
जयपुर, दिव्यराष्ट्र: कुछ कहानियां यह विश्वास दिलाती हैं कि जिंदगी चाहे जितनी कठिन क्यों न हो, एक छोटा-सा मौका सब कुछ बदल सकता है। 28 वर्षीय इलक्किया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। भावनात्मक सहारे, अपनापन और आर्थिक आत्मनिर्भरता की उनकी तलाश को नई दिशा तब मिली, जब उन्होंने इंटरैक्ट ग्रुप के भारत के अग्रणी वॉयस-फर्स्ट सोशल डिस्कवरी प्लेटफॉर्म एफआरएनडी के बारे में जाना।
इलक्किया के लिए एफआरएनडी सिर्फ नए लोगों से मिलने का मंच नहीं बना, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का जरिया भी साबित हुआ। प्लेटफॉर्म से हुई आय की मदद से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। आज वे एक प्रैक्टिसिंग एडवोकेट हैं और अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी हैं। कभी खुद को पूरी तरह अकेला महसूस करने वाली इलक्किया आज एक नई जिंदगी जी रही हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि भरोसे, प्यार और दूसरी शुरुआत का सफर है।
जन्म लेते ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था। उनके पिता ही उनका पूरा संसार थे। लेकिन कोविड महामारी के दौरान जब उनके पिता का भी निधन हो गया, तो मानो उनके जीवन का आखिरी सहारा भी छिन गया। रिश्तेदारों के साथ रहते हुए उन्हें छत तो मिली, लेकिन अपनापन नहीं। आखिरकार उन्होंने अपने दम पर जिंदगी जीने का मुश्किल फैसला किया।
इलक्किया स्वभाव से बेहद संकोची थीं। लोगों से खुलकर बात करना उनके लिए आसान नहीं था, खासकर पुरुषों से। बार-बार अपनों को खोने के बाद किसी पर भरोसा करना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे ही एक दौर में सोशल मीडिया पर उनकी नजर एफआरएनडी के बारे में एक वीडियो पर पड़ी। उन्हें लगा कि शायद यहां कोई ऐसा सुरक्षित मंच मिल जाए, जहां कोई उन्हें परखे बिना उनकी बात सुने और वे बिना किसी झिझक के अपनी बात कह सकें। उन्होंने इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने का फैसला किया।
शुरुआत में उठाया गया यह छोटा-सा कदम जल्द ही न सिर्फ इलक्किया, बल्कि उनसे जुड़ने वाले कई लोगों की जिंदगी में भी बदलाव की वजह बन गया।




