
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए ₹1,06,530 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो महिलाओं की समग्र स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं के स्वास्थ्य में मेंस्ट्रुअल हाइजीन की भूमिका बेहद अहम है, क्योंकि पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इस दौरान साफ-सफाई में लापरवाही संक्रमण और कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। पीरियड्स के समय सुरक्षित और स्वच्छ उत्पाद जैसे सैनिटरी पैड, टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग करना चाहिए और इन्हें हर 4 से 6 घंटे में बदलना जरूरी है, ताकि बैक्टीरिया पनपने का खतरा कम रहे।
पीरियड्स में हाइजीन की कमी से संक्रमण का खतरा, रखें ध्यान*
डॉ. पंखुड़ी गौतम, सीनियर कंसल्टेंट, आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर ने बताया कि पीरियड्स के दौरान हाइजीन की कमी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन ( यूटी आई), बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन, त्वचा में खुजली, रैशेज, दुर्गंध और गंभीर मामलों में पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज जैसी समस्याओं का कारण बन सकती हैं, जो भविष्य में प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए रोजाना स्नान करना, साफ-सफाई बनाए रखना, साफ और सूती अंडरगारमेंट पहनना और आयरन व कैल्शियम से भरपूर संतुलित आहार लेना जरूरी है, ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे। अगर पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द, अबनॉर्मल ब्लीडिंग, बुखार या कमजोरी जैसी समस्या दिखाई दे, तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। सही जानकारी, स्वच्छता और जागरूकता अपनाकर महिलाएं खुद को संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं से सुरक्षित रख सकती हैं और स्वस्थ जीवन जी सकती हैं।





