
दिव्यराष्ट्र, जयपुर: ग्रामीण राजस्थान में एक शांत लेकिन प्रभावशाली परिवर्तन आ रहा है। परंपरागत रूप से कृषि, दैनिक मजदूरी और छोटे व्यवसायों पर आधारित समुदाय अब लिटरेसी इंडिया की पाठशाला 3.0 पहल के माध्यम से शिक्षा और अवसरों की नई गति का अनुभव कर रहे हैं।
कई परिवारों के लिए कक्षा 5 या 8 के बाद पढ़ाई जारी रखने का अर्थ पास के गाँवों से कस्बे तक यात्रा करना था, जहाँ सीखने के संसाधन भी सीमित थे। पाठशाला 3.0 इस स्थिति को बदल रही है—इंटरएक्टिव स्मार्ट कक्षाओं, STEM किट्स, कोडिंग मॉड्यूल और स्व-अध्ययन उपकरणों के माध्यम से तकनीक-समर्थित शिक्षा उपलब्ध कराइ है । अब बच्चे सीखते हैं, प्रश्न पूछते हैं और नए विचारों को खोजते हैं, जिससे शिक्षा रोचक, आनंददायक और रेलेवेंट बन रही है। उपस्थिति, जिज्ञासा और कक्षा सहभागिता लगातार बढ़ रही है।
आर्थिक सीमाओं, सामाजिक चुनौतियों और बालिका शिक्षा पर कम ध्यान के कारण पद्मा, रीना, काजल और निर्मला अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं। सेकंड चांस स्कूलिंग ने उन्हें नया अवसर दिया, जिससे शिक्षा, रोजगार और गरिमापूर्ण आजीविका के रास्ते खुले।
कक्षा 12 पूरी करने और बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने के बाद रामलखन ने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी महसूस की। मोबाइल रिपेयरिंग का स्किल ट्रेनिंग उन्हें रोजगार योग्य बनाते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में ले गया।
शैक्षणिक शिक्षा से आगे बढ़कर, पाठशाला 3.0 बालिका शिक्षा, ग्रामीण बच्चों के लिए तकनीक बेस्ड सीखने और युवाओं के स्किल विकास पर विशेष जोर देती है। यह ज़्यादातर इधर उधर घूमने वाले परिवारों के बच्चों और पहले से माइग्रेटेड समुदायों को शिक्षा, आश्रय और सामाजिक गरिमा तक पहुँच भी सुनिश्चित करती है। पढ़ाई छोड़ चुकी युवा महिलाएँ फिर से कक्षा 10 और 12 पूरी कर रही हैं तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेकर पार्लर, सिलाई इकाइयाँ और छोटे उद्यम शुरू कर रही हैं। 18 वर्ष से अधिक आयु की लड़कियाँ दोपहिया वाहन चलाना भी सीख रही हैं जो आत्मविश्वास, स्वतंत्रता और दैनिक गतिशीलता को बढ़ाता है।
कार्यक्रम स्थानीय युवाओं को मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, सिलाई, ब्यूटी एवं वेलनेस और उद्यम विकास में प्रशिक्षण देकर समुदाय के भीतर ही आजीविका के अवसर तैयार कर रहा है। पिपलोड़ी गाँव में, एक इमारत गिरने की घटना से बच्चों के सीखने का वातावरण प्रभावित होने के बाद, लिटरेसी इंडिया ने सैटेलाइट सेंटर स्थापित कर सीखने की कॉन्टिनुइटी सुनिश्चित की। तकनीक की मदद से बच्चों में फिर से खुशी लौटी, सीखने में रुचि बढ़ी और उनका ध्यान पिछली पीड़ा से हटकर भविष्य पर केंद्रित हुआ। आज 70 विद्यार्थी सुरक्षित, तकनीक-सक्षम वातावरण में पढ़ाई कर रहे हैं जो एकाग्रता, सहभागिता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देता है।
इस पहल पर बोलते हुए, लिटरेसी इंडिया की संस्थापक कैप्टन इंद्राणी सिंह ने कहा, “झालावाड़ के गाँवों में ज्ञानतंत्र कार्यक्रम के साथ शिक्षा की शुरुआत हुई, जिसने तुरंत डिजिटल सशक्तिकरण का मार्ग खोला। इसने उन बालिकाओं के लिए सेकंड-चांस शिक्षा के द्वार खोले, जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने का निर्णय लिया। शिक्षा के साथ आत्मविश्वास, गतिशीलता और आजीविका के सपने देखने का साहस आया। शिक्षा मन को कॉन्फिडेंस दिलाती है और प्रगतिशील व सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। यही पाठशाला 3.0 ने किया—संभावनाओं को मुक्त कर समुदायों को भीतर से सशक्त बनाया।”
आज मनोहर थाना में पाठशाला 3.0, 30 से अधिक गाँवों के परिवारों को प्रभावित कर रही है—आत्मविश्वासी शिक्षार्थियों, सशक्त बालिकाओं और सक्षम युवाओं के साथ एक उज्ज्वल ग्रामीण राजस्थान का निर्माण करते हुए।
कर्मचारी स्वयंसेवा, मेंटरशिप, एक्सपोज़र विज़िट और शिक्षार्थियों के साथ सक्रिय जुड़ाव के माध्यम से टेलीपरफॉर्मेंस, लिटरेसी इंडिया के साथ मिलकर शिक्षा और रियल वर्ल्ड वर्कप्लेस अपेक्षाओं के बीच की दूरी को कम कर रहा है, जिससे सीखना प्रेरणादायक और भविष्य के लिए तैयार बनता है।
1996 में स्थापना के बाद से, लिटरेसी इंडिया ने शिक्षा, स्किल विकास और आजीविका पहलों के माध्यम से 6.1 मिलियन बच्चों, युवाओं और महिलाओं के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। पाठशाला 3.0 इसी कमिटमेंट को आगे बढ़ाते हुए सामुदायिक शिक्षण केंद्रों को अवसर, दृढ़ता और आशा से भरे जीवंत स्थानों में बदल रही है परिवारों को सशक्त बनाते हुए और राजस्थान की अगली पीढ़ी को आकार देते हुए।




