
दिव्यराष्ट्र के लिए बाल मुकुन्द ओझा
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख डॉ मोहन भागवत ने एक बार फिर विदेशी षड्यंत्रों, देश को कमजोर करने वाली ताकतों और साजिशकर्ताओं से देशवासियों को सतर्क किया है। डॉ मोहन भागवत ने विजयादशमी समारोह में नागपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा सरकार बदलने से देश की समस्याएं हल नहीं हो जातीं। नेपाल-बांग्लादेश इसके उदाहरण हैं। डॉ भागवत ने कहा कि सत्ता परिवर्तन के लिए किए जाने वाले आंदोलन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं करते। उन्होंने आगाह किया कि ऐसे विरोध-प्रदर्शन समाधान देने के बजाय राजनीतिक हितों का जरिया बन सकते हैं और समाज में विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि अपने स्वार्थ साधने वाली ताकतें राजनीतिक हालात बदलने के लिए सत्ता परिवर्तन का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन इससे शायद ही कभी मनचाहे नतीजे मिलते हैं। उन्होंने कहा लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन होना स्वाभाविक है, लेकिन विरोध-प्रदर्शन का उद्देश्य क्या होना चाहिए? इनका मकसद समाधान खोजना होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब विरोध-प्रदर्शन जनहित के बजाय अन्य उद्देश्यों से प्रेरित होते हैं, तो वो राजनीतिक हथियार बन सकते हैं। इससे किसी व्यक्ति, समूह या विचारधारा के प्रति नफरत और दुश्मनी पैदा हो सकती है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने विजयादशमी के दिन 1925 में की थी। यह विश्व का सबसे विशाल संगठन है। समाज के हर क्षेत्र में संघ की प्रेरणा से विभिन्न संगठन चल रहे हैं जो राष्ट्र निर्माण तथा हिंदू समाज को संगठित करने में अपना योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में देश के 852 जिलों में 4,886 शाखाएं और 1,173 मिलन चल रहे हैं।
आज़ादी के बाद से ही देश और दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लगातार विवादों में घसीटने का प्रयास किया जाता रहा है। कई बार प्रतिबन्ध की मार झेल चुका संघ विवाद खड़े करने के बावजूद आगे बढ़ता रहा। आज भी गाहे बगाहे हर काम में संघ का नाम लेना एक फैशन हो गया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी सहित कुछ नेता हर काम में संघ का नाम जपते है। मोदी सरकार के हर काम के पीछे संघ का हाथ होने का आरोप लगाते है जबकि संघ का कहना है वह एक सांस्कृतिक संगठन है। उसकी विचारधारा भाजपा से मेल खाती है और कुछ स्वयंसेवक संघ भाजपा में सक्रीय है। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की जुबान पर हर समय संघ का नाम रहता है। केजरीवाल भी संघ का नाम हर कार्य में घसीटते है। कुछ अन्य पार्टियां भी संघ पर आरोप लगाते नहीं थकते। देश में जहाँ कहीं भी कोई विवाद या दंगा होता है उसमें संघ का हाथ होने का आरोप भी लगाया जाता है मगर यह आजतक प्रमाणित नहीं हुआ है। भाजपा के सत्ता में आने के बाद संघ आगे बढ़ता ही गया है इसमें कोई दो राय नहीं है।
यह सर्वविदित है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के मुंह से निकले शब्द स्वयं सेवकों के लिए प्राण वायु का संचार करते है। देश के लाखों स्वयंसेवक प्रतिदिन प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपने सर्वप्रिय नेता के वक्तव्यों का बेसब्री से इंतज़ार करते है और फिर उन्हें आधार बनाकर अपना रोजमर्रा का कार्य शुरू करते है। जनता को संघ के कार्यों का सन्देश देते है। इस दौरान लाखों प्रचारक जनसाधारण को संघ की रीति नीति और कार्यप्रणाली से अवगत करते है। बिना तड़क भड़क और ताम झाम के जनता से सीधा जुड़ाव का उनका कार्य लोग पसंद करते है। लोगों के सुख दुःख में हाथ बंटाने के कारण संघ के लोग शीघ्र जनता में घुल मिल जाते है। देश में अनेक विपदाओं के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं ने समाज सेवा की अनूठी मिसाल कायम की, यह किसी से छिपा नहीं है। संघ अपने विलक्षण सेवाभावी और रचनातमक कार्यों के लिए देश और दुनिया में ख्यात है। देश में हर संकट और विपदा के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं को सेवा करते देखा जा सकता है। संघ के अनुसार समाज में देशभक्त, अनुशासित, चरित्रवान और निःस्वार्थ भाव से काम करने वाले लोगों की आवश्यकता रहती है। संघ ऐसे लोगों को तैयार कर संगठित करने का कार्य करता है। उनमें देशभक्ति की भावना जगाता है। संघ का कहना है कि संघ समाज में एक संगठन ना बनाकर सम्पूर्ण समाज को ही संगठित करने का प्रयास करता है। संघ के सेवा कार्यों की एक लम्बी फेहरिस्त है। संघ के बेहतरीन कामों की खूब प्रशंसा भी हुई है।




