
(डॉ. सीमा दाधीच)
गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व है, जिसे हम हर वर्ष पूरे गौरव और सम्मान के साथ मनाते हैं। इस वर्ष देश 77 वा गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है,
यह केवल एक उत्सव नहीं बल्कि देश में इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ और देश को एक संप्रभु, समाजवादी, लोकतांत्रिक और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। जब 1929 के लाहौर अधिवेशन में, 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज्य की घोषणा की थी, जिसके बाद 1947 तक इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता था, यह दिन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आजादी की चेतना का प्रतीक है, जो 26 जनवरी 1930 से लेकर 26 जनवरी 1950 तक की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाता है। संविधान लागू होने के साथ ही, भारत 26 जनवरी 1950 को एक संपूर्ण लोकतांत्रिक गणराज्य बना, और देश का संचालन खुद के बनाए कानूनों के अनुसार शुरू हुआ, इसमें गणतंत्र का अर्थ है जनता का शासन। हमारे संविधान में सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए गए हैं, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या भाषा से हो। यह हमें स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे का संदेश देता है। यह दिन स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के लहू से आजादी की लड़ाई और बहादुरी के बिना असंभव था क्योंकि जहां भी असमानता होती हैं वहां मतभेद प्रारंभ हो जाता हैं इसीलिए ही भारत के संविधान में समानता का आधार रखा गया। भारत का संविधान तैयार करने में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे थे। भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया था। इसके दो माह बाद 26 जनवरी 1950 को इसे देशभर में लागू कर दिया गया। आज जब हम कर्तव्य पथ पर परेड और आसमान में गरजते विमानों को देखते हैं, तो वह केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं होता, बल्कि वह हमारी सुरक्षा, संप्रभुता और एकता का प्रतीक होता है। पिछले दशकों में भारत ने अंतरिक्ष से लेकर खेल के मैदान तक और तकनीक से लेकर अर्थव्यवस्था तक जो मुकाम हासिल किए हैं, उसकी नींव हमारे इसी लोकतंत्र में छिपी है। आतंक के खिलाफ हमारी सैन्य कार्रवाई में देश की बेटियों द्वारा दिया गया करारा जवाब बताता है कि हम देश की सुरक्षा और राष्ट्र के लिए समर्पित है। हमारा कर्तव्य है कि हम अपने संविधान के मूल्यों— स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का पालन करें। हमारा दायित्व है कि हम एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहां किसी के साथ भेदभाव न हो, जहां शिक्षा सबका अधिकार हो और जहां पर्यावरण की रक्षा हमारी प्राथमिकता हो।मौलिक अधिकार और कर्तव्य,नागरिकों को मूलभूत अधिकार प्रदान किए गए ताकि वे स्वतंत्र रूप से जी सकें और तब से आज तक जब जब हमें बदलाव की आवश्यकता हुई तब तब
भारतीय संविधान में 1950 से अब तक 105 से अधिक संशोधन (जुलाई 2025 तक 106) भी हुए, जो इसे एक जीवंत बनाते हैं। प्रमुख बदलावों में पंचायती राज (73वां), शिक्षा का अधिकार (86वां), GST (101वां), और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए आरक्षण (103वां) शामिल हैं, जो प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में परिवर्तन लाते हैं। यह सुधार देश के लचीलेपन को दर्शाते है जो देश के लिए आवश्यक हैं हमें गर्व है कि हम भारतीय है।

