विदुषी प्रो. माया रानी टाक, पं. नरेश मल्होत्रा, सुरेश गोस्वामी एवं आचार्य सत्यनारायण पाटोदिया सम्मानित
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/
रघुनाथ तलेगांवकर फाउंडेशन ट्रस्ट, आगरा एवं संगीत कला केंद्र, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में संस्थापक संगीताचार्य पं. रघुनाथ तलेगांवकर एवं संगीत नक्षत्र पं. केशव रघुनाथ तलेगांवकर के पुण्य स्मरण में ‘रघुनाथांजलि सुर सुगंध संगीत समारोह’ का आयोजन जवाहर कला केंद्र, जयपुर के रंगायन सभागार में किया गया। समारोह में शास्त्रीय संगीत की सुरमयी प्रस्तुतियों ने संगीत रसिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर संगीत जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को विभिन्न मानद सम्मानों से सम्मानित किया गया।

समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि परमपूज्य स्वामी सोमेन्द्र महाराज, पीठाधीश्वर पावनधाम, विराटनगर, प्रतिभा केशव तलेगांवकर, पं. नरेश मल्होत्रा, आचार्य सत्यनारायण पाटोदिया एवं डॉ. माया रानी टाक द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। संस्था की ओर से अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
सरस्वती वंदना से हुआ सांगीतिक शुभारंभ
संगीत कला केंद्र, जयपुर के विद्यार्थियों जतिन, हार्दिक, तनिष्क, आभास एवं रुद्राक्ष ने राग किरवानी में निबद्ध सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर समारोह का सांगीतिक शुभारंभ किया। इसके पश्चात प्रदीप भारद्वाज द्वारा रचित तथा डॉ. गिरींद्र तलेगांवकर द्वारा राग मालकौंस में स्वरबद्ध ‘रघुनाथांजलि पर्व गीत’ की विद्यार्थियों ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी।

समारोह में पं. रघुनाथ तलेगांवकर की राग बागेश्री में स्वरचित विशिष्ट रचनाओं की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही। आरोही तलेगांवकर, डॉ. उमा विजय, पियास, तनिष्क, हार्दिक एवं रोहित कटारिया ने अपनी सुरमयी प्रस्तुतियों से श्रोताओं की सराहना प्राप्त की। हारमोनियम पर गौरव भट्ट, वायलिन पर तनीष खंडवाल तथा तबले पर वेदान्त शर्मा ने प्रभावी संगति की।
इसके बाद शिखा माथुर ने राग श्याम कल्याण में पं. तलेगांवकर की रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हारमोनियम पर डॉ. उमा विजय तथा तबले पर तनिष्क श्रीवास्तव ने सुंदर संगति की।
वायलिन और शास्त्रीय गायन ने बांधा समां
सुविख्यात वायलिन वादक पं. सुरेश गोस्वामी ने राग पूरिया कल्याण एवं खमाज में अपनी मनोहारी वादन प्रस्तुति से सभागार को सुरों से सराबोर कर दिया। उनके साथ युवा तबला वादक मोहम्मद शोएब ने कुशल संगति करते हुए प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया।
समारोह का समापन मथुरा से पधारे अतिथि कलाकार पं. नरेश मल्होत्रा के सुमधुर शास्त्रीय गायन से हुआ। उन्होंने राग शुद्ध कल्याण, जोग तथा पं. रघुनाथ तलेगांवकर की रचना प्रस्तुत कर संगीत रसिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर जयपुर के मोहम्मद अहमद तथा हारमोनियम पर आगरा से पधारे पं. रवीन्द्र तलेगांवकर ने उत्कृष्ट संगति कर इस प्रस्तुति को यादगार बनाया।
संगीत विभूतियों को मानद सम्मान
समारोह के दौरान संगीत जगत में विशिष्ट सेवाओं एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए विदुषी प्रो. माया रानी टाक को ‘आदर्श संगीत प्रसारक’, पं. सुरेश गोस्वामी को ‘सुर तन्त्री विलास’, पं. नरेश मल्होत्रा को ‘सुर रत्न विलास’, शिखा माथुर को ‘सुर आलोक’ तथा आचार्य सत्यनारायण पाटोदिया को नारायण राव अत्रे की स्मृति में स्थापित ‘संस्कृति संवाहक’ के मानद सम्मान से सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि परमपूज्य स्वामी सोमेन्द्र महाराज ने ट्रस्ट एवं संस्था द्वारा भारतीय शास्त्रीय संगीत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। संस्था की ओर से स्वामी जी को शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
तलेगांवकर परिवार ने किया अतिथियों का स्वागत
इस अवसर पर पं. रघुनाथ तलेगांवकर की पुत्री मंगला मठकर, पुत्र पं. रवीन्द्र तलेगांवकर, पुत्रवधुएं प्रतिभा तलेगांवकर एवं उपमा तलेगांवकर तथा नातिन शुभ्रा तलेगांवकर ने अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. गिरींद्र तलेगांवकर ने उपस्थित संगीत रसिकों, कलाकारों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. उमा विजय ने अपनी प्रभावशाली एवं मधुर वाणी से किया।
समारोह ने पं. रघुनाथ तलेगांवकर की सांगीतिक विरासत को स्मरण करते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। कलाकारों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों और संगीत विभूतियों के सम्मान ने आयोजन को यादगार बना दिया।