
मुंबई, दिव्यराष्ट्र/ प्रसिद्द लेखक और फिल्मकार, अविनाश त्रिपाठी लगातार इस बात की वकालत कर रहे हैं कि भारत की शिक्षा प्रणाली में फिल्म और मीडिया शिक्षा को शामिल किया जाए। इसी उद्देश्य के तहत वे पिछले कई वर्षों से देश के विभिन्न स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे हैं, ताकि बच्चों और किशोरों को यह समझाया जा सके कि फिल्मों को किस नजर से देखा जाना चाहिए और वे किस तरह की फिल्मों से प्रभावित हो रहे हैं। अविनाश त्रिपाठी का मानना है कि कक्षा 10वीं से 12वीं तक के वरिष्ठ छात्रों के पाठ्यक्रम में फिल्म एजुकेशन को एक विषय के रूप में जोड़ा जाना चाहिए, जबकि छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए फिल्म एप्रिसिएशन की कक्षाएं होनी चाहिए, जहाँ उन्हें अच्छी और खराब फिल्मों के अंतर, उनके प्रभाव और उनके सामाजिक संदेशों के बारे में जागरूक किया जा सके। वे यह भी रेखांकित करते हैं कि भारत की लगभग 40 प्रतिशत आबादी 18 वर्ष से कम आयु की है, और ऐसे में इस विशाल युवा वर्ग को फिल्मों को सही तरीके से समझाने की जिम्मेदारी बेहद अहम हो जाती है, ताकि बच्चे अपराध और आक्रामकता को अपना आदर्श बनाने से पहले सोचें। इसी सिलसिले में अविनाश मुंबई और दूसरे शहरो के कई प्रसिद्द स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षक से मिलकर , लेक्चर के माध्यम से उन्हें जागरूक बना रहे है।
अविनाश त्रिपाठी का कहना है कि बच्चों को यह सिखाया जाना बेहद जरूरी है कि वे फिल्मों को कैसे समझें और उनका सही अर्थ कैसे निकालें। वैश्विक और भारतीय अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि हिंसा और अपराध को महिमामंडित करने वाली फिल्मों का बार-बार बिना मार्गदर्शन के देखा जाना बच्चों और किशोरों में आक्रामक व्यवहार और अपराध की नकल करने की प्रवृत्ति को बढ़ा सकता है।
दुनिया भर में सामने आए कई किशोर अपराध मामलों में यह सामने आया है कि बच्चों ने स्वीकार किया कि वे फिल्मों के दृश्यों या पात्रों से प्रभावित होकर अपराध की ओर बढ़े। अविनाश त्रिपाठी यह स्पष्ट करते हैं कि फिल्म शिक्षा का उद्देश्य सेंसरशिप नहीं बल्कि जागरूकता है, ताकि छात्र कल्पना और वास्तविकता के बीच अंतर समझ सकें, कहानी कहने के उद्देश्य को पहचान सकें और सिनेमा का जिम्मेदारी के साथ उपभोग कर सकें। डिजिटल युग में, जहाँ बच्चे लगातार फिल्मों और ऑनलाइन कंटेंट के संपर्क में हैं, अविनाश त्रिपाठी मानते हैं कि मीडिया साक्षरता अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है।




