
9 बार नाकामी,बैंक खाते में बचे सिर्फ ₹7,000 और उधार के पैसे; जानिए कैसे एक छोटे शहर के युवा नेखड़ा किया भारत का सबसे बड़ा इन्फ्लुएंसर नेटवर्क”
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ -तुम्हारा शहर तुम्हें आगे बढ़ने से रोक देगा।” यह एक ऐसा जुमला है जो भारत के छोटे शहरोंमें रहने वाले हर सपने देखने वाले युवा को अक्सर सुनने को मिलता है। लेकिन राजस्थान के भीलवाड़ा से ताल्लुक रखने वाले अभिषेक व्यास ने इस सोच को कभी अपने सपनों पर हावी नहीं होने दिया। छोटे शहरों के युवाओं में एक खास किस्म की भूख होती है—अपनी पहचानबनाने की जिद, एक बेचैनी और ज़मीन से जुड़ी मेहनत। उसी जुनून के दम पर अभिषेक ने नकेवल अपनी किस्मत बदली, बल्कि भारतीय स्टार्टअप जगत की बनी-बनाई धारणाओं को भी ध्वस्तकर दिया।
आज ‘माय हॉलस्टोर’ के संस्थापक और सीईओ अभिषेक व्यास की गिनती देश के सफल युवाउद्यमियों में होती है, लेकिन यह मुकाम उन्हें थाली में सजाकर नहीं मिला। इस सफलता के पीछे 9 असफल बिज़नेस का कड़वा अनुभव और सालों का कड़ा संघर्ष छिपा है। साल 2020में, जब पूरा देश वैश्विक महामारी के संकट से जूझ रहा था,अभिषेक ने एक ऐसा जोखिम उठाया जिसने सब बदल दिया। उस वक्त उनके पास अपने बैंक खाते में महज ₹7,000 बचे थे और बिज़नेस शुरू करने के लिए उन्होंने ₹1.82 लाख का कर्ज लिया था। कागजों पर यह बिज़नेस शुरू करनेका सबसे खराब दौर था, लेकिन उनकी दूरदर्शिता ने इसे सबसे सही फैसला साबित कर दिखाया।
अभिषेक ने उस सच्चाई को पहचाना जिसे बड़े-बड़े शहरों की मार्केटिंग एजेंसियां पूरी तरह नज़रअंदाज़कर रही थीं। उन्होंने देखा कि भारत सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरोंतक सीमित नहीं है। यहाँ हर 50 किलोमीटर पर भाषा, संस्कृति और लोगों की पसंद बदल जातीहै। उन्होंने मेट्रो शहरों के गिने-चुने चर्चित चेहरों के पीछे भागने के बजाय देश के10,000 से अधिक पिन कोड्स में फैले क्षेत्रीय क्रिएटर्स पर दांव लगाया। नतीजा यह हुआकि आज ‘माय हॉल स्टोर’ 1,00,000 से अधिक क्षेत्रीय इन्फ्लुएंसर्स का विशाल नेटवर्कबन चुका है, जिससे अमेज़न, मिंत्रा और मामाअर्थ जैसे 1,500 से ज्यादा दिग्गज ब्रांड्सजुड़े हुए हैं।
सफलता के इस मुकाम पर पहुँच कर भी अभिषेक अपनी जड़ों को नहीं भूले। उन्होंने महसूस किया कि छोटेशहरों (टायर-2 और टायर-3) से आने वाले पहली पीढ़ी के संस्थापकों को मार्गदर्शन देनेवाला या उनकी आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं है। इसी कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने’द फाउंडर्स ड्रीम’ और ‘द पावरफुल ह्यूमन्स’ जैसे बेहद लोकप्रिय पॉडकास्ट की शुरुआतकी, ताकि भीलवाड़ा, जोधपुर या इंदौर में बैठकर सपने देखने वाले किसी भी युवा को यहन लगे कि वह इस लड़ाई में अकेला है।अभिषेक का स्पष्टमानना है कि उनकी यह यात्रा किसी बड़े कॉलेज की डिग्री, पारिवारिक रसूख या भारी-भरकमफंडिंग का नतीजा नहीं है, बल्कि यह इस बात का जिंदा सबूत है कि सही रणनीति और निरंतरप्रयास हमेशा विशेषाधिकारों पर भारी पड़ते हैं।
उनका लक्ष्य किसी कंपनी का वैल्यूएशनबढ़ाना नहीं, बल्कि 1,000 लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। भीलवाड़ा कीगलियों से शुरू हुआ यह सफर आज देश के हर उस युवा को यह हिम्मत दे रहा है कि आपका जन्मकहाँ हुआ है, यह कभी तय नहीं कर सकता कि आप कितनी ऊँची उड़ान भरेंगे।



