भारत इंडो-पैसीफिक क्षेत्र में शांति की स्थापना के लिए मुख्य भूमिका निभा सकता है – आचार्य लोकेश*
इंडो-पैसीफिक क्षेत्र के सभी देश एकजुट होकर शांति स्थापना के लिए प्रयास करें – डॉ वी.के. सिंह
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र/: अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक आचार्य लोकेश जी ने इंडियन इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इंडो-पैसीफिक शांति सम्मेलन का उदघाटन किया | इंडो-पैसीफिक पीस फॉरम (आईपीपीएफ) एवं ग्लोबल पीस फाउंडेशन (जीपीएफ) द्वारा आयोजित “भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा: विचारों और सोच का महत्व” विषयक द्विदिवसीय सम्मेलन के उदघाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्वल्लन के पश्चात आईपीपीएफ व जीपीएफ के चेयरमैन डॉ मार्कन्डेय राय के उद्बोधन से हुआ |
मिजोरम के राज्यपाल माननीय डॉ विजय कुमार सिंह, कौंन्फ़ेडेरेशन ऑफ आल इंडियन यूनिवर्सिटीस के अध्यक्ष डॉ प्रियरंजन त्रिवेदी, भारत में पाकिस्तान के हाई कमिशन माननीय साद अहमद वराइच, एवं अर्जेंटीना के अम्बेसेडर मरियानों अगस्टीन कसिनों ने भी संबोधित किया |
विश्व शांतिदूत आचार्य लोकेश ने इस अवसर पर कहा कि भौगोलिक, आध्यात्मिक एवं संसाधनों कि दृष्टि से भारत इंडो -पैसीफिक क्षेत्र में शांति एवं सद्भावना की स्थापना में मुख्य भूमिका निभा सकता है | इस क्षेत्र की संस्कृति, ऊर्जा, एवं आर्थिक संसाधन एक के अनुरूप है | जरूरत है एक साथ योजनाबद्ध तरीके से शांति एवं सद्भावना की स्थापना के कार्य करना | विकास के लिए शांति आवश्यक है, जब विकास भौतिकतावाद पर आधारित होता है तो वो अभिशाप बन जाता है और जब विकास के केंद्र में नैतिकता और अध्यात्म होता है तो वो वरदान बन जाता है |
जैन आचार्य लोकेश ने भारत- प्रशांत क्षेत्र के विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को विश्व शांति केंद्र में इस विषय पर विचार विमर्श करने के लिए आमंत्रित किया | उन्होने कहा कि भारत के प्रथम विश्व शांति केंद्र का उद्देश्य मानवतावादी कार्यों के माध्यम से विश्व शांति की स्थापना करना है |
मिजोरम के राज्यपाल माननीय डॉ वी.के. सिंह ने आचार्य लोकेश जी के सुझाव का स्वागत करते हुये कहा कि इंडो-पैसीफिक क्षेत्र के सभी देशों को एकजुट होकर शांति स्थापना के लिए कार्य करना होगा|