
प्रख्यात आभूषण इतिहासकार डॉ. उषा आर. बालाकृष्णन द्वारा लिखित है पुस्तक
जयपुर में ‘द अम्रपाली कलेक्शन – सिल्वर एंड गोल्ड – विज़न्स ऑफ आर्केडिया’ पुस्तक का हुआ भव्य विमोचन
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ जयपुर के प्रख्यात आम्रपाली म्यूजियम में ‘द अम्रपाली कलेक्शन – सिल्वर एंड गोल्ड – विज़न्स ऑफ आर्केडिया’ का गुरुवार को भव्य विमोचन हुआ। पुस्तक का विमोचन देश की अग्रणी आभूषण इतिहासकार डॉ. उषा आर. बालाकृष्णन और भारत की पहली म्यूज़ियम एडवाइज़री फ़र्म, एका आर्काइविंग सर्विसेज़ के को-फ़ाउंडर, प्रमोद कुमार केजी द्वारा किया गया। इस दौरान आम्रपाली म्यूजियम के को-फाउंडर, राजीव अरोड़ा; म्यूजियम के को-फाउंडर राजेश अजमेरा; को-फाउंडर, मैपिन पब्लिशिंग, बिपिन शाह और म्यूजियम के सीईओ तरंग अरोड़ा भी शामिल रहे। डॉ. उषा आर. बालाकृष्णन द्वारा लिखित यह पुस्तक भारत की ग्रामीण आभूषण परंपराओं की काव्यात्मक और सशक्त दुनिया को उजागर करती है। आम्रपाली म्यूजियम के सहयोग से पुस्तक का प्रकाशन मैपिन पब्लिशिंग द्वारा किया गया है। कार्यक्रम की शुरुआत म्यूज़ियम विज़िट के साथ हुई, जिसके बाद पुस्तक का औपचारिक विमोचन हुआ। इसके बाद डॉ. उषा आर. बालाकृष्णन और प्रमोद कुमार केजी के बीच रोचक संवाद हुआ।
इस अवसर पर वर्ल्ड डायमंड म्यूजियम की मुख्य क्यूरेटर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने शोध व एग्जीबिशंस के लिए प्रसिद्ध, डॉ. उषा आर. बालाकृष्णन ने कहा कि, “यह पुस्तक असली भारत के घुमंतू, किसान और ग्रामीण समुदायों का उत्सव है। चांदी में प्रयोग और स्वतंत्रता की अद्भुत परंपरा रही है। ये आभूषण सुलभ, लोकतांत्रिक और किफायती हैं, फिर भी ऐसे समय में जब हमारी नज़र केवल कीमती चीज़ों पर टिक जाती है, इन्हें उचित पहचान की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि आम्रपाली वर्षों से कारीगरी की एक समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाता आ रहा है। पिछले 40 वर्षों में राजेश अजमेरा और राजीव अरोड़ा ने इन धरोहरों को देशभर से संजोकर संग्रहालय में सुरक्षित रखकर सम्मान का कार्य किया है।”
आम्रपाली म्यूजियम के को- फाउंडर राजीव अरोड़ा ने इस अवसर पर कहा कि, “आज की दुनिया तेज़ी से बदल रही है और सब कुछ बड़े पैमाने पर बनाया जा रहा है। ऐसे समय में हमें अपने पारंपरिक कारीगरों की कला को संभालने और सम्मान देने की जरूरत महसूस हुई। यह पुस्तक सिर्फ एक प्रकाशन नहीं, बल्कि भारत की आभूषण विरासत को संजोने की एक कोशिश है। हमारा उद्देश्य है कि युवा पीढ़ी अपनी विरासत को समझे और उससे जुड़े, साथ ही उस विरासत की असली पहचान भी बनी रहे।”
विश्व के सबसे महत्वपूर्ण संग्रहों में से एक ‘अम्रपाली कलेक्शन’ के पारंपरिक चांदी और सोने के आभूषणों के अभिलेख से प्रेरित यह पुस्तक सदियों में विकसित श्रृंगार की परंपराओं, सौंदर्य और प्रतीकात्मकता को उजागर करती है। यह प्रकाशन चार दशकों से अधिक समय तक किए गए शोध और संग्रहण पर आधारित है। इसमें भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न समुदायों, आस्थाओं, भाषाओं और सांस्कृतिक पहचानों से जुड़ी आभूषण परंपराओं को सरल और प्रभावी ढंग से दर्शाया गया है। 264 पृष्ठों और 331 सुंदर फोटोग्राफ्स से सुसज्जित यह पुस्तक पारंपरिक सुनारों और स्वर्णकारों की अद्भुत कला को सामने लाती है। पुस्तक में प्रकृति और ब्रह्मांड से गहरे संबंध भी दिखाए गए हैं, जहां चांदी और सोने के साथ शंख, सीप, हड्डी और घास जैसे प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया गया है।



