झूठे नेरेटिव वार को काउंटर करना होगा
– फर्जी इकोसिस्टम से सतर्क रहने की जरूरत
जयपुर ,दिव्यराष्ट्र:/ सोशल मीडिया पर धीरे- धीरे जहर परोसा जा रहा है और नए-नए नेरिटिव गढ़े जाते हैं। विरोधियों के मंसूबे देश में उथल-पुथल मचाने के हैं, लेकिन हमें एकजुट और सतर्क रहना होगा। हमारा लक्ष्य राष्ट्रहित में संगठित रहने का होना चाहिए। नए-नए पैंतरों से बचते हुए हमें अपने राष्ट्रवादियों/हीरोज को पहचानना होगा। ऐसा होने पर ही आगामी 5-10 साल भारत इससे उबर जाएगा।
राष्ट्रवादियों के महाकुंभ जयपुर डायलॉग में शनिवार को दूसरे दिन हुए डेढ़ दर्जन से अधिक सत्रों में रक्षा विशेषज्ञ, साहित्यकार और पत्रकार सहित विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों ने अपनी बेबाक राय रखी। इस दौरान भारत और पड़ोसी मुल्क, न्यू साउथ एशिया आर्डर सत्र में कर्नल अजय रैना, लेखक जनरल डीपी पांडे, मेजर जनरल राजीव नारायणन, मेजर गौरव आर्य, कर्नल आरएसएन सिंह और आदि अचिंत ने द्वीपक्षीय संबंधों, देशों और नेरेटिव वार पर अपनी राय रखी और श्रोताओं के सवालों के जवाब भी दिए।
तीसरे सत्र में सोशल मीडिया में नेरेटिव वार तथा लुटियंस मीडिया विषय पर अशोक श्रीवास्तव, आनंद नरसिम्हन, सुशांत सिंह सुशांत सिन्हा, हर्ष कुमार और प्रकाश श्रीवास्तव ने 2014 और उसके बाद की स्थितियों पर अपनी राय व्यक्त की। इस सत्र का संचालन अभिषेक तिवारी ने किया। वक्ताओं का कहना था कि सोशल मीडिया एक अनगाइडेड मिसाइल की तरह है जिसे विरोधीयों ने अपना हथियार बनाया। उनका कहना था कि नेरेटिव की परिभाषा बदली है । वीडियो आप डेमोक्रेटिक हो गया है जो पहले कभी नहीं रहा। 2014 के बाद सही को बर्दाश्त करने में परेशानी होने लगी है। बदलाव को लोग न्यू नॉर्मल मानते हैं। उनका कहना था कि नॉरेटिव की लड़ाई चलती रहेगी सच बताने के लिए कीमत चुकानी पड़ती है इसमें पब्लिक का योगदान बहुत जरूरी है। लुटियंस मीडिया आज भी जिंदा है और ताकतवर होकर सिस्टम में घुस गया है। लेकिन 2014 के बाद उनकी दाल गलना बंद हो गई है। नॉरेटिव से लड़ने के लिए हमें रणनीतिक रूप से तैयार रहना होगा।
मुख्य हाल में चौथे और अंतिम सत्र में उभरते से भारत को कानूनी प्रणालियों के जरिए रोकने की रणनीति में तहसीन पूनावाला, अनुपम मिश्रा, सुप्रीम कोर्ट की वकील अमिता सचदेवा, विजय सरदाना, मकरंद आदकर और धीरेंद्र पुंडीर ने राष्ट्रीय राजनीति, सामाजिक परिवर्तन और विरासत और सभ्यतागत संस्कृति पर विचार रखे। हिंदू लीगल एड वेबसाइट को लांच किया गया। इसके माध्यम से हिंदू हितों की कानूनी लड़ाई लड़ी जानी है।
इस दौरान इको सिस्टम से लड़ने और विरोधी को नुकसान पहुंचाने से रोकने या राजनीतिक/रणनीतिक लाभ हासिल करने के लिए कानूनी प्रणालियों और अदालतों का एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
वक्ताओं ने आर्थिक, रणनीतिक और वैश्विक स्तर पर मजबूत होते भारत को कानूनी चुनौतियां से निपटने पर बेबाक विचार व्यक्त किए। मंच संचालन प्रणय भारद्वाज ने किया।
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गन, गाना और गैंगस्टर, बदलनी है पंजाब की पहचान
