
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ पिडिलाइट इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपना नया फेविकोल टेलीविजन कमर्शियल, ‘कुर्सी पे नजर’ पेश किया। यह फिल्म एक बहुत ही बारीकी से देखी गई, पूरी तरह से भारतीय सांस्कृतिक सोच पर आधारित है। रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी यह फिल्म दिखाती है कि कैसे एक मामूली सी कुर्सी, सिर्फ एक फर्नीचर होने से कहीं आगे बढ़कर, घरों, दफ्तरों और संस्थानों में उम्मीद और अधिकार का एक मजबूत प्रतीक बन जाती है।
यह नया कैंपेन ब्रांड के सफर में एक अहम पड़ाव भी है। ‘कुर्सी पे नजर’ फेविकोल का फाइनल कैंपेन है जिसे विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे ने बनाया है। यह एक ऐसी क्रिएटिव साझेदारी रही है जिसने दशकों से ब्रांड की खास पहचान बनाई है, और फेविकोल के हास्य और सोच को भारत की सामूहिक यादों में हमेशा के लिए बसा दिया है।
इस लॉन्च पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री सुधांशु वत्स, मैनेजिंग डायरेक्टर, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कहा कि “फेविकोल हमेशा से ही इंसानी जिंदगी की उन सीधी-सादी सच्चाइयों के लिए जाना जाता रहा है, जिन्हें इतने प्यारे अंदाज में बताया जाता है कि वे ग्राहकों के दिलों को गहराई से छू जाती हैं। ‘कुर्सी पे नजर’ एक ऐसी अनोखी भारतीय सोच पर आधारित है जो हर दफ्तर, घर और संस्थान में देखने को मिलती है, जहां ‘कुर्सी’ उम्मीद, बदलाव और महत्वाकांक्षा का प्रतीक होती है। पीयूष पांडे में यह असाधारण काबिलियत थी कि वे रोजमर्रा की ऐसी आम बातों को फेविकोल के लिए बेहतरीन कहानियों में बदल देते थे। यह फिल्म एक सीधे-सादे, लेकिन बहुत ही दमदार विचार के जरिए उसी विरासत को आगे बढ़ाती है। ये एक ऐसा विचार जो पूरी तरह से फेविकोल की पहचान है।”





