
मुमुक्षु संतोष मालू बनी साध्वी संकल्पप्रज्ञा श्रीजी म.सा.
मुमुक्षु मैना लूणिया बनी साध्वी समर्पणप्रज्ञा श्रीजी म.सा.
जैसलमेर । जैन धर्म की पावन परंपरा में आज स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जब राजस्थान की दो युवा मुमुक्षु संतोष मालू और मेना (मैना) लूणिया ने जैसलमेर में आयोजित भव्य दीक्षा महोत्सव में संयम जीवन को अंगीकार कर सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया। यह ऐतिहासिक दीक्षा समारोह खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में सम्पन्न हुआ, जिसमें आचार्य, उपाध्याय, गणिवर्य सहित सैकड़ों साधु-साध्वियां एवं हजारों श्रद्धालु साक्षी बने। मंत्रोच्चार, मंगलगान और जयघोष से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा।
मुमुक्षुओं का निकला वर्षीदान की भव्य वरघोड़ा, शामिल हुआ सम्पूर्ण जैन समाज
दीक्षा से पूर्व दोनों मुमुक्षुओं की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। समाजबंधुओं ने पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया। परिवारजनों ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से अपनी बेटियों को संयम जीवन हेतु विदा किया। यह क्षण एक ओर भावुक था तो दूसरी ओर गौरव और धर्मगौरव से परिपूर्ण। बाड़मेर की मुमुक्षु संतोष मालू बनी साध्वी संकल्पप्रज्ञा श्रीजी म.सा.-28 वर्षीय संतोष मालू बचपन से ही धार्मिक संस्कारों में पली-बढ़ीं। वाणिज्य शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात उनका मन धीरे-धीरे आध्यात्मिक चिंतन की ओर उन्मुख हुआ। कोरोना काल के दौरान जीवन की अनिश्चितता ने उनके भीतर वैराग्य भाव को दृढ़ किया। दीक्षा के पूर्व उन्होंने भावुक शब्दों में कहा “मैं दासी नहीं, रानी बनने जा रही हूं।” दीक्षा प्रक्रिया के अंतर्गत उन्होंने पंच महाव्रत सत्य, अहिंसा, अचैर्य, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह धारण कर संयम पथ का संकल्प लिया। दीक्षा उपरांत उन्हें साध्वी संकल्पप्रज्ञा श्री जी म.सा. नाम से अलंकृत किया गया।
शेरगढ की मेना (मैना) लूणिया बनी साध्वी समर्पणप्रज्ञा श्रीजी म.सा.-मेना लूणिया ने भी आत्मकल्याण से लोककल्याण की भावना के साथ संयम जीवन स्वीकार किया। सत्संग और आगम अध्ययन के प्रति विशेष रुचि ने उन्हें आरंभ से ही साधना पथ की ओर प्रेरित किया। दीक्षा के अंतिम चरण में केशलोचन एवं वेश परिवर्तन की पावन विधि संपन्न हुई। इसके पश्चात उन्हें साध्वी समर्पणप्रज्ञा श्रीजी म.सा. नाम प्रदान किया गया। उनका यह निर्णय युवा पीढ़ी के लिए त्याग, तप और आत्मानुशासन का प्रेरणास्रोत बन गया है।
चादर महोत्सव और दादागुरु इकतीसा से गूंजेगा जैसलमेर
चादर महोत्सव आयोजन समिति के सचिव पदम टाटिया ने बताया कि दीक्षा महोत्सव के साथ ही जैसलमेर में आगामी 6 से 8 मार्च तक भव्य चादर महोत्सव तथा विश्वव्यापी दादागुरु इकतीसा पाठ का आयोजन हो रहा है। इन आयोजनों में देश-विदेश से श्रद्धालु जैसलमेर पहुँच चुके है। चादर महोत्सव में श्रद्धालु भक्ति-भाव से चादर अर्पित कर मंगलकामना करेंगे, वहीं सात मार्च को विश्वभर में एक करोड़ आठ लाख श्रद्धालु दादागुरु इकतीसा के सामूहिक पाठ से वातावरण आध्यात्मिक चेतना से आलोकित करेंगे। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं और व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। जैसलमेर की पावन धरा पर संपन्न यह ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव न केवल राजस्थान बल्कि समूचे भारत के लिए आध्यात्मिक चेतना, वैराग्य और संस्कारों का प्रेरणादायी संदेश बन गया है। श्रद्धालुओं ने नवदीक्षित साध्वियों के उज्ज्वल संयम जीवन की मंगलकामना करते हुए इसे समाज के लिए गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बताया।