कुछ पॉलीटिकल – उत्तर प्रदेश पंजाब सत्र में चर्चा करते हुए अंकुर आर्य, ओंकार चौधरी, अभिषेक तिवारी और हर्ष कुमार ने कहा कि देश की सरहद के निकटवर्ती राज्य सुरक्षित है। ऐसे में दुश्मन देश के एजेंट्स ने पंजाब को कमजोर राज्य मानकर नशा और धर्मांतरण का जाल फैलाया है। लिहाजा गुजरात, राजस्थान, हरियाणा के बाद अब पंजाब में भी भाजपा पैर जमाएगी। ड्रोन से ड्रग्स, ड्रोन से हथियार और धर्मांतरण, जो पंजाब में आमजन के लिए चुनौती बन गया है वहां की जनता ने उसे उखाड़ फेंकने का मन बना लिया है। गृहमंत्री अमित शाह ने नशे को जड़ से उखाड़ने का संकल्प लिया है।
वक्ताओं ने कहा कि भाजपा भले ही पंजाब में ना जीत पाए, लेकिन सबसे अधिक सीटें जीतने वाली सिंगल लार्जेस्ट पार्टी बनेगी।
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योगी बनाम अखिलेश (यूपी ओपिनियन)
सत्र में चर्चा करते हुए शांतनु गुप्ता, प्रखर श्रीवास्तव और अवनीश पी एन शर्मा ने कहा कि योगी ने उत्तर प्रदेश को निवेशकों के लिए सुरक्षित बनाया। इसके लिए हिस्ट्रीशीटर्स का एनकाउंटर किया। कुछ हिस्ट्रीशीटर शहर छोड़ कर भाग निकले, वहीं जो जेल में थे उन्होंने जमानत करवाने से इनकार कर दिया। योगी सरकार ने प्रदेश में 70, 000 एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया है। इनमें कानपुर में रेलवे और सेना की भूमि भी शामिल है।
वक्ताओं ने कहा कि विपक्ष और दूसरे समुदाय ने उत्तर प्रदेश में योगी के खिलाफ नेगेटिव नैरेटिव चलाया। कभी अजय बिष्ट कहकर योगी को बाहरी बताया, तो कभी चिलम बाबा कहा। वहीं, मोदी-योगी और योगी- शाह की लड़ाई दिखाकर नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया। हालत बदले हैं, लेकिन अभी भी बहुत अच्छे नहीं हुए हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के 2027 के विधानसभा चुनाव में भीतरघात से सतर्कता बरतनी होगी।
कुछ पॉलीटिकल – उत्तर प्रदेश पंजाब सत्र में चर्चा करते हुए अंकुर आर्य, ओंकार चौधरी, अभिषेक तिवारी और हर्ष कुमार ने कहा कि देश की सरहद के निकटवर्ती राज्य सुरक्षित है। ऐसे में दुश्मन देश के एजेंट्स ने पंजाब को कमजोर राज्य मानकर नशा और धर्मांतरण का जाल फैलाया है। लिहाजा गुजरात, राजस्थान, हरियाणा के बाद अब पंजाब में भी भाजपा पैर जमाएगी। ड्रोन से ड्रग्स, ड्रोन से हथियार और धर्मांतरण, जो पंजाब में आमजन के लिए चुनौती बन गया है वहां की जनता ने उसे उखाड़ फेंकने का मन बना लिया है। गृहमंत्री अमित शाह ने नशे को जड़ से उखाड़ने का संकल्प लिया है।
वक्ताओं ने कहा कि भाजपा भले ही पंजाब में ना जीत पाए, लेकिन सबसे अधिक सीटें जीतने वाली सिंगल लार्जेस्ट पार्टी बनेगी।
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योगी बनाम अखिलेश (यूपी ओपिनियन)
सत्र में चर्चा करते हुए शांतनु गुप्ता, प्रखर श्रीवास्तव और अवनीश पी एन शर्मा ने कहा कि योगी ने उत्तर प्रदेश को निवेशकों के लिए सुरक्षित बनाया। इसके लिए हिस्ट्रीशीटर्स का एनकाउंटर किया। कुछ हिस्ट्रीशीटर शहर छोड़ कर भाग निकले, वहीं जो जेल में थे उन्होंने जमानत करवाने से इनकार कर दिया। योगी सरकार ने प्रदेश में 70, 000 एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया है। इनमें कानपुर में रेलवे और सेना की भूमि भी शामिल है।
