
-तीर्थराज पुष्कर में 8 मार्च से 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ
पुष्कर दिव्यराष्ट्र*।
विश्वभर में बढ़ते युद्ध जैसे हालात, अंतरराष्ट्रीय तनाव और अस्थिरता के बीच भारत की आध्यात्मिक परंपरा से विश्व शांति के लिए एक बड़ी पहल होने जा रही है। तीर्थराज पुष्कर में 8 मार्च से 19 अप्रैल तक 43 दिवसीय “शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ” आयोजित किया जाएगा, जिसमें 3 करोड़ आहुतियां और 24 करोड़ गायत्री मंत्र जाप के माध्यम से वैश्विक संतुलन और शांति की कामना की जाएगी।
महा निर्माणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर महाराज के सानिध्य में होने वाले इस महायज्ञ की तैयारियां लगभग एक वर्ष पूर्व ही शुरू हो गई थीं। स्वामी प्रखर जी महाराज ने वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को पहले से ही भांपते हुए इस महायज्ञ का संकल्प लिया था।
करपात्री महाराज के प्रमुख शिष्य स्वामी प्रखर महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित यह महायज्ञ विप्र फाउंडेशन और श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है। आयोजन समिति के मुख्य संयोजक सुशील ओझा ने बताया कि शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ का उद्देश्य विश्वभर में व्याप्त अशांति और भय को समाप्त कर शांति स्थापना का मार्ग प्रशस्त करना है।
स्वामी प्रखर जी महाराज का भी कहना है— “ शास्त्रों में महायज्ञों के प्रभाव से सृष्टि-संतुलन और कल्याण का वर्णन मिलता है तो वर्तमान संघर्षपूर्ण वातावरण में आध्यात्मिक साधना के माध्यम से शांति का मार्ग भी प्रशस्त किया जा सकता है।”
200 हवन कुंडों में होंगी 3 करोड़ आहुतियां
महायज्ञ आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक तिलक राज शर्मा ने बताया कि महायज्ञ के लिए शास्त्रीय मानकों के अनुरूप 200 हवन कुंडों का निर्माण किया गया है। इन कुंडों में लगभग 3 करोड़ आहुतियां अर्पित की जाएंगी, जबकि महायज्ञ स्थल पर 2000 से अधिक साधक 24 करोड़ गायत्री मंत्रों का जाप करेंगे।
आयोजन समिति के अध्यक्ष राधेश्याम गुरुजी ने बताया कि हवन कुंड केवल अग्नि वेदियां नहीं, बल्कि मां भगवती का मुख माने जाते हैं। महायज्ञ में प्रयुक्त हवन सामग्री से लेकर संपूर्ण विधि-विधान पूर्णतः शास्त्र सम्मत रखा गया है। यज्ञ में 200 चयनित ब्राह्मण दंपति बैठेंगे उन्हें भी विधिवत प्रायश्चित व संकल्प कराया गया है। वहीं 2000 से अधिक साधकों का चयन भी साक्षात्कार प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है। 8 मार्च को भव्य शोभायात्रा से होगा शुभारंभ
आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष अशोक जोशी ने बताया कि महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ 8 मार्च को सायं 4 बजे भव्य शोभायात्रा के साथ होगा। महायज्ञ के लिए खेरकड़ी रोड पर लगभग 80 बीघा क्षेत्र में भव्य यज्ञनगरी विकसित की गई है, जो आगामी 43 दिनों तक साधना, जप और विश्व कल्याण के संकल्प का केंद्र बनेगी।
भारत से उठेगा शांति का संदेश
महायज्ञ संचालक मंडल के सदस्य नवीन शर्मा के अनुसार वर्तमान वैश्विक संघर्ष की पृष्ठभूमि में भारत की आध्यात्मिक परंपरा से प्रेरित यह महायज्ञ विश्व समुदाय को शांति, सद्भाव और संतुलन का संदेश देगा।
इस बीच महायज्ञ की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गुरुवार को स्वामी प्रखर महाराज के सानिध्य में एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई, जबकि यज्ञाचार्य, साधक और यजमान पुष्कर पहुंचने लगे हैं।




