रता दिवस के संदर्भ में स्वदेशिता, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के संबंध पर अपने विचार व्यक्त करते हुए शिक्षाविद एवं वरिष्ठ स्तंभकार डॉ. शंकर सुवन सिंह ने कहा कि भारत की वास्तविक स्वतंत्रता का मूल आधार स्वदेशी, स्वाधीनता, स्वावलंबन और स्वाभिमान है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वदेशी तकनीक और युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
डॉ. सिंह ने बताया कि भारत वर्ष 2026 में अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस अवसर की थीम “वंदे मातरम् के 150 वर्ष और विकसित भारत 2047 के लिए युवा शक्ति” निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और राष्ट्रभावना का प्रतीक रहा है। [citation]
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश ने अनेक क्षेत्रों में प्रगति की है, लेकिन सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। उनके अनुसार राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा विकसित भारत के लिए आवश्यक तत्व हैं।
डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वदेशी तकनीक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बन सकती है। उन्होंने चंद्रयान-3 मिशन को स्वदेशी तकनीक की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जिसने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाला पहला देश बनाया।
उन्होंने बताया कि भारत में विकसित विभिन्न स्वदेशी प्रौद्योगिकियाँ, जैसे थर्मल स्मार्ट कैमरा, सीएमओएस आधारित विज़न सिस्टम, वंदे भारत ट्रेन, तेजस लड़ाकू विमान तथा खाद्य प्रसंस्करण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकें, विकसित भारत के लक्ष्य को गति प्रदान कर रही हैं।
डॉ. सिंह के अनुसार भारत की आध्यात्मिक विरासत, स्वदेशी तकनीकी विकास और राष्ट्रीय एकता का समन्वय ही देश को विश्व मंच पर अग्रणी बनाने में सहायक होगा। उन्होंने युवाओं से नवाचार, शोध और आत्मनिर्भरता की भावना अपनाने का आह्वान किया।
अंत में उन्होंने कहा कि “स्वदेशी तकनीक, आत्मनिर्भरता और युवा शक्ति ही विकसित भारत 2047 के तीन प्रमुख स्तंभ हैं।”