
जयपुर, दिव्यराष्ट्र: बढ़ता वायु प्रदूषण हर उम्र के लोगों की सेहत को प्रभावित कर रहा है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। डॉ. पंखुड़ी गौतम, सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर ने बताया कि, हवा में मौजूद बारीक प्रदूषित कण (पीएम 2.5 और पीएम 10) सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर मां और गर्भस्थ शिशु की सेहत पर असर डाल सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से समय से पहले डिलीवरी, शिशु का जन्म के समय कम वजन और उसके विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा मां को सांस संबंधी परेशानियां और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है।
डॉ. पंखुड़ी गौतम के अनुसार, प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर घर से बाहर निकलने से बचें। सुबह और शाम के समय खुले स्थानों पर टहलने या व्यायाम करने के बजाय घर के अंदर हल्की शारीरिक गतिविधियां करें। बाहर जाना जरूरी हो तो एन-95 मास्क पहनें। घर की खिड़कियां और दरवाजे प्रदूषण अधिक होने पर बंद रखें। घर के अंदर धूम्रपान, अगरबत्ती, कपूर और चूल्हे से निकलने वाले धुएं से दूरी बनाएं। पर्याप्त पानी पिएं और पौष्टिक भोजन लें। सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी या सीने में जकड़न होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। नियमित प्रेगनेंसी चेकअप भी न छोड़ें। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण से पूरी तरह बचना संभव नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर इसके संपर्क को कम किया जा सकता है। इससे मां और शिशु दोनों की सेहत सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।





