दिव्यराष्ट्र, जयपुर: ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने के बाद महिलाओं को कम समय में कई अहम फैसले लेने पड़ सकते हैं। ऐसे समय में इलाज से जुड़ी सामान्य जानकारी समझना भी मुश्किल हो सकता है। सर्जरी, रेडिएशन और कैंसर दोबारा होने का खतरा कम करने वाली दवाओं के बीच कई मेडिकल शब्द और इलाज के तरीके समझने पड़ते हैं। साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि इनका रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा। शुरुआती चरण में ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने पर केवल मौजूदा इलाज ही नहीं, बल्कि आगे की सेहत के बारे में सोचना भी जरूरी है।
डॉ. अनन्या पारीक, सलाहकार, मणिपाल अस्पताल, जयपुर, ने कहा, “शुरुआती चरण के ब्रेस्ट कैंसर का सफल इलाज केवल बीमारी को ठीक करने तक सीमित नहीं है। यह भी जरूरी है कि इलाज के दौरान महिलाओं की जीवन की गुणवत्ता बनी रहे। इसके लिए हर मरीज में कैंसर दोबारा होने के खतरे के अनुसार इलाज तय करना, उपचार के फायदों के साथ दस्त, थकान और दर्द जैसे संभावित दुष्प्रभावों का ध्यान रखना और मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य को सहयोग देना जरूरी है। मरीज की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया इलाज इन सभी पहलुओं पर केंद्रित होना चाहिए।”
अपने कैंसर विशेषज्ञ से खुलकर बातचीत करने से इलाज के विकल्पों को समझना और अपनी जरूरतों के अनुसार फैसला लेना आसान हो सकता है। इसके लिए डॉक्टर से ये चार सवाल जरूर पूछें।
मेरा कैंसर दोबारा होने का कितना खतरा है और मेरे लिए इसके क्या मायने हैं? : शुरुआती चरण में ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने पर यह समझना जरूरी है कि बीमारी का स्टेज ही सब कुछ नहीं बताता। शुरुआती चरण के ब्रेस्ट कैंसर का अक्सर इलाज संभव होता है, लेकिन कैंसर दोबारा होने का खतरा हर महिला में अलग हो सकता है। इस खतरे का आकलन करते समय डॉक्टर ट्यूमर के आकार और ग्रेड, लिम्फ नोड्स में कैंसर की मौजूदगी, हार्मोन रिसेप्टर और एचईआर2 की स्थिति सहित अन्य जांच रिपोर्ट देखते हैं। जरूरत पड़ने पर कुछ अतिरिक्त जांच भी कराई जा सकती हैं। अपने डॉक्टर से पूछें कि इन बातों के आधार पर निकट भविष्य और आने वाले वर्षों में कैंसर दोबारा होने का कितना खतरा है। यह भी जानें कि सुझाए गए इलाज से यह खतरा कितना कम हो सकता है।
कुछ अध्ययनों में कैंसर दोबारा होने के जो आंकड़े दिए जाते हैं, वे सभी मरीजों पर लागू नहीं होते। उदाहरण के लिए, मरीजों की जानकारी के लिए उपलब्ध शोध के अनुसार, हार्मोन रिसेप्टर-पॉजिटिव और एचईआर2-नेगेटिव शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर वाली लगभग छह में से एक महिला में सहायक हार्मोन थेरेपी लेने के बावजूद चार वर्षों के भीतर कैंसर दोबारा हो सकता है। यह आंकड़ा केवल मरीजों के उस विशेष समूह से जुड़ा है। इसका मतलब यह नहीं कि हर महिला में इतना ही खतरा होगा।
अपना व्यक्तिगत जोखिम समझने का उद्देश्य डरना नहीं, बल्कि यह जानना है कि डॉक्टर किसी खास इलाज की सलाह क्यों दे रहे हैं और उससे क्या लाभ मिलने की उम्मीद है।
इलाज के हर विकल्प से मुझे क्या फायदा होगा? : शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और शरीर में असर करने वाली अन्य दवाओं की अलग-अलग भूमिका होती है। हर मरीज को सभी तरह के इलाज की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर कैंसर की स्थिति और मरीज की सेहत के अनुसार उपचार तय करते हैं। जब डॉक्टर किसी इलाज की सलाह दें, तो पूछें कि उसका मुख्य उद्देश्य क्या है। क्या इससे ट्यूमर हटाया जाएगा, उसी जगह कैंसर दोबारा होने का खतरा कम होगा या शरीर के दूसरे हिस्सों में कैंसर लौटने की आशंका घटेगी?
