14 जून – “विश्व रक्तदान दिवस”। (दिव्य राष्ट्र के लिए डॉ. राकेश वशिष्ठ)* सिर्फ एक तारीख नहीं, उन लाखों चेहरों की उम्मीद है जो अस्पताल के बेड पर एक यूनिट खून के लिए जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। भारत में हर साल इस दिन का मकसद साफ है: स्वस्थ लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना, भ्रांतियों को तोड़ना, और हर उस गुमनाम रक्तवीर को धन्यवाद देना जिसने बिना नाम, बिना स्वार्थ के किसी की सांसें लौटाई हैं। भारत में हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है। स्वस्थ लोगों को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित करने, इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने, रक्तदान करने वाले लोगों में आत्मसम्मान भावना को जगाने व उन्हें धन्यवाद देने के उद्देश्य से इस दिवस का खास महत्व है। रक्तदान दुनिया का सबसे नेक और निस्वार्थ कार्य है। सोचिए, आपके 15 मिनट और 350-450 मिलीलीटर रक्त से तीन जिंदगियां बच सकती हैं।
ब्लड की एक यूनिट कम से कम तीन लोगों की जान बचा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि दान किए गए ब्लड को अलग-अलग घटकों ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा में विभाजित कर जरूरतमंद मरीजों को दिया जाता है। देश को हर साल 1.46 करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत होती है। केन्द्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार साल 2024-25 में जरूरत से ज्यादा ब्लड इकट्ठा किया गया। इसके बावजूद विशेषज्ञ देश के कई हिस्सों को ‘ब्लड डेजर्ट’ मानते हैं, जहां जरूरत पड़ने पर समय पर खून नहीं मिल पाता।भारत में कुल रक्तदान का केवल 59% ही स्वैच्छिक होता है। बाकी मजबूरी में, बदले में, या पैसे देकर होता है।
• (O+) सबसे ज्यादा पाया जाने वाला ब्लड ग्रुप है:– देश के करीब 30% लोगों का ब्लड ग्रुप O+ है। यह O+, A+, B+ और AB+ ब्लड ग्रुप वाले लोगों को खून दे सकते हैं। वहीं, खुद सिर्फ O+ और O- ब्लड ग्रुप वाले लोगों से ही खून ले सकते हैं।
• (A+) ब्लड ग्रुप वाले लोग A+ व AB+ को खून दे सकते हैं:– A+ ब्लड ग्रुप वाले लोग A+ और AB+ ब्लड ग्रुप के लोगों को खून दे सकते हैं। वह खुद A+, A-, O+ औरं 0- ब्लड ग्रुप से खून ले सकते हैं। ब्लड लेने के लिए इनके पास कई विकल्प होते हैं।
• (O-) ब्लड ग्रुप वाले लोग सभी को खून दे सकते हैं:– O- ब्लड ग्रुप को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है। लेकिन खुद इसे सिर्फ – ब्लड ग्रुप से ही खून मिल सकता है। जब मरीज का ब्लड ग्रुप पता नहीं होता, तब अक्सर इसी ब्लड का इस्तेमाल किया जाता है।
• (B+) के पास खून लेने के लिए कई विकल्प होते है:– B+ ब्लड ग्रुप वाले लोग B+ और AB+ ब्लड ग्रुप के लोगों को खून दे सकते हैं। वहीं, जरूरत पड़ने पर वे B+, B-, O+ और O- ब्लड ग्रुप वाले लोगों से खून ले सकते हैं।
• (A–) सिर्फ दो ही ब्लड ग्रुप्स से ब्लड ले सकते हैं:– इस ब्लड ग्रुप वाले लोग A+, A-, AB+ और AB- ब्लड ग्रुप के लोगों को खून दे सकते हैं। लेकिन अगर खून लेने की बात करें तो वे सिर्फ A- और – ब्लड ग्रुप से ही खून ले सकते हैं।
• (B-) अपने अलावा सिर्फ O-ब्लड ग्रुप से खून ले सकते हैं:· इस ग्रुप वाले लोग B+, B-, AB+ और AB- ब्लड ग्रुप वाले लोगों को खून दे सकते हैं। लेकिन जरूरत पड़ने पर वह खुद सिर्फ B- और O- ब्लड ग्रुप से ही खून ले सकते हैं।
• (AB+) ब्लड ग्रुप वाले लोग किसी से भी खून ले सकते हैं:– AB+ ब्लड ग्रुप वाले लोग किसी भी ब्लड ग्रुप के लोगों से खून ले सकते हैं, इसलिए इन्हें यूनिवर्सल रिसीवर कहते है। हालांकि वह सिर्फ AB+ लोगों को ही ब्लड डोनेट कर सकते हैं।
