अलवर, दिव्यराष्ट्र:/ अलवर जिला पुरुषार्थी समाज की पहचान सभ्य समाज के रूप मे होती रही है लेकिन अब यह समाज विवादित होता जा रहा है. आपसी लड़ाई अब सड़कों पर उतर आई है और खुलल्म खुला एक दूसरे पर आरोप -प्रत्यारोप लगाए जा रहे है. इसी कड़ी मे शुक्रवार को स्थानीय नटराज होटल मे एक धड़े ने प्रेस वार्ता कर वर्तमान अध्यक्ष के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की . और उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाए.
कहा जाता है कि सभ्य समाज किसी भी समाज की प्रगति और विकास का मूल आधार होते हैं। जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों, दायित्वों और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझकर कार्य करता है, वह न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाता है, बल्कि पूरे समाज को एक सकारात्मक दिशा में भी ले जाता है।
किसी की सहायता करना, ईमानदारी से कार्य करना, समय का पालन करना, स्वच्छता बनाए रखना और दूसरों का सम्मान करना जैसे कार्य सभ्य व्यवहार के उदाहरण हैं।
जब समाज का हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करता है और सभ्यता का परिचय देता है, तो वह समाज स्वतः ही विकसित हो जाता है। ऐसे समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था और आर्थिक प्रगति तीव्र गति से आगे बढ़ती है। लेकिन अलवर जिले में तो सभ्य समाज माने जाने वाला पुरुषार्थी समाज में इसके विपरीत कार्य हो रहे है.
विभाजन के दौरान विस्थापित होकर आए खत्री -अरोड़ा, सिंधी, ओढ़ राजपूत और सिख समाज ने मिलकर पुरुषार्थी समाज का गठन किया गया . कुछ समय तक तो इसमें सब कुछ ठीक -ठाक चला लेकिन वक़्त गुजरने के साथ इसमें भी राजनीती की बू आने लगी अब लगता है इस समाज पर शनि की साढ़े साती ने भयंकर रूप ले लिया है.
बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अमित छाबड़ा, सतीश भाटिया, रोशन लाल बक्शी, हरीकिशन खत्री आदि ने वर्तमान अध्यक्ष कुलदीप कालरा पर विभिन्न आरोप लगाए इनका कहना था कि अध्यक्ष का व्यवहार तानाशाही पूर्ण है. तीन साल से अधिक का समय हो गया है लेकिन वे अध्यक्ष पद कुंडली मारे बैठे है, उनकी हठधर्मिता की पराकाष्ठा यह है कि ज़ब उन्हें चुनाव कराने के लिए कहा जाता है तो उनका तुर्रा यह होता है कि ज़ब राजस्थान सरकार पंचायत, नगर निकयों के चुनाव नहीं करा रही है तो “मैं भी क्यों कराओ”, “”मेरी मर्जी,” जबकि नियमों में कार्यकाल हर 2 साल में चुनाव और नया अध्यक्ष चुना जाना अनिवार्य है जबकि अब साढे तीन साल से ज्यादा का समय हो गया है और वे (कालरा) अध्यक्ष पद पर काबिज है और कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं है. आरोप है कि आमसभा भी नहीं कराई जा रही है और ना ही लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जा रहा है. जबकि वित्तीय लेन देन मे भारी अनियमिताएं की जा रही है.
आरोप लगाया गया कि अब तक लगभग 20000 सदस्यता फार्म बेचे जा चुके हैं जिसका अर्थ है कि लगभग 19 से 20 लाख रूपये नगद इकट्ठे हो चुके हैं उन्होंने बताया कि हमें पुख्ता जानकारी है कि यह बड़ी राशि अब तक समिति के आधिकारिक बैंक खाते में जमा भी नहीं हुई है और यह सीधे तौर पर धन का दुरुपयोग और गबन की आशंका पैदा करता है.
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने समिति अध्यक्ष और वर्तमान अध्यक्ष पर आरोप लगाया कि वह समाज के बुजुर्गों की सलाह नहीं ले रहे हैं और ना ही प्रबुद्ध वर्ग को कोई अहमियत दे रहे है वे अपनी मनमानी से निर्णय लेते हैं और केवल व्हाट्सएप और अखबारों के जरिए उन्हें थोप देते हैं. इस संबंध में अध्यक्ष को वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भी भेजा गया था कि वे चुनाव कराए और ससम्मान पदसे मुक्त हो जाए लेकिन उन्होंने उस नोटिस को भी नजर अंदाज कर दिया और कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा
वक्ताओं ने तुरंत नए चुनाव कराने की मांग की है . चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की मनमानी को रोकने के लिए प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त करने का भी सुझाव दिया . प्रेस वार्ता का संचालन महेश खत्री ने किया