
स्पोर्ट्स फॉर ऑल’ के माध्यम से समावेशी खेल पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाया
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र/ विश्व ऑटिज़्म जागरूकता माह के अवसर पर, इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (आईएसी), जो ऑटिज़्म और संबंधित न्यूरोडेवलपमेंटल स्थितियों वाले व्यक्तियों का समर्थन करने वाला एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन है, ‘स्पोर्ट्स फॉर ऑल: बिल्डिंग एन इक्विटेबल स्पोर्टिंग इकोसिस्टम फॉर ऑल’ पहल का आयोजन किया। यह पहल द क्वांटम हब, स्पेशल ओलंपिक्स भारत और द एक्सेसिबिलिटी कोएलिशन के सहयोग से आयोजित की गई, जिसने नीति-निर्माताओं, प्रैक्टिशनर्स, पैरा और विशेष एथलीट्स, तथा समावेशन के पक्षधर लोगों को एक साथ लाकर खेलों में समान पहुंच और भागीदारी पर चर्चा को आगे बढ़ाया। यह पहल आईएसी की समावेशी अवसरों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है, साथ ही इसके दीर्घकालिक दृष्टिकोण ‘समावेश’ को आगे बढ़ाती है जो भारत का सबसे बड़ा स्थायी, समुदाय-आधारित आजीवन देखभाल और समर्थन का आवासीय पारिस्थितिकी तंत्र है।
कार्यक्रम में एक सम्मान समारोह शामिल था, जिसमें युवा न्यूरोडाइवर्स एथलीट्स को सम्मानित किया गया। इस समारोह का नेतृत्व डॉ. मल्लिका नड्डा, अध्यक्ष, स्पेशल ओलंपिक्स भारत, श्रीमती गीता मंडाविया, संरक्षक सदस्य, स्पेशल ओलंपिक्स गुजरात, जयशंकर नटराजन, निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, इंडिया ऑटिज़्म सेंटर, सुश्री साखी सिंघी, गवर्निंग बॉडी सदस्य एवं प्रमुख – कम्युनिकेशन्स, पार्टनरशिप्स, फंडरेज़िंग और टैलेंट एक्विज़िशन, इंडिया ऑटिज़्म सेंटर, तथा श्री रोहित कुमार, संस्थापक भागीदार, द क्वांटम हब द्वारा किया गया।
इसमें ‘बिल्डिंग एन इक्विटेबल स्पोर्टिंग इकोसिस्टम: ब्रिजिंग ट्रेनिंग, सीएसआर, एंड पॉलिसी’ विषय पर एक मल्टी-स्टेकहोल्डर पैनल चर्चा भी शामिल थी, जिसका संचालन निपुण मल्होत्रा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, निपमैन फाउंडेशन एवं निदेशक डिसएबिलिटी एंड इन्क्लूज़न, द क्वांटम हब ने किया।
इस पहल का मूल उद्देश्य खेल जैसे दैनिक पारिस्थितिकी तंत्रों में समावेशन को स्थापित करना है, जिससे भागीदारी से आगे बढ़कर कौशल-विकास, आत्मविश्वास और दीर्घकालिक विकास के लिए संरचित मार्ग तैयार किए जा सकें।
सम्मान समारोह में 4 युवा न्यूरोडाइवर्जेंट तैराकों — मेका श्री अश्वथ (11 वर्षीय), गुंटुरु लव (9 वर्षीय), गुंटुरु कुश (9 वर्षीय), और थनवेश नवीन (10 वर्षीय), की उत्कृष्ट उपलब्धियों को मान्यता दी गई, जिन्होंने तमिलनाडु के धनुषकोडी से श्रीलंका के तलाईमन्नार तक और वापस पाल्क स्ट्रेट में 60किमी ओपन वाटर रिले तैराकी केवल 18 घंटों में पूरी की।
इन एथलीट्स को याधवी स्पोर्ट्स अकादमी फॉर स्पेशल नीड्स के कोचों द्वारा प्रशिक्षित किया गया, जिनके प्रमुख कोच सतीश सिवकुमार हैं। उन्होंने कम उम्र से तैराकी शुरू की और पूल प्रशिक्षण से आगे बढ़कर प्रतिस्पर्धात्मक ओपन-वाटर इवेंट्स में हिस्सा लिया, जिसमें 5किमी ‘समुद्र वीर’ पोरबंदर स्विमाथॉन 2026 शामिल है, जहाँ उन्होंने उनसे काफी अधिक उम्र के प्रतिभागियों के साथ प्रतिस्पर्धा की।
