
28 मई 2026 -विश्व रक्त कैंसर दिवस विशेष
– जीवनदान परियोजना और सीएमएल-सीएमवाए योजना के तहत निःशुल्क उपचार के बाद 176 बच्चों सहित 516 ब्लड कैंसर रोगी अब जी रहे है सामान्य जीवन
– कार-टी सेल थेरेपी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट से ब्लड कैंसर उपचार में नई उम्मीद
जयपुर, दिव्यराष्ट्:/ बार-बार बुखार का आना, शरीर में कमजोरी आना, शरीर में खून की कमी होना, हाथ-पांव में कमजोरी महसूस होना। यह सभी लक्षण सामान्य नजर आते है, लेकिन अगर उपचार के बाद भी यह लक्षण ठीक ना हो तो यह शरीर के रक्त में कैंसर सेल की शुरूआत का संकेत भी हो सकते है। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के ब्लड कैंसर एवं बीएमटी विशेषज्ञ डॉ प्रकाश सिंह शेखावत ने बताया कि ब्लड कैंसर की समय पर पहचान और आधुनिक उपचार से ब्लड कैंसर को पूर्णतः हराकर एक सामान्य जीवन जिया या जा सकता है।
बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ शिवानी माथुर ने बताया कि बच्च्चों में कई तरह के ब्लड कैंसर होते हैं, जिसकी शुरूआती स्तर में उपचार की शुरूआत करके उन्हें पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है। उपचार पूर्ण होकर स्वस्थ जीवन जी रहे हजारों बच्चे सामान्य जांच के लिए चिकित्साल्य में आते हैं जो अन्य बच्चों की तरह ही स्पोटर्स और फिजिकल एक्टिविटी में भी पूर्ण रूप से एक्टिव होते है।
कार-टी सेल थेरेपी एवं बीएमटी से मिल रहे श्रेष्ठ परिणाम
डॉ शेखावत ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा में कार-टी सेल थेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) जैसी अत्याधुनिक तकनीकें ब्लड कैंसर और गंभीर रक्त रोगों के उपचार में नई उम्मीद बनकर उभरी हैं। कार-टी सेल थेरेपी में मरीज की प्रतिरक्षा कोशिकाओं (टी-सेल) को विशेष तकनीक से कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है। वहीं बीएमटी के माध्यम से रोगग्रस्त बोन मैरो को स्वस्थ स्टेम सेल्स से प्रतिस्थापित किया जाता है। यह उपचार ल्यूकीमिया, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे गंभीर रोगों में उपयोगी है।
परियोजनओं के तहत मिल रहा निःशुल्क उपचार
डॉ शेखावत ने बताया कि बीएमसीएच में ब्लड कैंसर से जुड़ी दो परीयोजनाएं चलाई जा रही है, जिसके तहत रोगियों को निःशुल्क उपचार किया जाता है। जिसमें बच्चों के लिए जीवनदान परियोजना है। परियोजना में लो रिस्क वाले तीन तरह के ब्लड कैंसर एक्यूट लिम्फोब्लॉस्टिक ल्यूकीमियां (एएलएल), एक्यूट प्रोमाईलोसाईटिक ल्यूकीमियां (एएमपीएल), होजकिन्स लिम्फोमा (एचएल) शामिल है। अगस्त 2014 से मार्च 2026 तक इस योजना में 11.03 करोड़ रूपए की लागत से 176 बच्चों को उपचार देकर कैंसर मुक्त किया। यह सभी बच्चे कैंसर सामान्य जीवन जी रहे है। व्यस्कों में होने वाले ब्लड कैंसर के लिए क्रोनिक माईलोइड ल्यूकीमिया कैंसर मुक्ति योजना (सीएमएल-सीएमवाए) है। यह योजना में अगस्त 2015 से मार्च 2026 तक 2.47 करोड़ रूपए की लागत से 340 रोगियों को उपचार देकर कैंसर मुक्त किया गया।
समय पर उपचार की शुरूआत जरूरी
डॉ शिवानी माथुर ने बताया कि जागरूकता की कमी के चलते इस रोग की पहचान नहीं होती और उपचार समय पर शुरू नहीं हो पाती। हर रोगी में शुरूआती लक्षण अलग-अलग होते हैं। जिनमें बार-बार बुखार आना, एनिमियां का उपचार लेने के बाद भी ठीक ना होना, शरीर पर गांठ का उभरना शामिल है। इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि कोई भी असमान्य लक्षण उपचार के बाद भी लम्बे समय तक ठीक ना हो तो कैंसर रोग विशेषज्ञ से एक बार परामर्श अवश्य करना चाहिए।



