
कोकून हॉस्पिटल की एडवाइजरी
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ प्रेग्नेंसी के दौरान पेट में खुजली होना एक आम समस्या है। यदि खुजली लगातार बनी रहे या बहुत अधिक हो जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे शिशु का विकास होता है, त्वचा में खिंचाव, हार्मोनल बदलाव और रूखेपन के कारण खुजली हो सकती है। इसके लिए नियमित रूप से खुशबू रहित मॉइस्चराइज़र लगाने, ठंडी सिकाई करने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, सूती व ढीले-ढाले कपड़े पहनने तथा बहुत गर्म पानी के बजाय हल्के गुनगुने पानी से स्नान करने जैसी साधारण सावधानियों से राहत मिल सकती है।
डॉ. हिमानी शर्मा, क्लिनिकल हेड एंड सीनियर कंसल्टेंट – आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर ने बताया कि यदि खुजली के साथ लाल चकत्ते, दाने या रैशेज दिखाई दें, रैशेज तेजी से फैलने लगें, खुजली इतनी बढ़ जाए कि नींद प्रभावित होने लगे, बिना किसी स्पष्ट दाने के भी लगातार खुजली हो, हाथों की हथेलियों और पैरों के तलवों तक खुजली पहुंच जाए या लक्षणों के कारण रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी होने लगे, तो तुरंत गाइनेकोलॉजिस्ट से परामर्श लें। यह इंट्राहेपेटिक कोलेस्टेसिस ऑफ प्रेग्नेंसी जैसी गंभीर लिवर संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है, जिससे मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी असामान्य लक्षण की जांच हमेशा किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जरूर करानी चाहिए। कुछ महिलाओं में पीयूपीपीपी (प्रायोटिक अर्टिकेरियल पॉपुलेस एंड प्लेक्स ऑफ प्रेग्नेंसी) नामक त्वचा संबंधी समस्या भी हो सकती है। यह आमतौर पर प्रेगनेंसी के अंतिम चरण में दिखाई देती है, प्रसव तक बढ़ सकती है और डिलीवरी के 1-2 सप्ताह के भीतर अपने आप ठीक हो जाती है। हालांकि, यह काफी असुविधाजनक हो सकती है, लेकिन आमतौर पर मां और शिशु के लिए हानिकारक नहीं होती।
प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी दवा, एंटी-एलर्जी टैबलेट या स्टेरॉयड क्रीम का उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह के न करें। यदि खुजली लगातार बनी रहे, बढ़ती जाए या उसके साथ कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं उपचार करने के बजाय तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से जांच कराएं। समय पर सही जांच और उपचार से मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखा जा सकता है।