यह भी जानें कि मौजूदा इलाज के साथ कोई अतिरिक्त उपचार लेने से कितना फायदा हो सकता है। यदि वह उपचार न लिया जाए तो क्या असर पड़ेगा? क्या आपके लिए उतने ही प्रभावी दूसरे विकल्प उपलब्ध हैं? जहां संभव हो, डॉक्टर से इलाज का फायदा वास्तविक आंकड़ों में समझाने को कहें। कई बार जोखिम में प्रतिशत के हिसाब से बड़ी कमी बताई जाती है, लेकिन मरीज को वास्तव में कितना लाभ होगा, यह उसके व्यक्तिगत जोखिम पर निर्भर करता है। दोनों बातों को समझने से सही फैसला लेना आसान होता है।
इलाज के दुष्प्रभाव मेरी रोजमर्रा की जिंदगी को कैसे प्रभावित करेंगे? : ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के साथ महिलाओं को नौकरी, बच्चों की देखभाल, परिवार, आर्थिक जिम्मेदारियां और निजी जरूरतें भी संभालनी पड़ सकती हैं। ऐसे में इलाज के दुष्प्रभाव उनकी दिनचर्या को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकते हैं। कुछ मरीजों को इलाज के दौरान थकान, जोड़ों में दर्द, नींद की परेशानी, मतली और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। इलाज के तरीके के अनुसार कुछ अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं, जो उपचार खत्म होने के बाद भी बनी रह सकती हैं।
डॉक्टर से पूछें कि आपके इलाज में कौन-से दुष्प्रभाव होने की आशंका है, उनसे कैसे निपटा जा सकता है और क्या उनका लंबे समय तक असर रह सकता है। यदि आपको भविष्य में मां बनने, मेनोपॉज, यौन स्वास्थ्य या दोबारा काम पर लौटने को लेकर चिंता है, तो शुरुआत में ही डॉक्टर से बात करें, ताकि इलाज की योजना बनाते समय इन बातों का ध्यान रखा जा सके। इन समस्याओं को कम करने के लिए डॉक्टर सहायक उपचार, दवाएं, खानपान संबंधी सलाह, शारीरिक गतिविधियां या काउंसलिंग सुझा सकते हैं। जरूरी है कि किसी भी परेशानी को चुपचाप सहने के बजाय डॉक्टर को उसके बारे में बताएं।
क्या मेरे लिए इलाज के नए और बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं? : ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में लगातार नई तकनीक और दवाएं विकसित हो रही हैं। अब इलाज तय करते समय ट्यूमर की जैविक विशेषताओं और कैंसर दोबारा होने के व्यक्तिगत जोखिम पर अधिक ध्यान दिया जाता है। बीमारी की स्थिति के अनुसार कुछ मरीजों को टारगेटेड थेरेपी या लंबे समय तक चलने वाले अतिरिक्त उपचार से फायदा मिल सकता है। इनका उद्देश्य कैंसर लौटने की आशंका कम करना है।
डॉक्टर से यह भी चर्चा करें कि कौन-सा इलाज आपकी दिनचर्या, जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत लक्ष्यों के अनुरूप रहेगा। इससे आप इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकेंगी और अपनी जरूरतों के अनुसार सही विकल्प चुन पाएंगी। इससे इलाज के दौरान जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
डॉक्टर से सिर्फ सलाह न लें, खुलकर बातचीत भी करें : यह जरूरी नहीं कि आपको इलाज से जुड़ी हर मेडिकल जानकारी याद रहे या सभी फैसले एक साथ लेने पड़ें। डॉक्टर से मिलने से पहले अपने सवाल लिख लें। मुलाकात के दौरान जरूरी बातें नोट करें और जरूरत महसूस हो तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति को साथ ले जाएं।
सबसे महत्वपूर्ण है कि डॉक्टर को अपनी प्राथमिकताओं और चिंताओं के बारे में बताएं। कैंसर दोबारा होने का खतरा, इलाज से मिलने वाले फायदे और रोजमर्रा की जिंदगी पर उसके असर को समझकर आप डॉक्टर के साथ मिलकर बेहतर फैसला ले सकती हैं। उद्देश्य ऐसा इलाज चुनना है, जो बीमारी को नियंत्रित करने के साथ आपकी भविष्य की सेहत और जीवन की गुणवत्ता का भी ध्यान रखे।