इनकी यात्रा असाधारण अनुशासन, सहनशक्ति और दृढ़ता को दर्शाती है, और इनमें से कई राष्ट्रीय स्तर पर सबसे कम उम्र के उपलब्धि हासिल करने वालों में शामिल हैं। इस 60 किमी अभियान के बाद भी वे कठोर समुद्री प्रशिक्षण जारी रखे हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी क्षमता और मजबूत हो रही है।
सम्मान समारोह के अतिरिक्त, शिखर सम्मेलन में एक मल्टी-स्टेकहोल्डर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसका संचालन निपुण मल्होत्रा ने किया। इसमें सोनाली फिलिप (डायरेक्टर – ऑपरेशन्स, पीपल एंड कल्चर, गोस्पोर्ट्स), सुवर्णा राज (मैनेजिंग डायरेक्टर, सुगम्य एक्सेसिबिलिटी एंड इन्क्लूज़न), दामिनी घोष (लीड – डिसएबिलिटी एंड इन्क्लूज़न एक्सेस, विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी), और आदित्य केवी (संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उमोया स्पोर्ट्स) शामिल थे।
इस चर्चा में प्रणालीगत बदलाव, पहुंच, और खेलों में समावेशी भागीदारी के रास्तों पर विचार किया गया। चर्चा में “स्पोर्ट्स फॉर ऑल” के महत्व और संरचनात्मक नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया गया, साथ ही प्रशिक्षण मार्गों को मजबूत करने, समावेशन को बढ़ावा देने, पहुंच मानकों में सुधार और नीति-निर्माताओं, संगठनों तथा खेल पारिस्थितिकी तंत्र के बीच सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यक्रम में साखी सिंघी द्वारा संचालित एक लाइटनिंग टॉक भी शामिल थी, जिसमें याधवी के कोचों और तैराकों के माता-पिता के प्रत्यक्ष अनुभव साझा किए गए।
इस पहल के बारे में जयशंकर नटराजन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और निदेशक, इंडिया ऑटिज़्म सेंटर ने कहा, “खेल जीवन को बदलने की शक्ति रखते हैं, क्योंकि वे आत्मविश्वास, दृढ़ता, अनुशासन और जुड़ाव की भावना को विकसित करते हैं। आज सम्मानित किए गए युवा एथलीट्स इस बात का प्रमाण हैं कि सही अवसर, प्रोत्साहन और समर्थन मिलने पर क्या संभव हो सकता है। उनकी यात्रा और उपलब्धियों ने पारंपरिक सोच को चुनौती दी है।”
डॉ. मल्लिका नड्डा, अध्यक्ष, स्पेशल ओलंपिक्स भारत ने कहा, “एक अधिक समावेशी खेल संस्कृति के निर्माण के लिए संस्थानों, नीति-निर्माताओं, शिक्षकों और समुदायों का सामूहिक प्रयास आवश्यक है। ऐसी पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।”
निपुण मल्होत्रा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, निपमैन फाउंडेशन एवं निदेशक – डिसएबिलिटी एंड इन्क्लूज़न, द क्वांटम हब ने कहा, “एक न्यायसंगत खेल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नीति, बुनियादी ढांचे और सामुदायिक भागीदारी में समन्वय जरूरी है। अब ध्यान अलग-अलग प्रयासों से हटाकर प्रणालीगत एकीकरण पर होना चाहिए।”
रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से, आईएसी समावेशन को मुख्यधारा के खेलों में स्थापित करते हुए एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बना रहा है जो क्षमताओं को पहचानता है और भागीदारी की बाधाओं को हटाता है।






