
जयपुर , दिव्यराष्ट्र:/ राइजिंग इंडिया, नेरेटिव वार, भारतीय संस्कृति और सभ्यतागत इतिहास, आगामी दशक में कौन देगा भारत को दिशा, हिन्दू दर्शन और बॉलीवुड की कार्यशैली सहित विभिन्न विषयों पर गरमा गरम और विचारोत्तेजक चर्चा के साथ तीन दिवसीय द जयपुर डायलॉग रविवार को संपन्न हो गया।
वक्ताओं ने कहा कि सबका साथ सबका विकास नहीं होकर अब जिसका साथ उसका विकास की बात होनी चाहिए।
मुख्य हाल के प्रथम सत्र में अगले दशक में भारत को कौन नई दिशा देगा विषय पर तहसीन पूनावाला, हर्षवर्धन त्रिपाठी, गणेश भाऊ तोरसेकर, शिवम त्यागी और हर्ष कुमार ने लोकतांत्रिक मूल्य, विकास की समान अवधारणा, सही और मजबूत विपक्ष की अवधारणा तथा विपक्ष की गतिविधियां गलत हैं तो उसे हटाने की जरूरत पर बल दिया। वरिष्ठ पत्रकार भाउ तोरसेकर ने कहा कि हमें यह सोचने की जरूरत है कि अगले दशक में हम कहां होंगे अथवा हमारा फ्यूचर क्या होगा। हम सही दिशा में जा रहे हैं यह देखने की जरूरत है। हमें गाड़ीवान या सत्ता की चाहत नहीं होनी चाहिए अपितु मजबूत बैल की तरह विपक्ष की भूमिका के लिए तैयार रहना चाहिए। अगला दशक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार हो। जनता का ज्यादा विश्वास होता है तो उम्मीदें भी ज्यादा होती हैं। इसलिए भूतकाल को याद रखते हुए गलतफहमी और अहंकार नहीं पालना चाहिए। यह राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब ड्रग मुक्त भारत का निर्माण भी प्राथमिकता से हो। इस सत्र में तहसील पूनावाला ने महंगाई और अन्य मुद्दों पर तीखे सवाल उठाए। सत्र का संचालन पत्रकार अभिषेक तिवारी ने किया।
दूसरा सत्र सभ्यतागत भारत* : क्या हमें अपने हिंदुत्व का परिचय देना होगा* विषय पर चर्चा के दौरान आशीष भारतवंशी कार्तिक गौर, ओमेंद्र रत्नू, हरिंदर सिक्का और पंडित सतीश शर्मा ने तथ्यों के साथ अपनी बात रखी। वक्ताओं का कहना था कि हमें अपनी पहचान का ज्ञान नहीं है। हमें मर्यादा पुरुषोत्तम राम को समझना होगा। सिर्फ 2 अक्टूबर को ही याद रखने के साथ महाराणा प्रताप और शिवाजी को भी जानना होगा। ओमेंद्र रत्नू ने कहा कि आज का इतिहास झूठ और पाखंड का पुलिंदा है। हिंदू इतिहास का पुनर्लेखन बहुत जरूरी है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदुओं को बचाना भी हमारा धर्म है। जो लोग कहते हैं कि उन्हें विदेशी फंडिंग हो रही है तो हमें हिंदू संगठन और कार्यकर्ताओं के लिए फंडिंग करनी होगी तथा सभ्यतागत व्यक्तिगत प्रयास भी करने होंगे। हरविंदर सिक्का ने कहा कि हम हलाल प्रमाणित उत्पाद खा रहे हैं जिसका धन जिहाद फैलाने और सेना पर पत्थरबाजी में इस्तेमाल किया जाता है लेकिन हम चुप हैं। हमें अपनी जंग खुद लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि खालिस्तानी सिख नहीं हो सकते।
तीसरे सत्र में भारत की म्लेच्छ समस्या पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने इतिहास के विभिन्न कालों का जिक्र करते हुए म्लेच्छ को असभ्य, बर्बर, कायदे में नहीं चलने वाले और बाहरी आक्रांता और जंगली सोच वाला बताया। बाबा रामदास ने कहा कि राक्षस तो फिर भी मर्यादा में रहते हैं लेकिन म्लेच्छों की कोई श्रेणी नहीं है। वक्ताओं ने कहा कि गनीमत है कि भारत अभी तक इससे सुरक्षित है लेकिन पूरे विश्व में इनके खिलाफ एक्शन लेने की जरूरत है। यूरोप विशेषतः फ्रांस का उदाहरण देते हुए वक्ताओं ने कहा कि अब निर्णायक समय आ गया है कि उदारता से काम नहीं चलने वाला है। आज म्लेच्छ यूरोप में गले की फांस बन गए हैं। भारत में भी हमें सोते हुए लोगों को जागना होगा, क्योंकि देश की डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है। इस्लामी आतंकवाद को भी काउंटर करना होगा। सत्र का संचालन प्रखर श्रीवास्तव ने किया।
इस बीच विशेष सत्र में भारत में विपक्ष पर डिबेट में चर्चा करते हुए राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ अरुण चतुर्वेदी और जयपुर डायलॉग के अध्यक्ष संजय दीक्षित ने तीखे सवाल जवाब किए। आखिरी सत्र में कैसा होगा भारत का अगला दशक पर चर्चा में
संजय दीक्षित, अभिषेक तिवारी, गणेश भाऊ तोरसेकर, एस्ट्रो शर्मिष्ठा और अवनीश पी एन शर्मा ने भाग लिया। इस मौके पर संजय दीक्षित की पुस्तक काफिर गाइड टू सूफिज्म के कवर का विमोचन किया गया। सत्र का संचालन करण वर्मा ने किया।
द जयपुर डायलॉग समिट 2026 के सेलिब्रेशन पार्टनर प्रीनॉर्ड रिकॉर्ड, वेन्यू पार्टनर क्लार्क आमेर, कॉ स्पॉन्सर धर्मांश फाउंडेशन, ब्लू वन इंक, मनीष कलारिया, पार्टनर डाटा इंफोसिस, सुरुचि प्रकाशन, गरुड़ हैं।





