
तकनीक के सहयोग से कैंसर उपचार में नए आयाम
जयपुर, दिव्यराष्ट्र/ जब भी सिर और गर्दन के कैंसर की बात होती है, तो सबसे पहले तंबाकू और शराब का ज़िक्र आता है। लेकिन आज तस्वीर पहले जैसी नहीं रही। अब ऐसे कई मरीज भी इस बीमारी के साथ अस्पताल पहुँच रहे हैं, जिन्होंने कभी तंबाकू या सिगरेट का सेवन नहीं किया।
डॉ. दीपांशु गुर्नानी, सीनियर कंसल्टेंट – , ईएनटी, हेड एंड नेक सर्जरी नारायणा हॉस्पिटल जयपुर बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में सिर और गर्दन के कैंसर के कारणों और मरीजों की प्रोफाइल में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब ऐसे मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है, जिनमें पारंपरिक जोखिम कारक मौजूद नहीं होते।
उधर, उपचार के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है। पहले इस तरह के कैंसर का नाम सुनते ही लोगों के मन में आवाज़ चले जाने, चेहरे की बनावट बदल जाने या सामान्य जीवन न जी पाने का डर बैठ जाता था। लेकिन आधुनिक तकनीकों ने इस सोच को काफी हद तक बदल दिया है। आज समय पर पहचान होने पर तकनीक के सहयोग से मरीज की आवाज़, चेहरा और निगलने जैसी सामान्य क्षमताएँ सुरक्षित रखी जा सकती हैं।
*अब सिर्फ तंबाकू नहीं, एचपीवी भी बन रहा है बड़ा कारण**
मुंह और गले के कैंसर के मामलों में अब ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) भी एक महत्वपूर्ण कारण बनकर सामने आया है। यह वही वायरस है जिसे पहले मुख्य रूप से सर्वाइकल कैंसर से जोड़ा जाता था। एचपीवी से होने वाला गले का कैंसर अपेक्षाकृत कम उम्र के लोगों और धूम्रपान न करने वालों में भी देखा जा रहा है। अच्छी बात यह है कि ऐसे कई मामलों में आधुनिक रेडिएशन और दवाओं का असर बेहतर होता है, जिससे उपचार के सफल होने की संभावना भी अधिक रहती है।
*शुरुआती संकेत बिल्कुल नज़रअंदाज़ न करें**
सिर और गर्दन के कैंसर की शुरुआत हमेशा किसी बड़े घाव या तेज़ दर्द से नहीं होती। कई बार इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें मामूली परेशानी समझकर टाल देते हैं।
* कान में लगातार दर्द, जबकि कोई कान का संक्रमण न हो।
* आवाज़ में भारीपन या बदलाव, जो 2–3 सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे।
* खाना निगलते समय दर्द या गले में कुछ फंसा होने जैसा अहसास।
* मुंह का ऐसा छाला या घाव, जो दो सप्ताह बाद भी ठीक न हो।
डॉ. गुर्नानी के अनुसार, यदि इनमें से कोई भी लक्षण लगातार दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो बिना देरी किए ई एनटी विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर इलाज अधिक प्रभावी और कम जटिल हो सकता है।
अब उपचार का अर्थ केवल कैंसर हटाना नहीं, जीवन की गुणवत्ता बचाना भी है
कुछ साल पहले तक सिर और गर्दन के कैंसर की सर्जरी का मतलब बड़े चीरे, चेहरे में बदलाव या आवाज़ खोने का खतरा माना जाता था। लेकिन अब डॉक्टर उपचार के साथ-साथ मरीज के सामान्य जीवन और उसकी जीवन-गुणवत्ता को भी सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान देते हैं।
*ट्रांसओरल रोबोटिक सर्जरी**
इस तकनीक में बिना चेहरे या गर्दन पर बाहरी चीरा लगाए, मुंह के रास्ते रोबोटिक तकनीक की मदद से ट्यूमर निकाला जा सकता है। इससे दर्द कम होता है और रिकवरी भी तेज़ होती है।
*वॉइस प्रिजर्वेशन थेरेपी**
कई मरीजों में आधुनिक रेडिएशन और कीमोथेरेपी के सही संयोजन से कैंसर का इलाज करते हुए आवाज़ को सुरक्षित रखा जा सकता है।
*माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्शन**
यदि सर्जरी के दौरान किसी हिस्से को निकालना आवश्यक हो, तो शरीर के दूसरे भाग से ऊतक और रक्त वाहिकाओं की सहायता से उसका पुनर्निर्माण किया जाता है। इससे मरीज के चेहरे की बनावट और कार्यक्षमता काफी हद तक सामान्य बनी रहती है।
*एआई भी निभा रहा है अहम भूमिका**
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब कैंसर के इलाज में भी डॉक्टरों की मदद कर रहा है। इसकी सहायता से ट्यूमर की अधिक सटीक पहचान और मैपिंग की जा सकती है। एआई-आधारित रेडिएशन प्लानिंग से किरणें मुख्य रूप से ट्यूमर पर केंद्रित रहती हैं, जिससे आसपास के स्वस्थ ऊतकों, नसों और लार बनाने वाली ग्रंथियों को कम नुकसान पहुँचता है। इससे इलाज अधिक प्रभावी होने के साथ-साथ अधिक सुरक्षित भी बनता है।
डॉ. गुर्नानी का कहना है कि आधुनिक सर्जिकल तकनीकों, उन्नत रेडिएशन, एआई-आधारित उपचार योजना और मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम के सहयोग से आज कई मरीज न केवल कैंसर से सफलतापूर्वक उबर रहे हैं, बल्कि अपनी आवाज़, चेहरे की सामान्य बनावट और जीवन की गुणवत्ता भी पहले की तुलना में बेहतर ढंग से बनाए रख पा रहे हैं।
*समय पर पहचान सबसे बड़ी सुरक्षा है**
आज सिर और गर्दन का कैंसर पहले की तरह डराने वाली बीमारी नहीं रह गया है। यदि इसका पता शुरुआती स्टेज में चल जाए, तो उपचार के सफल होने की संभावना काफी अधिक होती है। इसलिए यदि गले, मुंह या कान से जुड़ी कोई भी असामान्य परेशानी दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, तो उसे हल्के में न लें।
समय पर जांच और सही उपचार न केवल जीवन बचा सकता है, बल्कि आपकी आवाज़, मुस्कान और आत्मविश्वास को भी बरकरार रख सकता है।



