
दिव्यराष्ट्र, जयपुर: युवा भारतीय अपने कदमों की संख्या, नींद और व्यायाम पर नज़र रखते हैं। फिर भी, उनमें से कई लोग अपने हृदय स्वास्थ्य से जुड़े कुछ सबसे बुनियादी संकेतकों से अनजान हो सकते हैं। इस विश्व हृदय दिवस पर, हृदय चिकित्सा की दिशा में कार्यरत प्रमुख बहुविशेषता अस्पताल इटरनल अस्पताल ने दिलकीरिपोर्टकार्ड नामक सार्वजनिक जागरूकता अभियान शुरू किया है। डॉ. अजीत बाना के नेतृत्व में यह अभियान युवा भारतीयों को अपने हृदय स्वास्थ्य से जुड़े रोज़मर्रा के संकेतकों को जानने, समझने और उन पर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
इटरनल अस्पताल के हृदय विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजीत बाना ने कहा सबसे चिंताजनक बदलावों में से एक यह है कि अब हृदयाघात की चर्चा 20, 30 और 40 वर्ष की आयु के लोगों के संदर्भ में भी तेजी से होने लगी है। कोई युवा व्यक्ति नियमित रूप से व्यायाम कर सकता है, दौड़ सकता है, खेल सकता है या घंटों व्यायामशाला में बिता सकता है और फिर भी उसके भीतर हृदय–रक्तवाहिका संबंधी जोखिम हो सकता है। शारीरिक रूप से स्वस्थ होना और स्वस्थ हृदय होना एक–दूसरे से जुड़े हैं, लेकिन दोनों एक ही बात नहीं हैं। रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, रक्त शर्करा, पारिवारिक इतिहास और धूम्रपान का इतिहास ऐसे जोखिमों को सामने ला सकते हैं, जिन्हें केवल शारीरिक स्वास्थ्य देखकर समझ पाना संभव नहीं है। दिलकीरिपोर्टकार्ड का उद्देश्य युवाओं को इन सवालों पर विचार करने के लिए प्रेरित करना है, इससे पहले कि हृदय संबंधी कोई घटना उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर करे। डॉ. बाना ने आगे कहा हृदय स्वास्थ्य पर बातचीत किसी व्यक्ति के अस्पताल पहुंचने से बहुत पहले शुरू हो जानी चाहिए। दिलकीरिपोर्टकार्ड लोगों को एक सरल तरीका देता है, जिससे वे रुककर अपने पास पहले से मौजूद स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को देख सकें, यह पहचान सकें कि उन्हें किन चीज़ों की जांच करानी है और अपने चिकित्सक से बातचीत शुरू कर सकें। इस जागरूकता को अपने आसपास के लोगों तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से उन युवाओं तक, जो यह मान सकते हैं कि उनकी उम्र या शारीरिक स्वास्थ्य उन्हें हृदय रोग से जुड़ी चर्चा से बाहर रखता है।
अधिक जागरूकता की आवश्यकता इस तथ्य से सामने आती है कि भारतीयों में हृदय–रक्तवाहिका रोग कम उम्र में होने की प्रवृत्ति अच्छी तरह दर्ज की गई है। युवा भारतीयों पर किए गए शोध में बताया गया है कि हृदय–रक्तवाहिका रोग से होने वाली 50 प्रतिशत से अधिक मृत्यु 50 वर्ष की आयु से पहले होती है। कम उम्र की आबादी में धूम्रपान, रक्त में वसा की असामान्य मात्रा और उच्च रक्तचाप हृदय–रक्तवाहिका रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। भारतीय वयस्कों पर वर्ष 2025 में किए गए एक व्यवस्थित समीक्षा और समग्र विश्लेषण में भी हृदय–रक्तवाहिका रोग की संयुक्त व्यापकता लगभग 11 प्रतिशत आंकी गई, जो देश में इस रोग के महत्वपूर्ण बोझ को दर्शाती है।
“आपके हृदय को भी एक रिपोर्ट कार्ड चाहिए” विचार पर आधारित दिलकीरिपोर्टकार्ड अभियान रोज़मर्रा की बातचीत में हृदय–रक्तवाहिका स्वास्थ्य को व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ता है। इसका विशेष ध्यान युवा भारतीयों पर है, जो हृदय रोग को मुख्य रूप से अधिक उम्र से जुड़ी समस्या मानते हैं।
अभियान के केंद्र में पांच बिंदुओं वाला एक सरल हृदय स्वास्थ्य परीक्षण है, जिसमें रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, रक्त शर्करा, पारिवारिक चिकित्सकीय इतिहास और धूम्रपान की आदतों को शामिल किया गया है। अभियान “अपने 90 को जानें” पहल भी शुरू करता है, जिसके तहत लोगों को एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने और यह जानने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है कि इसका स्तर 90 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम है या नहीं। इसके साथ व्यक्ति के हृदय–रक्तवाहिका जोखिम को समझने पर भी जोर दिया गया है। अभियान लोगों को अपने चिकित्सक से एलडीएल के उपयुक्त लक्ष्य स्तर के बारे में चर्चा करने के लिए प्रेरित करता है, क्योंकि अनुशंसित स्तर व्यक्ति के हृदय–रक्तवाहिका जोखिम के आधार पर अलग–अलग हो सकते हैं।
अभियान की शुरुआत एक मुख्य वीडियो से होती है, जिसमें 26 वर्षीय एक मरीज की कहानी दिखाई गई है। वह नियमित रूप से व्यायाम करता था, संतुलित भोजन करता था और शारीरिक रूप से स्वस्थ दिखाई देता था, लेकिन लगातार धूम्रपान भी करता था। उसका अनुभव अभियान के मुख्य संदेश को सामने लाता है: केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ होना हृदय–रक्तवाहिका स्वास्थ्य की पूरी तस्वीर नहीं देता।
अभियान ऐसे लक्षणों पर भी ध्यान आकर्षित करता है, जिन्हें अक्सर तनाव, अम्लता, थकान या कम शारीरिक क्षमता समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। इनमें असामान्य रूप से सांस फूलना, शारीरिक क्षमता में कमी, सीने में असहजता, बांह, कंधे, पीठ या जबड़े में दर्द, बिना स्पष्ट कारण थकान, पसीना आना, जी मिचलाना और बार–बार हृदय की धड़कन तेज होना शामिल हैं।
दिलकीरिपोर्टकार्ड के माध्यम से इटरनल अस्पताल और डॉ. अजीत बाना का उद्देश्य युवा भारतीयों के रोज़मर्रा के स्वास्थ्य एजेंडे में हृदय स्वास्थ्य को शामिल करना है, ताकि हृदय–रक्तवाहिका स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लोगों के व्यायाम, स्वस्थ जीवनशैली और रोगों की रोकथाम से जुड़े दृष्टिकोण का हिस्सा बन सके।

