पूरे भारत में कार्बन-न्यूट्रल गाँव बनाने का लक्ष्य
पहले चरण में ₹30 करोड़ का निवेश, 50 गाँवों को शामिल किया जाएगा
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र/ अर्थ डे के अवसर पर, ईबीजी फाउंडेशन ने ‘संभव है’ नामक एक राष्ट्रव्यापी पहल की शुरुआत की है। इस पहल का नेतृत्व डा . इरफान खान संस्थापक एवं अध्यक्ष, ईबीजी ग्रुप कर रहे हैं। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देना और मजबूत एवं सतत ग्रामीण समुदायों का निर्माण करना है। इस कार्यक्रम की शुरुआत तेलंगाना के नलगोंडा जिले के चारला थांडा गाँव को अपनाने के साथ हुई है, जो एक स्केलेबल और समुदाय-आधारित परिवर्तन की नींव रखता है।
फाउंडेशन के व्यापक राष्ट्र-निर्माण एजेंडा के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित ‘संभव है’ बिखरे हुए विकास प्रयासों से आगे बढ़कर एक एकीकृत, डेटा-आधारित ढांचे के माध्यम से कार्य करता है। इसका दीर्घकालिक लक्ष्य पूरे भारत में कार्बन-न्यूट्रल गाँव विकसित करना है। यह पहल पहले वर्ष में 10–20 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और तीन वर्षों में पूर्ण कार्बन न्यूट्रैलिटी की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखती है।
यह पहल चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी—पहले वर्ष में 50 गाँवों के साथ ₹30 करोड़ के निवेश से शुरुआत होगी, दूसरे वर्ष में इसे 150 गाँवों तक विस्तारित किया जाएगा और आगे चलकर सरकारी संस्थानों के सहयोग से 750 गाँवों तक इसका विस्तार किया जाएगा। यह चरणबद्ध योजना ‘संभव है’ को देश के सबसे महत्वाकांक्षी ग्रामीण सतत विकास कार्यक्रमों में से एक बनाती है।
चारला थांडा में, फाउंडेशन ने जमीनी स्तर पर कार्य शुरू कर दिया है, जिसमें घर-घर डेटा मैपिंग के माध्यम से जलवायु और संसाधनों का व्यापक आधार तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने, भूजल पुनर्भरण प्रणाली को मजबूत करने, तथा संगठित कचरा पृथक्करण और कम्पोस्टिंग व्यवस्था लागू करने पर ध्यान दिया जाएगा। वृक्षारोपण अभियान और पुनर्योजी भूमि प्रबंधन से हरित आवरण बढ़ाया जाएगा, जबकि स्थानीय स्वयंसेवकों को इन प्रयासों को बनाए रखने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह गाँव ‘माइनस वन विलेज’ मॉडल का जीवंत उदाहरण बनेगा, जो अन्य क्षेत्रों में दोहराने के लिए एक खाका तैयार करेगा।
लॉन्च के अवसर पर डॉ . इरफान खान ने कहा, “वास्तविक बदलाव अलग-अलग प्रयासों से नहीं आ सकता। ‘संभव है’ के माध्यम से हम एक ऐसा मॉडल बना रहे हैं, जहाँ पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक प्रगति और सामुदायिक स्वामित्व साथ-साथ चलते हैं। हमारा उद्देश्य गाँवों को ऐसे उपकरण, डेटा और जवाबदेही प्रणाली प्रदान करना है, जिससे वे अपने विकास का नेतृत्व स्वयं कर सकें और भारत के जलवायु लक्ष्यों में सार्थक योगदान दे सकें।”
चरणबद्ध योजना के साथ-साथ, फाउंडेशन कई राज्यों में काम शुरू करेगा, जिससे यह पहल तेलंगाना से आगे बढ़कर पूरे देश में फैल सके और एक राष्ट्रीय ग्रामीण सतत विकास आंदोलन को मजबूती मिले।
सुरेश गोयल, अतिरिक्त निदेशक, ईबीजी फाउंडेशन ने कहा, “‘संभव है’ की सफलता एक मजबूत ढांचे के माध्यम से मापी जाएगी, जिसमें ‘माइनस वन विलेज’ मॉडल के तहत जल, ऊर्जा, कचरा, खाद्य और भूमि प्रणालियों के साथ-साथ कार्बन फुटप्रिंट मेट्रिक्स शामिल होंगे। इससे प्रभाव को मापने योग्य, जवाबदेह और विभिन्न क्षेत्रों में लागू करने योग्य बनाया जा सकेगा।”
अतिरिक्त निदेशक रंजिता एम ने कहा, “एक सरल विचार के रूप में शुरू हुई यह पहल अब बड़े स्तर के परिवर्तन के लिए एक सशक्त आंदोलन बन चुकी है। गाँवों को जलवायु कार्रवाई के केंद्र में रखकर और नीति तथा जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटते हुए, ‘संभव है’ समुदायों को भारत की पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का मार्ग प्रदान करती है।”
पहले चरण के जमीनी कार्यान्वयन के साथ, ‘संभव है’ ईबीजी फाउंडेशन की उस दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें ग्रामीण समुदायों को भारत की जलवायु कार्रवाई यात्रा के केंद्र में रखते हुए मापनीय और विस्तार योग्य प्रभाव उत्पन्न करना शामिल है।
इस लॉन्च कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आर के कोटनाला सचिन सेंगर , ओमप्रिया मोहंती , शारदा नरेला और अजय अरोड़ा उपस्थित थे। इसके अलावा हरि किरन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
*ईबीजी ग्रुप के बारे में**
ईबीजी ग्रुप एक प्रगतिशील कंपनी है, जो नवाचारी उपभोक्ता और लाइफस्टाइल समाधानों में कार्यरत है। यह एक विविध भारतीय उद्यम है, जो मोबिलिटी, रियल एस्टेट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में नवाचार-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है और वैश्विक साझेदारियों के लिए स्केलेबल प्लेटफॉर्म तैयार करता है।
ईबीजी फाउंडेशन के बारे में
ईबीजी फाउंडेशन, ईबीजीग्रुप की परोपकारी शाखा है, जो बाल कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में उच्च-प्रभाव वाले कार्यक्रमों को साझेदारी, डेटा-आधारित क्रियान्वयन और पारदर्शी रिपोर्टिंग के माध्यम से आगे बढ़ाती है।