
(दिव्यराष्ट्र के लिए डॉ. दुलाराम सहारण)
राजस्थान के झुंझुनू जिले के गाँव सीगड़ी की मिट्टी में जन्मे डॉ. घासीराम वर्मा एक ऐसा नाम हैं, जो जनहितकारी व्यक्तित्व के साथ सादगी, शिक्षा सेवा और दानवीरता की अनूठी मिसाल के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। समय के साथ उम्र बढ़ती है, लेकिन कुछ लोग अपने विचारों और कर्मों से हर पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बने रहते हैं। 1 अगस्त 2026 को 99 वर्ष के हो रहे डॉ. घासीराम वर्मा ऐसे ही व्यक्तित्व हैं। उनके जीवन की सबसे बड़ी विशेषता यह नहीं कि उन्होंने विदेश में रहकर गणित के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई, बल्कि यह है कि उन्होंने अपनी उपलब्धियों का लाभ समाज तक पहुँचाने का संकल्प निभाया।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के सीगड़ी गाँव से निकलकर अमेरिका के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में गणित के प्राध्यापक बनने तक का उनका सफर संघर्ष, अनुशासन और प्रतिभा का परिणाम है। सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना अपने आप में प्रेरणादायक है, लेकिन डॉ. वर्मा की कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। वास्तव में, उनकी दूसरी और अधिक महत्वपूर्ण यात्रा तब शुरू हुई, जब उन्होंने समाज को लौटाने का निर्णय लिया।
डॉ. घासीराम वर्मा का मानना है कि यदि शिक्षा सबकी पहुँच में हो, तो समाज की अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः निकल सकता है। इसी विश्वास के साथ उन्होंने अपनी आय, पेंशन और संचित पूँजी का बड़ा हिस्सा शिक्षा और समाजहित के कार्यों में समर्पित किया। छात्रावासों के निर्माण, शैक्षणिक संस्थानों के विकास, छात्रवृत्तियों और सामाजिक परियोजनाओं में उनका योगदान आज भी अनेक लोगों के जीवन को नई दिशा दे रहा है। बताया जाता है कि वे अब तक लगभग 15 करोड़ रुपये जनहित के कार्यों में समर्पित कर चुके हैं।
उनके जीवन का सबसे प्रेरक पक्ष उनकी सादगी है। आर्थिक रूप से संपन्न होने के बावजूद उन्होंने कभी भौतिक वैभव को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। वे मानते हैं कि धन का वास्तविक मूल्य तभी है, जब उससे किसी ज़रूरतमंद का भविष्य सँवरे। यही सोच उन्हें समाज में “करोड़पति फकीर” के नाम से विशिष्ट पहचान दिलाती है।
डॉ. वर्मा का जीवन हमें यह भी सिखाता है कि समाज परिवर्तन केवल सरकारों का दायित्व नहीं है। यदि प्रत्येक सक्षम व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य या सामाजिक विकास के क्षेत्र में योगदान दे, तो परिवर्तन की गति कई गुना बढ़ सकती है। उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि परोपकार किसी विशेष अवसर का कार्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका होना चाहिए।
आज जब समाज का बड़ा वर्ग सफलता को उपभोग और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखता है, तब डॉ. घासीराम वर्मा का जीवन एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। वे बताते हैं कि वास्तविक उपलब्धि वही है, जो दूसरों के जीवन में अवसर, आशा और आत्मविश्वास का संचार करे। उनका व्यक्तित्व इस बात का प्रमाण है कि ज्ञान और संवेदना का मेल किसी भी समाज को नई दिशा दे सकता है।
99वें जन्मदिवस पर डॉ. घासीराम वर्मा को हार्दिक शुभकामनाएँ। उनकी कर्मनिष्ठा, सादगी और समाज के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहे। ऐसे व्यक्तित्व केवल अपने समय को नहीं, बल्कि भविष्य को भी प्रकाशित करते हैं।



