
8 मार्च को प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है।भारतीय संविधान 1950 से लागू होने के साथ ही इसमें महिला और पुरुष, दोनों को बराबर समानता का अधिकार दिया गया। भारत वह देश है जहां नारी को देवी के रूप में, ममत्व की छांव में,अन्नपूर्णा के रूप में देखा गया। नारी का स्थान हमारे देश में पुरुष के नाम के आगे (जैसे सीता-राम, राधे-श्याम,गौरी-शंकर,उमाशंकर,लक्ष्मीनारायण) आता है, यह समाज में महिलाओं के सम्मान,आदर,शक्ति और सर्वोच्चता के महत्व को दर्शाता है सिर्फ यही तक नहीं नदियां भी गंगा,गोदावरी,यमुना, सरस्वती,शिप्रा के रूप में बहती हो।जहां गाय को गौ माता और नंदिनी,सुरभि,बहुला, गोरी, सुभद्रा के रूप में पूजी गई हो उसी देश में नारी लज्जा,पवित्रता में अनुसूया,प्रेमिका बनी तो कृष्ण को पूजवाया, भक्त बनी तो मीरा, परीक्षा हुई तो सीता ने कुल की रीति को निभाया। “माना कि पुरुष बलशाली है, मगर जीतती तो हमेशा नारी है,सांवरिया के 56 भोग पर एक तुलसी ही भारी है।” यह उक्ति नारी की शक्ति और भक्ति को दर्शाती है। नारी मन,अपनी ममता, सहनशीलता और त्याग के कारण भारतीय संस्कृति की जीवंत धरोहर है। वह केवल परंपराओं की संवाहिका ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज की धुरी है, जो तीज-त्योहारों से लेकर संस्कारों तक को जीवित रखती है। भारतीय समाज में नारी शक्ति का प्रतीक और ‘गृहलक्ष्मी’ मानी जाती है, जिसके सम्मान से ही समाज का गौरवपूर्ण उत्थान संभव है। वीर माता जीजाबाई ने छत्रपति शिवाजी का मार्गदर्शक कर हिंदू समाज का संरक्षक ‘छत्रपति शिवाजी महाराज’ बनाया।अहिल्याबाई होलकर (1725-1795) जिन्होंने महेश्वर से शासन किया। यह “दार्शनिक रानी” के रूप में जानी जाने वाली, एक शिव भक्त थीं, जिन्होंने काशी विश्वनाथ सहित पूरे भारत में मंदिरों का जीर्णोद्धार किया और एक न्यायप्रिय शासक के साथ उद्यम को स्थापित कर सैकड़ों लोगों को रोजगार दिया। हम भारतीय है हमें गर्व है यहां की राष्ट्रपति, वित्त मंत्री,कैबिनेट मंत्री में महिलाएं, दिल्ली की मुख्यमंत्री,राजस्थान की उपमुख्यमंत्री,देश की
समाज में महिलाओं की भूमिका बहुआयामी और महत्वपूर्ण है वे परिवार की धुरी,संस्कृति की संरक्षक और राष्ट्र निर्माण की नींव हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में योगदान देती हैं, घर और बाहर दोनों जगह देखभाल,पोषण और नेतृत्व प्रदान कर रही हैं। हमारे देश में स्वतंत्र भारत की पहली महिला कैबिनेट मंत्री राजकुमारी अमृत कौर थीं। भारत की प्रमुख महिला उद्यमी ने भी अपने नाम का लोहा मनवाया है किरण मजूमदार-शॉ,फाल्गुनी नायर,विनीतासिंह,वंदना लूथरा,ग़ज़लअलाघ,
ऋचा कर,उपासना टाकू,श्रद्धा शर्मा किसी नाम की मोहताज नहीं बहुमुखी प्रतिभा की धनी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करके भारत के वैश्विक विकास में भी भागीदारी निभाई है। हमारे देश में धार्मिक अनुष्ठान,यज्ञ और मांगलिक आयोजन भी बिना नारी के पूर्ण नहीं होता यह नारी के महत्व को दर्शाता है और आज नारी शक्ति प्रत्येक क्षेत्र में अपना परचम इसलिए लहरा सकती है कि क्योंकि हमारे देश में नारी शक्ति का सम्मान होता हैं आज गर्व से वह पेट्रोल पंप पर,ई रिक्शा चलाकर,मॉल,शो रूम सभी जगह आराम से निर्भय होकर काम कर सकती हैं हमारे देश में ट्रेन,बस सभी जगह अकेले नारी अपना सफर इसलिए ही कर सकती हैं।






