
(डॉ. सीमा दाधीच)
राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारीभले ही राज घराने में जन्मी लेकिन उनकी सादगी, सहजता और बड़ों के प्रति सम्मान, छोटो के लिए स्नेह का भाव आम जन को आकर्षित करता है। सवाईमाधोपुर से विधायक, राजसमंद से सांसद और वर्तमान में विद्याधर नगर क्षेत्र से विधायक बनकर उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव प्रयास कर मतदाताओं का विश्वास जीता है। उनके जीवन में समाज , संस्कृति और सभ्यता का अनूठा संगम देखने को मिलता है उन्होंने अपने कार्य ओर प्रभाव से राजस्थान की राजनीति को गौरांवित किया है।
राजस्थान की आन बान शान के कायल देशी ही नहीं विदेशी पर्यटक भी है राजस्थान जहां हेरिटेज विरासत के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ता है वहीं राजस्थान की ग्रामीण-नगरीय संस्कृति,रीति-रिवाज,भाषा, रहन-सहन,खान-पान और पहनावा सबको अपनी और आकर्षित करता है।भारतीय समाज में नारी आदर्श एवं संस्कारों की मूर्ति है। नारी रहित समाज की परिकल्पना करना असंभव है। हमारे इतिहास में अनेकों नारियों की गौरव गाथा का शौर्य युक्त वर्णन है जिन्होंने समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने का काम किया है और राजस्थान राज्य की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने भी मंत्रिमंडल के दायित्व को विवेक एवं कौशलता से निर्वहन करते हुए राजस्थान सरकार में अद्वितीय पहचान बनाई है। प्रदेश की वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने अपने वित्तीय कौशल का उदाहरण पेश किया है।
वर्तमान में वे राजस्थान की उपमुख्यमंत्री के साथ ही पर्यटन, वित्त एवंसार्वजनिक निर्माण विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभालकर राजस्थान के विकास में भागीदारी निभा रही है।दिया कुमारी का जन्म 30 जनवरी 1971 ई को जयपुर राजघराने में हुआ, इनके पिता जयपुर रियासत के पूर्व महाराजा ब्रिगेडियर सवाई भवानी सिंह (भारत-पाक युद्ध 1971 के नायक, (महावीर चक्र-शौर्यचक्र विजेता) और माता पद्मिनी देवी के यहां हुआ। दिया ब्रिटिश शासन के दौरान जयपुर रियासत के अंतिम शासक महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय (राज प्रमुख) की पोती हैं। दिया कुमारी ने मॉडर्न स्कूल (नई दिल्ली) , जी.डी. सोमानी मेमोरियल स्कूल, मुंबई और महारानी गायत्री देवी गर्ल्स पब्लिक स्कूल,जयपुर में शिक्षा प्राप्त की।
उन्होंने 1989 में चेल्सी स्कूल ऑफ आर्ट्स, लंदन से ललित कला (सजावटी चित्रकला) में स्नातक डिप्लोमा और एमिटी विश्वविद्यालय, जयपुर से दर्शन शास्त्र में मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। दिया कुमारी का जन्म राजघराने में हुआ शिक्षा मेट्रो में होने के बाद भी उन्होंने अपनी “संस्कृति और सभ्यता” को आत्मसात बनाए रखा। दिया कुमारी को आधुनिकता का रंग कभी रंग नहीं पाया और राजनीति में प्रतिष्ठा पाने के बाद भी सभ्यता,संस्कार और शालीनता को बरकरार रखा। इन्होंने अपने पहनावे में विदेशी या आधुनिकता को कभी नहीं अपनाया जो इनके स्वयं के राजस्थान की परंपरा के प्रति समर्पण,त्याग को हृदयंगम करता है, दिया कुमारी संस्कृति,सभ्यता और संस्कारों से ओतप्रोत संगम का परिचायक है।
प्रचुर संसाधन और धन होने के पश्चात भी बहुत सादगी और शालीनता की अनुपम और अनुकरणीय उदाहरण है। इनके पहनावे में हमेशा साड़ी का सुव्यवस्थित भारतीयता के साथ सलीके से पहनना या राजपूती पोशाक को पहनना इनकी पसंद है। भारतीय नारी का साड़ी में दृश्यमान होना सुन्दर,शोभायमान और आदर्श महिला का परिचय देती हैं। साड़ियों के विशाल कलेक्शन के पीछे उनकी दादीजी,नानी जी और माताजी से मिली प्रेरणा हैं जो उनके लिए केवल एक परिधान नहीं बल्कि भावनात्मक,सामाजिक और भारतीय परम्परा का अद्भुत सामंजस्य का प्रतीक हैं,आपका साड़ी पहनने का मुख्य उद्देश्य आपकी गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ शाही विरासत को कायम रखना और शालीनता है। वे अधिकांशतः राजपूती शिफॉन लहरिया और बंधेज साड़ियाँ पहनती हैं जो राजस्थान की पारंपरिक पहचान को दर्शाती हैं। दिया कुमारी अपने साक्षात्कार या विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम में बताती है की हमारी संस्कृति और हमारे संस्कार ही हमारी पहचान हैं और यह ही राजस्थानी परम्पराओ की गौरव गाथा है।आपके तीन संतान हैं पद्मनाभ सिंह,लक्ष राज सिंह और गौरवी कुमारी।