वक्ताओं ने कहा कि विपक्ष और दूसरे समुदाय ने उत्तर प्रदेश में योगी के खिलाफ नेगेटिव नैरेटिव चलाया। कभी अजय बिष्ट कहकर योगी को बाहरी बताया, तो कभी चिलम बाबा कहा। वहीं, मोदी-योगी और योगी- शाह की लड़ाई दिखाकर नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया। हालत बदले हैं, लेकिन अभी भी बहुत अच्छे नहीं हुए हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के 2027 के विधानसभा चुनाव में भीतरघात से सतर्कता बरतनी होगी।
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इज मोदी रियली हिंदुत्ववादी
सत्र में गणेश भाऊ तोरसेकर, कार्तिक गौर और करण वर्मा ने चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उनके समर्थकों को अंधभक्त बोलना अनुचित है। संघ और भाजपा कभी भी व्यक्तिवादी नहीं रहे हैं। इसके कार्यकर्ता व्यक्ति के प्रति नहीं संस्था के प्रति निष्ठा रखते हैं। सत्र में एसटी एससी एक्ट का दुरुपयोग, यूसीसी और राम मंदिर चंदा चोरी जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हुए कहा कि कई बार बड़ी समस्या को सुलझाने के लिए छोटे मुद्दों में उलझना होता है। जैसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इंडियन नेवी ने पाकिस्तान को गुमराह करने के लिए समंदर में मोर्चा जमाया, लेकिन पूरा ऑपरेशन वायु सेवा ने रच दिया था। वहां दुश्मन को मात देने के लिए पाकिस्तान को गुमराह करना था।
उन्होंने मीडिया को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मीडिया भी नैरेटिव चलाता है। भारत के कई मीडिया चैनल पर पाकिस्तान भरोसा करता है। वक्ताओं ने वन नेशन वन इलेक्शन को लागू करने की बात कहते हुए कहा कि शिवाजी महाराज की लड़ाई अब भी जा रही है। वक्ताओं ने कहा कि बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाता तो ममता बनर्जी को सहानुभूति मिलती ऐसे में मोदी ने रणनीति तय करते हुए निर्धारित रास्ता अपनाया और सफलता हासिल की।
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ब्राह्मणवाद से आजादी? एससी एसटी एक्ट
सत्र में चर्चा करते हुए आनंद रंगनाथन, हर्षवर्धन त्रिपाठी और धीरेंद्र पुंडीर ने कहा कि भारत से ब्राह्मणवाद को खत्म किया जाना संभव नहीं है क्योंकि ब्राह्मणवाद किसी जाति विशेष का नाम नहीं, बल्कि उस ज्ञान का नाम है जो भारत के प्रत्येक सनातनी में समाया हुआ है। ऐसे में ब्राह्मणवाद से आजादी नारे लगाना अनुचित है। उन्होंने कहा कि दरअसल केंद्र में भाजपा की सरकार लगातार बने रहना और अयोध्या में रामलला मंदिर के निर्माण से राजनीति का एक समुदाय विशेष नाराज है। लेकिन उन लोगों को कश्मीरी पंडितों पर किए गए अत्याचारों की कभी याद नहीं आई। 1984 के दंगों के बाद से कितनी सरकारी आई और गई लेकिन कश्मीर घाटी में ब्राह्मणों का पुनर्वास नहीं हो सका। दुश्मनों ने नालंदा और तक्षशिला जैसे दुनिया भर में प्रसिद्ध ज्ञान केंद्र पर भी हमला किया लेकिन भारत तब भी मिट नहीं पाया। ऐसे में ब्राह्मणवाद पर अटैक का अर्थ भारत में ज्ञान के केंद्रों पर अटैक है, जो असंभव है।