नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि भारत को वर्ष 2030 तक 400 मिलियन टन से अधिक और 2047 तक लगभग 450 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन करना होगा। ऐसे में कृषि और उर्वरक क्षेत्र में तकनीक का बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग अब विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता बन गया है। वह हिमाचल प्रदेश के कुफरी स्थित स्टर्लिंग रिज़ॉर्ट में आयोजित एफएआई के चार दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “आईसीटी फॉर स्मार्ट फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट” के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। डॉ. चौधरी ने डिजिटल तकनीकों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि “ब्लॉकचेन उर्वरक क्षेत्र की लॉजिस्टिक्स और गवर्नेंस प्रणाली को पूरी तरह बदल सकता है। इससे बंदरगाह से लेकर किसान के खेत तक उर्वरकों की ट्रेसबिलिटी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि उत्पादन योजना, संयंत्रों में जोखिम प्रबंधन, सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन, रिमोट सेंसिंग, जीआईएस आधारित मृदा मानचित्रण, सैटेलाइट इमेजिंग और एआई आधारित सलाहकारी प्रणालियों में आईसीटी का उपयोग ऊर्जा दक्षता, नीति अनुपालन और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।“