राजपरिवार की सदस्य होने के बाद भी इन्होंने घर परिवार बच्चों के साथ काम करते रहना पसंद किया। दिया कुमारीअपनी अत्यंत व्यस्त दिनचर्या के बाद भी प्रातः जल्दी उठना और अपने पूरे दिन को सक्रिय रखने के लिए घूमना,स्विमिंग करना और बैडमिंटन खेलना उनकी विशिष्टता है। वे संतुलित आहार पर ध्यान देती हैं और स्वस्थ जीवन के लिए तेल और मीठा कम खाने का सुझाव भी देती हैं साथ ही इन्हें पारंपरिक शाकाहारी राजस्थानी व्यंजन पसंद हैं उच्च कुल और राजघराने से संबंध रखने वाली महिला संयमित जीवन शैली को चुनती हैं जो देश की महिलाओं को प्रेरित करती है इससे यह प्रतीत होता है कि स्वयं पर भी ध्यान देकर स्वाध्याय करना चाहिए जिससे नारी भागदौड़ वाली जिंदगी में भी स्वस्थता के साथ मानसिक सुकून का आनंद ले सके। श्रीकृष्ण भी कहते है कि नारी ही नारायणी हैं, सृष्टि का आधार हैं। जननी परमेश्वर की प्रत्यक्ष प्रतिनिधि हैं। पूरी सृष्टि मुझमें बसती है, परन्तु मैं माता के चरणधूलि में बसता हूँ। जो इस ब्रह्माण्ड को संचालित करने वाले विधाता है, उसकी प्रतिनिधि है नारी अर्थात् समग्र सृष्टि ही नारी है, इसके अलावा कुछ भी नही है। भारतीय संस्कृति में तो स्त्री ही सृष्टि की समग्र अधिष्ठात्री है।
महिलाएं ही संस्कृति,संस्कार और परम्पराओं की वास्तविक संरक्षिका हैं।राजनीति,मीडिया,पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में भी नारी ने अपनी पहचान बना पाई है। सेना वायुयान उड़ान, शिक्षा,विज्ञान, व्यवसाय,सूचना प्रौद्योगिकी,आदि चिकित्सा क्षेत्र में भी लोहा मनवाया है। आज की नारी प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ रही हैं उसके पृष्ठ में पुरुष रूप में पिता,पति,पुत्र और भाई का सानिध्य और विश्वास ही नारी के उत्थान को मज़बूत बनाता है। आज नारी हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री के भरोसे पर भी खरी उतरी और ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया।
जब-जब भी शक्ति को याद किया नारी ने हमेशा साथ दिया ईश्वर भी नारी शक्ति को पूजते थे। महिषासुरमर्दिनी, दुर्गा,काली,भवानी के रूप में रक्षा की है जब नारी को सृष्टि के पालनहार के रूप में ममत्व की छांव में अन्नपूर्णा,और मर्यादा में माता अनसूया का रूप नज़र आया। दिया कुमारी का सफर केवल संस्कार और संस्कृति की और ही नहीं वह राजस्थान की एक प्रमुख भाजपा नेता और वर्तमान (दिसंबर 2023 से) में उपमुख्यमंत्री भी हैं, इनके पास राजस्थान सरकार के वित्त,पर्यटन, सार्वजनिक निर्माण विभाग,महिला और बाल विकास,महिला अधिकारिता विभाग, कला साहित्य,संस्कृति विभाग है।
पूर्व जयपुर राजघराने की सदस्य दिया ने 2013 में राजनीति में कदम रखा, 2013-18 तक सवाई माधोपुर से विधायक, 2019-23 तक राजसमंद से सांसद रहीं और 2023 में विद्याधर नगर से रिकॉर्ड मतों से जीतकर उप मुख्यमंत्री बनीं। दिया कुमारी का राजनीतिक सफर,और राजनीति में प्रवेश (2013) में दिया कुमारी ने 10 सितंबर 2013 को भाजपा में शामिल होकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा।लोकसभा सांसद (2019-2023), 2018 में टिकट न मिलने के बाद, 2019 में पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें राजसमंद से लोकसभा प्रत्याशी बनाया, जहाँ उन्होंने शानदार जीत हासिल की। उपमुख्यमंत्री का सफर(2023-वर्तमान), 2023 के विधानसभा चुनाव में,भाजपा ने उन्हें विद्याधर नगर (जयपुर) से मैदान में उतारा, जहाँ उन्होंने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद, उन्हें राजस्थान का उपमुख्यमंत्री बनाया गया। यह जीत हासिल कर आज राजनीति में अपने कार्यों से लोहा मनवा रही है। साथ ही राजस्थान का नाम रोशन कर रही है।






