देशप्रिय पार्क और बादामतला अशर संघ में सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ पश्चिम बंगाल में अपनी प्रमुख पहल
कोलकाता, दिव्यराष्ट्र:/ एडल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड ने अपने प्रमुख ब्रांड फॉर्च्यून के माध्यम से एक बार फिर दुर्गा पूजा के अवसर पर व्यापक अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और त्योहार की उमंग का जश्न मनाना है। फॉर्च्यून हर साल त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं से जुड़ने के लिए खास पहल करता है। इस वर्ष भी ब्रांड ने कोलकाता और पश्चिम बंगाल में कई आकर्षक गतिविधियों, उपभोक्ताओं से जुड़ने के कार्यक्रमों और सामुदायिक पहलों की शुरुआत की है। इस साल के उत्सव का प्रमुख आकर्षण देशप्रिय पार्क में बनाई गई भव्य राजबाड़ी शैली की कलाकृति है। इसके माध्यम से बंगाल के ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित कुलीन परिवारों के पारंपरिक घरों यानी ‘बोनेदी बाड़ी’ की भव्यता को दर्शाया गया है। इस अनूठी स्थापत्य कलाकृति को तैयार करने में फॉर्च्यून के 3,000 से अधिक जार और उत्पाद पैक का इस्तेमाल किया गया है। विरासत को दर्शाने वाली इस पहल के साथ फॉर्च्यून ने अनूठी फूड आर्ट भी पेश की है। वहीं, # पूजो टीमिएटकोरी अभियान के जरिए लोगों की व्यक्तिगत पूजा परंपराओं को सामने लाने और # फॉर्चून सोबरपूजो पहल के माध्यम से जरूरतमंद समुदायों तक त्योहार की खुशियां पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस कलाकृति को साकार करने के लिए फॉर्च्यून ने बंगाल के एक प्रसिद्ध कलाकार और कुशल कारीगरों की टीम के साथ साझेदारी की है। टीम ने पारंपरिक राजबाड़ियों की बारीक स्थापत्य विशेषताओं को दोबारा जीवंत किया है। यह इंस्टॉलेशन आगंतुकों को बंगाल के ऐतिहासिक घरों की भव्यता और उनसे जुड़ी यादों का अनुभव करने का अवसर देता है। साथ ही, यह भी दर्शाता है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले घरेलू उत्पादों के जरिए कला और कहानियों को किस तरह अभिव्यक्त किया जा सकता है।
कला और परंपरा के इस उत्सव को आगे बढ़ाते हुए फॉर्च्यून ने बादामतला अशर संघ में एक अनूठी म्यूरल टनल यानी भित्तिचित्र सुरंग तैयार की है। इसमें कलाकारों ने चावल, दाल, पोहा और सोया नगेट्स जैसी रोजमर्रा की खाद्य सामग्रियों का इस्तेमाल कर दुर्गा पूजा से जुड़ी कई प्रिय परंपराओं को दर्शाया है। इन चित्रों में सुबह-सुबह महालया सुनने, कोलाबौ स्नान, अष्टमी की अंजलि, भोग और सिंदूर खेला जैसे बंगाली परिवारों के परिचित दृश्य शामिल हैं। इन कलाकृतियों के माध्यम से फॉर्च्यून ने भोजन, परिवार और त्योहारों के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया है। साथ ही, रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों को बंगाल की सांस्कृतिक पहचान की अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया है।
इस पहल पर टिप्पणी करते हुए एडल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड के सेल्स एंड मार्केटिंग के संयुक्त अध्यक्ष मुकेश मिश्रा ने कहा, “पश्चिम बंगाल फॉर्च्यून के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्केट है और हम पूरे राज्य में अपने उपभोक्ताओं से जुड़ने के सार्थक मौके तलाशते रहते हैं। दुर्गा पूजा जैसे पारंपरिक त्योहार हमें उपभोक्ताओं के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने का अनूठा अवसर देते हैं। पीढ़ियों से भोजन त्योहारों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामूहिक अनुभवों का अभिन्न हिस्सा रहा है। देशप्रिय पार्क और बादामतला अशर संघ में अपनी पहलों के जरिए हमने कला के माध्यम से बंगाल की समृद्ध स्थापत्य विरासत और त्योहारों की परंपराओं को जीवंत करते हुए इस स्थायी संबंध का सम्मान करने का प्रयास किया है।
“इसके साथ ही, # फॉर्च्यून सोबरपूजो पहल के जरिए हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि त्योहार की खुशियां उन लोगों तक भी पहुंचें, जो किसी कारणवश उत्सव में पूरी तरह शामिल नहीं हो पाते। फॉर्च्यून में हमारा प्रयास रोजमर्रा के खाना पकाने का हिस्सा बने रहने से आगे बढ़कर उन परंपराओं, अनुभवों और खास पलों के माध्यम से उपभोक्ताओं के साथ सार्थक संबंध बनाना है, जो लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं।”
परंपराओं के इस उत्सव को आगे बढ़ाते हुए फॉर्च्यून अपने त्योहार आधारित उपभोक्ता अभियान # पूजो टीमिएटकोरी के जरिए ‘हर रस्म दुर्गा पूजा की खुशियों में कुछ और जोड़ती है’ के विचार को सामने ला रहा है। यह अभियान इस सोच पर आधारित है कि दुर्गा पूजा भले ही सभी मनाते हैं, लेकिन हर व्यक्ति इसे अपने अलग अंदाज में अनुभव करता है। अभियान में महालया के दिन सुबह जल्दी उठने, नए कपड़े पहनने, पसंदीदा पूजा पंडालों में जाने और त्योहार के खास पकवानों का आनंद लेने जैसी व्यक्तिगत परंपराओं को महत्व दिया गया है।
पूजो टीमिएटकोरी प्रतियोगिता के जरिए फॉर्च्यून उपभोक्ताओं को अपनी प्रिय पूजा परंपराएं साझा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसका उद्देश्य उन अनूठी आदतों, यादों और अनुभवों का उत्सव मनाना है, जो पीढ़ियों को जोड़ते हैं और हर व्यक्ति के लिए दुर्गा पूजा को खास बनाते हैं।
समुदायों के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत करने के लिए फॉर्च्यून अपनी प्रमुख पहल # फॉर्चून सोबर पूजो का विस्तार करने की तैयारी में है। यह पहल इस विश्वास पर आधारित है कि दुर्गा पूजा की खुशियों का अनुभव हर व्यक्ति को मिलना चाहिए। इसके तहत उन लोगों तक त्योहार का उत्सव पहुंचाने का प्रयास किया जाता है, जो अधिक उम्र, आर्थिक कठिनाइयों, शारीरिक सीमाओं या सामाजिक अलगाव के कारण समारोहों में पूरी तरह शामिल नहीं हो पाते।
इस वर्ष फॉर्च्यून इस पहल का विस्तार कोलकाता से आगे आसनसोल और दुर्गापुर तक करने की योजना बना रहा है। इसके माध्यम से पश्चिम बंगाल के अनाथालयों में रहने वाले बच्चों और वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों सहित 3,000 से अधिक लोगों तक सीधे पहुंचने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का लक्ष्य है।
इन पहलों के साथ फॉर्च्यून ने कोलकाता में बड़े आकार के आउटडोर विज्ञापनों के जरिए भी अपनी उपस्थिति मजबूत की है। शहर के दो व्यस्ततम



