
जयपुर, 25 मार्च, 2026 : राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिसंबर 2025 में चलाए गए हालिया क्षय रोग (टीबी) स्क्रीनिंग अभियान ने एक कठोर सच्चाई उजागर की है—टीबी आज भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। बैक्टीरिया से होने वाला यह संक्रामक रोग दुनिया की सबसे जिद्दी बीमारियों में से एक है, और भारत भी इस वैश्विक बोझ का एक बड़ा हिस्सा वहन करता है। देश में हर वर्ष लगभग 28 लाख (2.8 मिलियन) नए टीबी के मामले सामने आते हैं, जो वैश्विक बोझ का 25% से अधिक हैं। ये ‘छिपे हुए मामले’ इस बात को रेखांकित करते हैं कि टीबी को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता, समय पर जांच और उपचार को पूरा करना अत्यंत आवश्यक है।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट (पल्मोनोलॉजी) डॉ. अंकित बंसल ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन यह लसीका ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स), हड्डियों, मस्तिष्क और अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। यह रोग संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान हवा के माध्यम से फैलता है। आम धारणा के विपरीत, टीबी केवल गरीब या कुपोषित लोगों को ही नहीं, बल्कि किसी भी व्यक्ति को हो सकती है जो इसके संपर्क में आता है।
डॉ. अंकित बंसल ने टीबी के लक्षण, उपचार और बचाव के उपाय बताए हैं:
ऐसे सामान्य लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें:
* दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहना
* बुखार, विशेषकर शाम के समय और रात में पसीना आना
* बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना
* भूख में कमी और लगातार थकान रहना
* गंभीर मामलों में बलगम में खून आना
उपचार: टीबी पूरी तरह से ठीक हो सकती है
टीबी के बारे में सबसे आश्वस्त करने वाली बात यह है कि इसका इलाज संभव है। सही तरीके से और निर्धारित अवधि तक उपचार लेने पर मरीज पूरी तरह ठीक होकर सामान्य जीवन जी सकता है। आमतौर पर टीबी के इलाज में 6 से 9 महीनों तक निर्धारित दवाओं का नियमित सेवन करना होता है, जो राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम के तहत निःशुल्क उपलब्ध हैं। हाल ही में राजस्थान के स्क्रीनिंग अभियान में चिन्हित मरीजों को संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए तुरंत उपचार से जोड़ा जा रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरा उपचार पूरा किया जाए, भले ही लक्षण पहले ही कम हो जाएं। बीच में दवा बंद करने से बीमारी अधिक खतरनाक और दवा-प्रतिरोधी रूप में वापस आ सकती है, जिसका इलाज करना और कठिन हो जाता है।
टीबी से बचाव: छोटे कदम, बड़ा असर
* यदि खांसी, बुखार या वजन कम होना लंबे समय तक बना रहे, तो तुरंत जांच कराएं
* दो सप्ताह से अधिक खांसी या बुखार को “मौसमी” समझकर नजरअंदाज न करें
* खांसते या छींकते समय मुंह ढकें और उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करें
* संतुलित और पौष्टिक आहार लें तथा मधुमेह जैसी बीमारियों को नियंत्रित रखें
* धूम्रपान से बचें और शराब का सेवन कम करें, क्योंकि ये शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करते हैं
* टीबी का इलाज करवा रहे लोगों को सहयोग और समर्थन दें
समय पर जांच, सही उपचार और सामुदायिक जागरूकता के माध्यम से टीबी को नियंत्रित और पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। संदेश स्पष्ट है—टीबी गंभीर है, लेकिन इसका इलाज संभव है, और समय पर कदम उठाने से जीवन बचाया जा सकता है।