• AB- देश में रेयर ब्लड ग्रुप जैसी स्थिति में है:– AB- ब्लड ग्रुप भारत में सबसे कम लोगों में पाया जाता। जाता है। यह AB+ और AB- को रक्तदान कर सकते हैं, जबकि AB-, A-, B- और O- ब्लड ग्रुप से रक्त प्राप्त कर सकते हैं।
• डर और भ्रम: सबसे बड़ी रुकावट:– आज भी सूई का डर, “कमजोरी आ जाएगी”, “खून की कमी हो जाएगी” जैसी मान्यताएं और रीति-रिवाज लोगो को रोक देते हैं। हालात ये हैं कि लोग अपने मां-बाप, भाई-बहन के लिए भी खून देने से कतराते हैं। ब्लड बैंकों के चक्कर काटते हैं, पैसे से खून खरीदना चाहते हैं। वे भूल जाते हैं कि ब्लड बैंक में खून फैक्ट्री में नहीं बनता। वो भी तभी मिलता है जब कोई आप-हम जैसा इंसान स्वेच्छा से देता है। आमतौर पर ब्लड बैंक भी बदले में ही खून दे पाते हैं। सच ये है: स्वस्थ वयस्कों के लिए रक्तदान 100% सुरक्षित है। 18 से 65 साल तक। 60+ के लोग भी डॉक्टर की सलाह से दे सकते हैं। 45kg से ज्यादा और हीमोग्लोबिन 12.5+ होना चाहिए। हर 3 महीने बाद आप फिर से डोनेट कर सकते हैं। पंजीकरण, मेडिकल जांच, 8-10 मिनट का रक्तदान, और जलपान। बस 4 आसान चरण। हर डोनर के लिए नई सुई इस्तेमाल होती है और तुरंत नष्ट कर दी जाती है। संक्रमण की संभावना ना के बराबर है। प्लाज्मा 24 घंटे में बन जाता है। शरीर में 5-7 लीटर खून होता है और एक यूनिट अतिरिक्त होता है जो दिया जा सकता है।
• विज्ञान क्या कहता है?:· रक्त आपका जीवन है, दान किसी का जीवन बनता है। रक्त, लाल-श्वेत कण, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स से मिलकर बना है। लाल कण ऑक्सीजन पहुंचाते हैं, श्वेत कण रोगों से लड़ते हैं, प्लेटलेट्स खून बहने से रोकते हैं। हमारे बोन मैरो में हर दिन नई रक्त कोशिकाएं बनती हैं। यानी रक्तदान से आपके शरीर को कोई नुकसान नहीं, बल्कि मुफ्त में हेल्थ चेकअप का फायदा मिल जाता है। हर दो सेकंड में देश में किसी न किसी को खून की जरूरत पड़ती है। खून की कमी से हर साल हजारों मौतें होती हैं।सोचिए, अगर हम सब 3 महीने में एक बार रक्तदान करें तो कोई भी मां अपने बेटे के लिए, कोई भी बच्चा अपने पिता के लिए तड़पे नहीं।
हमारे शरीर में रक्त बनने की क्रिया भी काफी रोचक है। रक्त, श्वेत रक्त कण, लाल रक्त कण, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स से मिलकर बने रक्त में लाल रक्तकण शरीर के हर भाग में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करते हैं, श्वेत रक्त कण रोग प्रतिरोधक होते हैं तो प्लेटलेट्स का काम होता है बहते रक्त को रोकना। कभी चोट लगने पर खून बहता है और प्लेटलेट्स ही उसे बहने से रोकने का काम करते हैं। हर दिन हमारे शरीर के बोन मैरो (अस्थिमज्जा) में रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता रहता है। रक्तदान कर अपने रक्त की मुफ्त जांच का लाभ भी मिल जाता है।
आमतौर पर ब्लड बैंक जरूरतमंदों को उनकी जरूरत वाले रक्त समूह का रक्त बदले में ही दे पाते हैं। रक्त मानव शरीर का एक प्रकार का तरल पदार्थ है, जो शरीर का कोशिकाओ को अवाश्यक पोषक तत्व और प्राणवायु पहुचाने का कार्य करता है और कोशिकाओ से खराब खराब पदार्थ को निकालने का कार्य करता है। रक्त की कमी के कारण देश भर में हर वर्ष हजारों लोगो की मृत्यु हो जाती है। हर दो सेकंड में किसी ना किसी को रक्त की जरूरत होती। एक नियमित रक्तदाता, तीन महीने बाद ही अगला रक्तदान कर सकता है। उन्हें आयरन, विटामिन बी व सी युक्त आहार करना चाहिए। इसके लिए उन्हें नियमित आहार में पालक, संतरे का जूस, फलियां व डेरी उत्पाद आहार में लेने चाहिए। रक्तदान से दो-तीन घंटे पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं व भरपेट भोजन करें। इससे खून में शुगर की मात्रा स्थिर रहती है।
रक्तदान महादान 🩸
आलेख: डॉ राकेश वशिष्ठ, वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादकीय लेखक