
मुंबई , दिव्यराष्ट्र/ स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले लोकप्रिय हिंदी टेलीविजन ड्रामा ‘उड़ने की आशा’ के हालिया एपिसोड में, दर्शकों ने में पीएंडजी शिक्षा को उजागर करने वाला एक प्रभावशाली क्षण देखा।
यह प्रस्तुति क्रिश नामक एक स्कूली छात्र की कहानी के माध्यम से सामने हुई, जो गांव में पढ़ने वाला एक युवा स्कूली छात्र है, और स्कूल द्वारा उसके पढ़ाई में पिछड़ने के बारे में चिंता जताई जाती है। जैसे ही रोशनी और सुप्रिया, क्रिश के पढ़ाई में पिछड़ने के बारे में बातचीत करती हैं, वैसे ही समस्या की जड़ सामने आती है- “सीखने का अंतर”, जहां बच्चा उच्च कक्षा में पढ़ता है लेकिन उसकी बुनियादी समझ निचले स्तर की होती है, यह एक ऐसी चुनौती है, जो कई बच्चों के सामने मौजूद है।
यह प्रसंग कहानी में बेहद स्वाभाविक तरीके से जुड़ता है। रोशनी के नजरिए से, यह बातचीत दर्शाती है कि सीखने का अंतर किस प्रकार बच्चे की शैक्षणिक प्रगति और आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता हैं, और कैसे समय पर मिला सहयोग इसे दूर कर सकता है।
इस एपिसोड में यह भी दिखाया गया है कि क्रिश के स्कूल में पीएंडजी शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है, जो यह रेखांकित करता है कि कैसे सुनियोजित और समय पर मिलने वाला सहयोग सीखने के परिणामों में सुधार कर सकता है और #EraseTheLearningGaps के लक्ष्य को साकार कर सकता है।
दो दशकों से अधिक समय से पीएंडजी शिक्षा भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहा है और 1 करोड़ से अधिक बच्चों की सीखने की यात्रा को निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है।
देश के अग्रणी मीडिया एवं मनोरंजन समूह जिओस्टार के साथ इस प्रकार के एकीकरण और सहयोग यह दर्शाते हैं कि लोकप्रिय मनोरंजन प्लेटफॉर्म, चाहे वे पारंपरिक टेलीविजन चैनल हों या जिओ हॉटस्टार , किस प्रकार उद्देश्य-प्रेरित कथाओं को कहानी में सहज रूप से पिरोकर शिक्षा और सीखने के अंतर जैसे विषयों पर संवाद को व्यापक बना सकते हैं, जिससे महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश स्वाभाविक और प्रभावी ढंग से बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच पाते हैं।





